उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक बेहद दिल दहला देने वाली सड़क दुर्घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। बुधवार रात रीवा-मिर्जापुर हाईवे पर स्थित ड्रमंडगंज घाटी के खतरनाक मोड़ पर चार वाहनों की भीषण टक्कर हो गई। इस हादसे में एक बोलेरो गाड़ी में आग लगने से 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार यह हादसा रात करीब 8 बजे हुआ। घाटी के बड़का मोड़ पर एक गिट्टी से भरा ट्रेलर नीचे उतर रहा था। उसके पीछे एक स्विफ्ट कार चल रही थी। इसी दौरान पीछे से आ रहे दाल लदे ट्रक का अचानक ब्रेक फेल हो गया। अनियंत्रित ट्रक ने सबसे पहले स्विफ्ट कार को जोरदार टक्कर मारी।
टक्कर लगते ही स्विफ्ट कार आगे चल रहे ट्रेलर से जा भिड़ी। इस बीच पीछे से आ रही बोलेरो भी ट्रक में टकरा गई। देखते ही देखते चारों वाहन आपस में भिड़ गए और घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई।
बोलेरो में लगी आग, लोग फंस गए अंदर
टक्कर के तुरंत बाद बोलेरो गाड़ी में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि गाड़ी में सवार लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही मिनटों में बोलेरो पूरी तरह आग की लपटों में घिर गई।
स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए गाड़ी में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग इतनी भीषण थी कि कोई भी पास नहीं जा सका। देखते ही देखते अंदर बैठे लोग जिंदा जल गए।
मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल
इस दर्दनाक हादसे में कुल 11 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। जानकारी के मुताबिक बोलेरो में सवार दो महिलाएं, दो बच्चे और पांच पुरुषों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा स्विफ्ट कार चालक और ट्रक ड्राइवर की भी जान चली गई।
स्विफ्ट कार चालक की पहचान जय प्रकाश (26) निवासी सोनभद्र के रूप में हुई है। अन्य मृतकों की पहचान करने का प्रयास जारी है।
मौके पर पहुंची पुलिस और राहत टीम
घटना की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। ड्रमंडगंज, हलिया और आसपास के थानों की पुलिस फोर्स ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया।
फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियों ने घंटों मशक्कत के बाद बोलेरो में लगी आग पर काबू पाया। इसके बाद जले हुए शवों को बाहर निकाला गया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।
प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंचे मौके पर
घटना की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अफसर भी मौके पर पहुंचे। क्षेत्राधिकारी (सीओ) लालगंज और पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक ने घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह ट्रक का ब्रेक फेल होना सामने आया है। हालांकि, पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि अन्य कारणों का भी पता लगाया जा सके।
वाहनों की पहचान और जांच जारी
पुलिस ने हादसे में शामिल सभी चार वाहनों की पहचान कर ली है। इनमें एक ट्रक बिहार का बताया जा रहा है, जबकि दूसरा ट्रक मध्य प्रदेश का है। स्विफ्ट कार सोनभद्र की है और बोलेरो मिर्जापुर जिले की बताई जा रही है।
पुलिस मृतकों के परिजनों से संपर्क करने की कोशिश कर रही है और उनकी पहचान सुनिश्चित करने में जुटी है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई भयावह स्थिति
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद हालात बेहद भयावह हो गए थे। आग इतनी तेज थी कि कोई भी बोलेरो के पास नहीं जा पा रहा था।
एक प्रत्यक्षदर्शी विमलेश ने बताया कि उन्होंने और अन्य ग्रामीणों ने मिलकर लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कोई प्रयास सफल नहीं हो सका। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फायर ब्रिगेड और प्रशासन मौके पर देर से पहुंचे।
घाटी का खतरनाक मोड़ बना हादसे की वजह
ड्रमंडगंज घाटी का बड़का मोड़ पहले से ही दुर्घटनाओं के लिए जाना जाता है। यहां तीखे मोड़ और ढलान होने के कारण भारी वाहनों के ब्रेक फेल होने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के क्षेत्रों में वाहनों की नियमित जांच और गति नियंत्रण बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाहनों की नियमित जांच हो रही है? क्या खतरनाक घाटी क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय हैं? ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब तलाशना जरूरी है।
अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में भी इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।
निष्कर्ष
मिर्जापुर का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया है। एक छोटी सी तकनीकी खराबी—ब्रेक फेल—ने 11 जिंदगियों को लील लिया।
यह घटना हमें सावधान करती है कि सड़क पर हर पल सतर्क रहना जरूरी है। साथ ही प्रशासन को भी चाहिए कि वह ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करे।
आखिरकार, एक छोटी सी लापरवाही या तकनीकी खामी कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती है। इसलिए जागरूकता, सतर्कता और जिम्मेदारी ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे बड़ा उपाय है।
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