बढ़ापुर क्षेत्र के ग्राम इनायतपुर में शुक्रवार शाम एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने मां की ममता और साहस की मिसाल पेश कर दी। गन्ने के खेत में अचानक हुए गुलदार के हमले के दौरान एक मां ने बिना अपनी जान की परवाह किए दरांती उठाकर गुलदार से मुकाबला किया और अपने 10 वर्षीय बेटे की जान बचा ली। इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत के साथ-साथ महिला की बहादुरी की चर्चा हो रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम इनायतपुर निवासी सुरेंद्र सिंह की पत्नी कुसुम देवी रोजमर्रा की तरह शुक्रवार की शाम अपने 10 वर्षीय पुत्र प्रिंस के साथ गांव के पास स्थित गन्ने के खेत में छिलाई करने गई थीं। खेत जंगल से सटा हुआ है, लेकिन ग्रामीण अक्सर वहां काम करने जाते रहते हैं। कुसुम देवी गन्ने की छिलाई में व्यस्त थीं, जबकि उनका बेटा प्रिंस कुछ दूरी पर बैठकर खेल रहा था। चारों ओर शांति थी और किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में यह सन्नाटा खौफ में बदल जाएगा।
अचानक गन्ने के घने खेत से एक गुलदार निकलकर बाहर आया और सीधे मासूम प्रिंस पर झपट पड़ा। पल भर में बच्चे की चीख-पुकार गूंज उठी। बेटे पर हमला होते देख कुसुम देवी घबरा जरूर गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनके हाथ में छिलाई के लिए रखी दरांती थी। बिना एक पल सोचे उन्होंने गुलदार की ओर दौड़ लगाई और पूरी ताकत से उसका सामना कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुसुम देवी ने दरांती लहराते हुए गुलदार को डराने की कोशिश की और उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। अचानक हुए इस साहसी प्रतिरोध से गुलदार घबरा गया। कुछ ही पलों में वह बच्चे को छोड़कर गन्ने के खेत की ओर भाग खड़ा हुआ। मां की हिम्मत और सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया, वरना परिणाम बेहद भयावह हो सकता था।
घटना के बाद कुसुम देवी अपने घायल पुत्र प्रिंस को लेकर तुरंत गांव पहुंचीं। बच्चे के शरीर पर गुलदार के पंजों के निशान और चोटें थीं। परिजनों ने बिना देर किए प्रिंस को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे की हालत स्थिर है और समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई। प्राथमिक उपचार के बाद प्रिंस को घर भेज दिया गया, हालांकि उसे कुछ दिनों तक चिकित्सकीय निगरानी में रखने की सलाह दी गई है।
घटना की सूचना मिलते ही इनायतपुर वन चौकी के वनकर्मी मौके पर पहुंचे और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। ग्रामीणों में इस घटना के बाद भय का माहौल है। उनका कहना है कि जंगल से सटे होने के कारण पहले भी जंगली जानवरों की आवाजाही देखी गई है, लेकिन गुलदार का इस तरह खेत में आकर बच्चे पर हमला करना बेहद चिंताजनक है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से गुलदार को जल्द से जल्द पकड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। खासकर खेतों में काम करने वाली महिलाएं और बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों ने गांव के आसपास पिंजरे लगाने और नियमित गश्त बढ़ाने की भी मांग की है।
इस संबंध में साहूवाला रेंज के वन क्षेत्राधिकारी रामवृक्ष राव ने बताया कि ग्राम इनायतपुर जंगल से सटा हुआ है, जिस कारण जंगली जानवरों की आवाजाही की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है और गुलदार को पकड़ने के लिए घटनास्थल के पास दो पिंजरे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा वन विभाग की टीम लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही है ताकि किसी अन्य अप्रिय घटना को रोका जा सके।
वन विभाग ने ग्रामीणों से भी सतर्क रहने की अपील की है। खेतों में काम करते समय अकेले न जाने, बच्चों को निगरानी में रखने और शाम के समय जंगल से सटे इलाकों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना वन विभाग या पुलिस को देने को कहा गया है।
इस घटना के बाद गांव में कुसुम देवी की बहादुरी की खूब चर्चा हो रही है। लोग कह रहे हैं कि अगर उस समय उन्होंने साहस न दिखाया होता, तो न जाने क्या हो जाता। एक साधारण ग्रामीण महिला ने जिस तरह अपनी सूझबूझ और हिम्मत से गुलदार का सामना किया, वह हर किसी के लिए प्रेरणा है।
हालांकि, इस घटना ने यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि जंगल से सटे गांवों में मानव और वन्यजीव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और जागरूकता बेहद जरूरी है। फिलहाल गांव के लोग यही उम्मीद कर रहे हैं कि वन विभाग जल्द से जल्द गुलदार को पकड़कर क्षेत्र को सुरक्षित बनाएगा, ताकि भविष्य में किसी और मां को इस तरह अपने बच्चे की जान बचाने के लिए जंगली जानवर से भिड़ना न पड़े।
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