उत्तर प्रदेश में होने वाली आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और इस बार प्रक्रिया कई मायनों में खास रहने वाली है। पहली बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी, जिसमें आम लोगों को अपने परिवार और घर से जुड़ी विस्तृत जानकारी देनी होगी। इस प्रक्रिया में कुल 34 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें बुनियादी सुविधाओं से लेकर जीवन स्तर तक की जानकारी शामिल होगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे बिना किसी डर या संकोच के सही और पूरी जानकारी दें, क्योंकि यह डेटा पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा।

Uttar Pradesh में जनगणना 2027 का कार्य व्यापक स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इसके तहत राज्य के 75 जिलों, 783 शहरी निकायों और 350 तहसीलों के अंतर्गत आने वाले लगभग 1.04 लाख गांवों को कवर किया जाएगा। इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए करीब 3.90 लाख मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं, जहां प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
जनगणना के दौरान जो जानकारी ली जाएगी, उसमें मकान से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल हैं। जैसे मकान नंबर, घर में मौजूद कमरों की संख्या, रसोई की स्थिति, एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन है या नहीं, पेयजल का स्रोत क्या है, छत, दीवार और फर्श किस सामग्री के बने हैं—इन सभी बातों का विवरण देना होगा। इसके अलावा परिवार से जुड़ी जानकारी जैसे विवाहित जोड़ों की संख्या, परिवार के सदस्यों की संख्या आदि भी पूछे जाएंगे।
इतना ही नहीं, जनगणना में अब आधुनिक जीवनशैली से जुड़े सवाल भी शामिल किए गए हैं। लोगों से पूछा जाएगा कि उनके घर में टीवी, मोबाइल, कार, बाइक, साइकिल जैसी सुविधाएं हैं या नहीं। साथ ही इंटरनेट की उपलब्धता भी एक अहम सवाल होगा। इन सवालों के जरिए सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि राज्य में डिजिटल और भौतिक सुविधाओं की स्थिति क्या है।
जनगणना निदेशक Sheetal Verma के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में जुटाया गया डेटा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस जानकारी का उपयोग किसी भी तरह की जांच, टैक्स या पुलिस कार्रवाई में नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य केवल विकास योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े जुटाना है।
इस बार की जनगणना की एक खास बात यह भी है कि इसमें “स्वगणना” की सुविधा दी जा रही है। यानी लोग घर बैठे ही ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। इसके लिए एक निर्धारित पोर्टल पर जाकर परिवार का मुखिया अपनी जानकारी दर्ज कर सकता है। यह प्रक्रिया 7 मई से शुरू होकर 21 मई तक चलेगी। फॉर्म भरने के बाद एक यूनिक आईडी मिलेगी, जिसे प्रगणक के साथ साझा करना होगा।
इसके बाद 22 मई से 20 जून के बीच प्रगणक घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन करेंगे। अगर किसी ने पहले से ऑनलाइन फॉर्म भर दिया है, तो यह प्रक्रिया काफी आसान और तेज हो जाएगी। वहीं जिन लोगों ने ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरा होगा, उनके लिए प्रगणक मौके पर ही जानकारी दर्ज करेंगे।
जनगणना दो चरणों में पूरी होगी। पहले चरण में मकान सूचीकरण और घरों की गणना होगी, जबकि दूसरे चरण में व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाएगी, जिसमें जाति, धर्म और अन्य सामाजिक पहलुओं से जुड़े सवाल शामिल होंगे। दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होने की संभावना है।
इस बड़े अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य में लगभग 5.25 लाख अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इनमें मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, तहसीलदार, शिक्षक और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। करीब 5 लाख प्रगणक और पर्यवेक्षक इस कार्य में सीधे तौर पर जुड़े होंगे।
चूंकि यह कार्य गर्मी के मौसम में किया जा रहा है, इसलिए कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सुबह या शाम के समय ही काम करें, ताकि गर्मी से बचा जा सके। एक प्रगणक को औसतन 180 मकानों की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे एक महीने में पूरा करना है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि शिक्षकों की ड्यूटी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
अगर किसी व्यक्ति को जनगणना से जुड़ी जानकारी में कोई संदेह होता है, तो उसके लिए हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। लोग टोल-फ्री नंबर 1855 पर कॉल कर अपनी शंकाओं का समाधान कर सकते हैं। इसके अलावा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विस्तृत जानकारी दी गई है।
विशेष बात यह है कि इस बार एक परिवार से केवल एक ही फॉर्म भरना होगा। परिवार का मुखिया सभी सदस्यों की जानकारी एक साथ दर्ज करेगा। अगर किसी कारणवश एक ही परिवार के दो लोग फॉर्म भर देते हैं, तो प्रगणक सत्यापन के दौरान इसे सही कर देंगे।
यह जनगणना देश के लिए भी खास है क्योंकि यह 1872 के बाद 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना होगी। इस बार डिजिटल माध्यम के उपयोग से प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की कोशिश की जा रही है।
जनगणना के आंकड़े सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इन्हीं के आधार पर विकास योजनाएं बनाई जाती हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियां इसी डेटा पर आधारित होती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि लोग सही और सटीक जानकारी दें।
अंततः, यूपी में होने वाली जनगणना 2027 केवल एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य के विकास की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है, ताकि भविष्य की योजनाएं सही दिशा में आगे बढ़ सकें।
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