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दिव्यांश हत्याकांड में सनसनीखेज खुलासे, आरोपी की धमकी और दबंग बयान से बढ़ा आक्रोश

उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आए दिव्यांश हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मासूम बच्चे के साथ हुई बर्बरता और उसके बाद आरोपियों के रवैये ने समाज में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। इस मामले में पुलिस ने गुरुकुल संचालक सौरभ मिश्रा और उसकी प्रेमिका हर्षिता सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन घटना से जुड़े खुलासे लगातार लोगों को हैरान कर रहे हैं।

मामला कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र के गौरिया गांव का है, जहां 11 वर्षीय छात्र दिव्यांश की निर्मम हत्या कर दी गई। वह लखनऊ के आलमनगर स्थित एक गुरुकुल में पढ़ाई कर रहा था। शुक्रवार को पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी गुरुकुल संचालक सौरभ मिश्रा और उसकी सहयोगी हर्षिता सोनी को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।

इस दौरान जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई, वह आरोपी सौरभ मिश्रा का कैमरे के सामने दिया गया बयान था। उसने बिना किसी डर के कहा कि उसके गुरुकुल में बड़े-बड़े मंत्री और नेता आते हैं और उसे किसी बात का डर नहीं है। उसने यहां तक दावा किया कि वह दस दिनों के भीतर जमानत पर बाहर आ जाएगा। आरोपी का यह रवैया न केवल कानून के प्रति उसकी बेपरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वह खुद को कितना प्रभावशाली मानता है।

सौरभ मिश्रा ने आगे यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो देशभर के गुरुकुल संचालक उसके समर्थन में खड़े हो जाएंगे। उसके इस बयान ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर आरोपी को इतना आत्मविश्वास कहां से मिल रहा है।

पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाले हैं। दिव्यांश के शरीर पर 42 से अधिक चोटों के निशान पाए गए हैं। बताया गया है कि उसे निर्वस्त्र कर डंडों से बेरहमी से पीटा गया था। इतना ही नहीं, उसके शरीर पर सिगरेट से जलाने के भी निशान मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि बच्चे के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गई थीं।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह स्वीकार किया कि गुरुकुल में बच्चों को अनुशासन सिखाने के नाम पर मारपीट की जाती थी। हालांकि, उसने यह भी दावा किया कि बच्चे को पहले ही गांव से पीटकर भेजा गया था, लेकिन पुलिस इस दावे की सच्चाई की जांच कर रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने साक्ष्य जुटाने में तेजी दिखाई है। महाराजपुर थाना प्रभारी के अनुसार, आरोपियों के पास से टूटे हुए सीसीटीवी कैमरे और डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर बरामद किए गए हैं। माना जा रहा है कि इन उपकरणों को सबूत मिटाने के उद्देश्य से तोड़ा गया था। इसके अलावा, हत्या में इस्तेमाल किया गया डंडा भी पुलिस ने बरामद कर लिया है।

जांच में यह भी सामने आया है कि सौरभ मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के पैलानी क्षेत्र का रहने वाला है, जबकि उसकी प्रेमिका हर्षिता सोनी मध्यप्रदेश के छतरपुर की निवासी है। दोनों लखनऊ के राजाजीपुरम इलाके में रह रहे थे और वहीं से गुरुकुल का संचालन किया जा रहा था।

घटना के बाद गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य बच्चे बेहद डरे हुए हैं। वे अपने परिवारों से संपर्क कर रहे हैं और व्हाट्सएप के माध्यम से अपनी आवाज रिकॉर्ड कर जानकारी ले रहे हैं। एक बच्चे ने बताया कि आरोपी ने उसे भी धमकाया था कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी किडनी निकालकर बेच दी जाएगी। इस तरह की धमकियों ने बच्चों और उनके परिवारों को पूरी तरह से भयभीत कर दिया है।

इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में कई विधायक और वरिष्ठ नेता शामिल थे, जिन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल विधायक अमिताभ बाजपेई ने कहा कि इस घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया है और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी जल्द ही पीड़ित परिवार से मिलने आएंगे।

वहीं, अन्य नेताओं ने राज्य सरकार पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा अब केवल दिखावा बनकर रह गया है। उन्होंने मांग की कि आरोपी के गुरुकुल पर बुलडोजर चलाया जाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।

पूर्व सांसद राजाराम पाल ने कहा कि जिस तरह से मासूम बच्चे को प्रताड़ित कर उसकी हत्या की गई है, वह बेहद निंदनीय है और इसमें शामिल लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है और आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूत इकट्ठा करने का प्रयास कर रही है। वहीं, समाज में इस घटना को लेकर आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है और लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

दिव्यांश हत्याकांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा संस्थानों में उनके साथ होने वाले व्यवहार पर कितनी निगरानी जरूरी है। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि ऐसे मामलों में सख्ती और सतर्कता बेहद जरूरी है।

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