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डीजीपी छत्तीसगढ़ ने वित्त नियंत्रक शंकर झा को सराहा, प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया सम्मानित

नवा रायपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर में पदस्थ वित्त नियंत्रक शंकर झा को उनके उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधन, नियमसम्मत कार्यप्रणाली, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक दक्षता के लिए छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम (भा.पु.से.) द्वारा प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान न केवल श्री झा की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छत्तीसगढ़ वित्त सेवा संवर्ग के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा व्यापक स्तर पर मैथिल समाज के लिए भी गर्व और प्रेरणा का विषय बनकर उभरा है।

 

वित्त नियंत्रक शंकर झा को सम्मानित करते डीजीपी छत्तीसगढ़

शंकर झा ने अपने कार्यकाल के दौरान वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में उच्च मानकों की स्थापना की है। उन्होंने प्रत्येक दायित्व को गंभीरता, सूझबूझ एवं नियमों के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ निभाया है। उनकी कार्यशैली में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही तथा मितव्ययिता के सिद्धांतों का स्पष्ट समावेश दिखाई देता है। यही कारण है कि उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया है।

 

विशेष रूप से, छत्तीसगढ़ राज्य में लागू तीन नए कानूनों के प्रचार-प्रसार से संबंधित रजत जयंती समारोह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के लिए आवश्यक वित्तीय व्यवस्थाओं का संचालन श्री झा द्वारा अत्यंत कुशलता के साथ किया गया। यह आयोजन राज्य स्तर पर व्यापक पैमाने पर संपन्न हुआ, जिसमें विभिन्न विभागों, अधिकारियों तथा संसाधनों का समन्वय आवश्यक था। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन को सुव्यवस्थित रखना, बजट का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना तथा सभी व्ययों को शासकीय नियमों के अनुरूप संचालित करना एक बड़ी चुनौती थी। श्री झा ने इस चुनौती को न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसे सफलता में परिवर्तित करते हुए सभी वित्तीय प्रक्रियाओं को समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न कराया।

 

इस दौरान उन्होंने वित्तीय अनुमोदनों, व्यय नियंत्रण, संसाधनों के कुशल उपयोग तथा भुगतान प्रक्रियाओं को सरल एवं व्यवस्थित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से यह सुनिश्चित हुआ कि सभी कार्यक्रम निर्धारित मानकों के अनुरूप संपन्न हों और किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की संभावना न रहे। यह उनकी दूरदर्शिता एवं पेशेवर दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इसके अतिरिक्त, नवम्बर 2025 में छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस द्वारा आयोजित डीजीपी/आईजीपी राष्ट्रीय सम्मेलन जैसे उच्च स्तरीय आयोजन में भी श्री झा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। यह सम्मेलन देशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में आयोजित किया गया था, जिसके लिए उच्च स्तर की व्यवस्थाएं एवं संसाधनों का समुचित प्रबंधन आवश्यक था। इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान विभिन्न सामग्रियों एवं सेवाओं की खरीद प्रक्रिया, निविदा संबंधी कार्य, वित्तीय स्वीकृतियां एवं व्यय नियंत्रण जैसे जटिल कार्यों का निर्वहन श्री झा द्वारा अत्यंत सावधानी एवं दक्षता के साथ किया गया।
उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि सभी क्रय प्रक्रियाएं शासकीय भंडार नियमों के अनुरूप हों तथा मितव्ययिता के सिद्धांतों का पूर्ण पालन किया जाए। साथ ही, वित्तीय प्रस्तावों के त्वरित एवं पारदर्शी निराकरण के माध्यम से उन्होंने आयोजन की गति एवं गुणवत्ता दोनों को बनाए रखा। उनके द्वारा अपनाई गई कार्यप्रणाली ने न केवल आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया, बल्कि वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

श्री झा की कार्यशैली की विशेषता यह है कि वे जटिल परिस्थितियों में भी संतुलित निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं। वे नियमों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध रहते हुए नवाचार एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण को भी महत्व देते हैं। उनके नेतृत्व में कार्य करने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी भी उनकी कार्यशैली से प्रेरित होकर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। टीम समन्वय, समय प्रबंधन एवं कार्यों के प्रति जिम्मेदारी की भावना उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं हैं।

 

पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने शंकर झा को प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए उनके उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्री झा का कार्य वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में अनुकरणीय है और उनकी कार्यशैली अन्य अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने विशेष रूप से श्री झा की उद्भट प्रतिभा, सकारात्मक सहयोग, कर्तव्यनिष्ठा एवं नियमसम्मत कार्यप्रणाली की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के अधिकारी प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस अवसर पर यह भी उल्लेख किया गया कि श्री झा ने अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए सदैव शासन के दिशा-निर्देशों एवं वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया है। उन्होंने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं, यदि योजना निर्माण, संसाधनों का प्रबंधन एवं कार्यान्वयन सही तरीके से किया जाए। उनकी यह सोच प्रशासनिक कार्यों में दक्षता एवं पारदर्शिता को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हुई है।

 

 

शंकर झा का यह सम्मान उनके समर्पण, कठोर परिश्रम एवं पेशेवर उत्कृष्टता का प्रमाण है। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, बल्कि यह राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं कुशल वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने की दिशा में भी एक सकारात्मक संकेत है। उनके इस सम्मान से अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शासन-प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दें।

अंततः, शंकर झा को प्राप्त यह सम्मान यह दर्शाता है कि यदि किसी अधिकारी में कार्य के प्रति समर्पण, ईमानदारी, दक्षता एवं नियमों के प्रति निष्ठा हो, तो वह किसी भी चुनौतीपूर्ण दायित्व को सफलतापूर्वक निभा सकता है। उनका यह योगदान निश्चित रूप से आने वाले समय में भी प्रशासनिक उत्कृष्टता के मानकों को और ऊंचाई प्रदान करेगा तथा राज्य के विकास एवं सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

 

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