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अंबाला में सनसनीखेज वारदात: युवक की हत्या कर नाले में फेंका शव, मोबाइल और 1.80 लाख रुपये लूटे

हरियाणा के अंबाला जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने इलाके में दहशत और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। एक 24 वर्षीय युवक की बेरहमी से हत्या कर उसका शव नाले में फेंक दिया गया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने वारदात से पहले युवक से उसका मोबाइल फोन और करीब 1.80 लाख रुपये की नकदी भी लूट ली। यह घटना कई दिनों तक रहस्य बनी रही, लेकिन आखिरकार जांच के दौरान खुलासा हुआ कि नाले में मिला अज्ञात शव उसी युवक का था, जो पिछले कई दिनों से लापता चल रहा था।

मृतक की पहचान चरखी दादरी के विश्वकर्मा कॉलोनी निवासी अरविंद के रूप में हुई है। अरविंद 13 फरवरी को घर से निकला था और उसके बाद से ही उसका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। परिजनों के अनुसार, वह जीरकपुर के एक मॉल में जाने की बात कहकर निकला था, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही वह लापता हो गया। शुरुआत में परिवार वालों को उम्मीद थी कि वह किसी कारणवश संपर्क नहीं कर पा रहा होगा, लेकिन जब कई दिन बीत जाने के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला तो उनकी चिंता बढ़ गई।

अरविंद का मोबाइल फोन 14 फरवरी के बाद बंद हो गया था, जिससे परिजनों को शक होने लगा कि उसके साथ कुछ अनहोनी हो चुकी है। काफी खोजबीन के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली, तो आखिरकार 21 मार्च को जीरकपुर थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, लेकिन शुरुआती दौर में जांच की रफ्तार धीमी रही, जिससे परिजनों में नाराजगी भी देखने को मिली।

जांच के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस को जानकारी मिली कि अंबाला कैंट के नन्हेड़ा इलाके में 18 फरवरी को एक नाले से एक अज्ञात शव बरामद किया गया था। उस समय शव की पहचान नहीं हो सकी थी, जिसके चलते पुलिस ने 21 फरवरी को उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। यह मामला उस समय सामान्य अज्ञात शव मिलने के रूप में दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में जब अरविंद की गुमशुदगी की जांच आगे बढ़ी, तो दोनों मामलों के बीच कड़ी जुड़ती नजर आई।

पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों की मदद से जांच को आगे बढ़ाया। फिंगरप्रिंट और पुराने रिकॉर्ड के मिलान के बाद यह पुष्टि हुई कि नाले में मिला शव अरविंद का ही था। यह खुलासा होते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्हें इस बात का गहरा सदमा लगा कि जिस युवक की वे तलाश कर रहे थे, उसका अंतिम संस्कार बिना पहचान के ही कर दिया गया था।

मामले में एक और अहम सुराग तब मिला जब पुलिस ने अरविंद के मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर को ट्रेस किया। जांच में सामने आया कि 15 फरवरी को उसके फोन में एक नया सिम कार्ड डाला गया था, जो उत्तर प्रदेश निवासी अमन प्रसाद के नाम पर रजिस्टर था। इसके बाद पुलिस ने इस नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकाली, जिसमें पता चला कि अमन दो अन्य युवकों के संपर्क में था।

जांच के दौरान एक गवाह ने भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। गवाह ने बताया कि उसने वीडियो कॉल के जरिए अरविंद को अमन के साथ देखा था। यह जानकारी पुलिस के लिए अहम साबित हुई और इससे यह स्पष्ट हो गया कि अरविंद आखिरी बार किन लोगों के संपर्क में था। हालांकि, बाद में संदिग्धों ने अपने फोन बंद कर दिए और पुलिस की पहुंच से दूर हो गए।

परिजनों का आरोप है कि अगर पुलिस शुरुआत में ही तेजी से कार्रवाई करती, तो शायद अरविंद को बचाया जा सकता था या आरोपियों को जल्द पकड़ा जा सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने में देरी की, जिससे आरोपियों को भागने का मौका मिल गया।

फिलहाल पुलिस ने इस मामले में अमन प्रसाद और उसके साथियों के खिलाफ हत्या, लूट और साक्ष्य मिटाने जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है और पुलिस का दावा है कि जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए गहरा आघात है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि किस तरह अपराधी योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम देकर बच निकलने की कोशिश करते हैं। इस मामले में जिस तरह से हत्या के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया और पहचान मिटाने की कोशिश की गई, वह अपराधियों की क्रूर मानसिकता को दर्शाता है।

स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, पुलिस से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई करे।

इस पूरे मामले ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं—क्या पुलिस की शुरुआती लापरवाही इस घटना को सुलझाने में देरी का कारण बनी? क्या तकनीकी जांच को पहले शुरू किया जाता तो आरोपियों को पहले पकड़ा जा सकता था? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसे अपराध समाज को दहशत में डालते रहेंगे?

फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है और परिजन न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अरविंद की दर्दनाक मौत ने यह साफ कर दिया है कि अपराधियों के हौसले किस हद तक बढ़ चुके हैं और उन्हें रोकने के लिए सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी है।

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