उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक युवक की कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यह कहानी न सिर्फ अनोखी है, बल्कि समाज में बदलती सोच और रिश्तों की सच्चाई को भी उजागर करती है। यहां एक युवक ने अपनी शादीशुदा जिंदगी से परेशान होकर भगवान से अलग होने की मन्नत मांगी और जब उसकी यह इच्छा पूरी हुई, तो उसने 9 किलोमीटर तक साष्टांग दंडवत यात्रा कर अपनी श्रद्धा प्रकट की।

रवि नाम का यह युवक अपने वैवाहिक जीवन से खुश नहीं था। शादी के बाद से ही उसकी पत्नी के साथ अनबन शुरू हो गई थी। समय के साथ यह अनबन बढ़ती गई और रोज-रोज के झगड़े उनके जीवन का हिस्सा बन गए। स्थिति इतनी खराब हो गई कि दोनों के लिए साथ रहना मुश्किल हो गया।
मानसिक तनाव से परेशान होकर रवि ने भगवान की शरण ली। उन्होंने मां बैड़वा मंदिर में जाकर प्रार्थना की कि उन्हें इस रिश्ते से मुक्ति मिले। साथ ही उन्होंने वचन दिया कि यदि उनकी मन्नत पूरी हुई, तो वह दंडवत परिक्रमा करते हुए मंदिर तक आएंगे।
कुछ समय बाद उनकी यह मन्नत पूरी हो गई और वह कानूनी रूप से अपनी पत्नी से अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने अपने वादे को निभाने का निर्णय लिया।
रवि सुबह-सुबह अपने घर से निकले और बिना कुछ खाए-पीए 9 किलोमीटर लंबी यात्रा शुरू की। वह हर कदम पर जमीन पर लेटते और फिर उठकर आगे बढ़ते। यह प्रक्रिया बेहद कठिन थी, लेकिन उनकी आस्था और संकल्प ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
इस यात्रा में उनके माता-पिता और गांव के कई लोग भी शामिल हुए। रास्ते में लोग उन्हें देखते और हैरान होते रहे। कुछ लोग इसे श्रद्धा का प्रतीक मान रहे थे, तो कुछ इसे रिश्तों में बढ़ती दूरियों का संकेत।
शाम तक रवि मंदिर पहुंचे। उनका शरीर थक चुका था, घुटने जख्मी हो चुके थे, लेकिन चेहरे पर सुकून था। उन्होंने मंदिर में पूजा कर अपनी मन्नत पूरी होने के लिए धन्यवाद दिया।
यह घटना अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह न सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी है, बल्कि यह समाज में बदलती सोच और रिश्तों के प्रति नजरिए को भी दर्शाती है। जहां पहले लोग रिश्तों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करते थे, वहीं अब लोग अपने मानसिक सुकून के लिए अलग होने को भी स्वीकार कर रहे हैं।
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