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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का पांचवां चरण देगा नई रफ्तार, अक्टूबर 2026 तक गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने का लक्ष्य

मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सड़क नेटवर्क को और बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के पांचवें चरण को लेकर प्रशासन ने नई समय-सीमा तय कर दी है। अब इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस चरण के पूरा होते ही दिल्ली से गंगा एक्सप्रेसवे के जरिए प्रयागराज तक का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा।

यह पांचवां चरण दरअसल एक कनेक्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इसकी कुल लंबाई लगभग 14 किलोमीटर है। यह कनेक्टर लोहियानगर इंटरचेंज से शुरू होकर जैनुद्दीनपुर इंटरचेंज तक जाएगा, जहां यह दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के चौथे चरण (डासना-परतापुर खंड) से जुड़ेगा। वहीं हापुड़ की ओर करीब 9 किलोमीटर दूरी पर बिजौली के पास गंगा एक्सप्रेसवे से इसका संपर्क स्थापित होगा।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली से आने वाले वाहन सीधे इस कनेक्टर के जरिए गंगा एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे। इससे प्रयागराज और पूर्वी उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों तक यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। इसी तरह, पूर्वांचल से आने वाले वाहन भी इस मार्ग का उपयोग करते हुए आसानी से दिल्ली पहुंच सकेंगे।

हालांकि, इस परियोजना की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं है। कई कारणों से निर्माण कार्य में देरी हुई है। पहले इस चरण को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन जमीनी विवाद, तकनीकी अड़चनें और स्थानीय विरोध के चलते काम निर्धारित समय पर पूरा नहीं हो सका।

सबसे बड़ी चुनौती दो प्रमुख इंटरचेंज—लोहियानगर और जैनुद्दीनपुर—का अधूरा निर्माण है। लोहियानगर इंटरचेंज, जो हापुड़ हाईवे पर डंपिंग ग्राउंड के पास प्रस्तावित है, अभी पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है। यहां अंडरपास का निर्माण अधूरा है और रैंप के लिए जरूरी मिट्टी भराव का काम भी शुरू नहीं हो सका है।

दूसरी ओर जैनुद्दीनपुर इंटरचेंज पर कुछ प्रगति जरूर हुई है। यहां अंडरपास का ढांचा तैयार हो चुका है और पुल पर गर्डर भी रख दिए गए हैं। लेकिन अंडरपास और पुल को जोड़ने के लिए अभी मिट्टी भराव और डामर बिछाने का काम बाकी है। इसके अलावा रैंप निर्माण भी अधूरा है, जिससे यातायात पूरी तरह सुचारु नहीं हो पा रहा।

इस परियोजना में देरी की एक बड़ी वजह किसानों का विरोध भी है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में तलहटा और आसपास के गांवों के किसान धरने पर बैठे हैं और उन्होंने निर्माण कार्य को रोक रखा है। किसानों की मुख्य मांग है कि जैनुद्दीनपुर इंटरचेंज पर स्थानीय गांवों के लिए चढ़ने-उतरने के लिए रैंप बनाया जाए।

किसानों का कहना है कि यदि यह सुविधा नहीं दी गई, तो उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होगी। इसके अलावा किसानों ने मुआवजे को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि सभी प्रभावित किसानों को समान मुआवजा नहीं मिला है।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा खेतों तक पहुंच का है। एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान कई जगहों पर खेतों तक जाने वाले रास्ते बंद हो गए हैं। किसानों की मांग है कि एक्सप्रेसवे के साथ सर्विस रोड बनाई जाए, ताकि वे अपने खेतों तक आसानी से पहुंच सकें। साथ ही जिन किसानों की जमीन से मिट्टी ली गई है, उन्हें उसका उचित भुगतान भी दिया जाए।

प्रशासन इन सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। मेरठ मंडल के कमिश्नर भानु चंद्र गोस्वामी इस परियोजना की प्रगति की निगरानी कर रहे हैं। वे संबंधित अधिकारियों के साथ नियमित बैठकें कर रहे हैं, ताकि निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को जल्द से जल्द दूर किया जा सके।

इस परियोजना के पूरा होने के बाद मेरठ के बड़े हिस्से को सीधा लाभ मिलेगा। शास्त्रीनगर, मेडिकल, गंगानगर, डिफेंस कॉलोनी और मवाना जैसे क्षेत्रों के लोग दिल्ली आने-जाने के लिए इस नए मार्ग का उपयोग कर सकेंगे। इससे यात्रा का समय कम होगा और ट्रैफिक जाम की समस्या भी घटेगी।

इसके अलावा यह कनेक्टर मवाना, परीक्षितगढ़, नजीबाबाद और बिजनौर जैसे शहरों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों जैसे पौड़ी की ओर जाने वाले लोगों के लिए यह मार्ग एक बेहतर विकल्प बनकर उभरेगा।

शहर के भीतर ट्रैफिक दबाव को कम करने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बिजली बंबा बाईपास, जहां अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है, वहां इस कनेक्टर के बनने से राहत मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का पांचवां चरण क्षेत्रीय विकास और कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, इसके सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन यदि प्रशासन और किसानों के बीच सहमति बन जाती है, तो यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी हो सकती है। इसके पूरा होने के बाद दिल्ली से प्रयागराज तक की यात्रा न केवल तेज होगी, बल्कि अधिक सुविधाजनक भी बन जाएगी।

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