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खाड़ी देशों में जॉब के नाम पर जाल: पूर्व सैनिकों को निशाना बनाकर जासूसी कराने की साजिश, सेना ने जारी की चेतावनी

विदेश में ऊंची सैलरी वाली नौकरी का सपना कई लोगों को आकर्षित करता है, लेकिन हालिया खुफिया इनपुट्स ने एक चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी Inter-Services Intelligence कथित तौर पर भारतीय पूर्व सैनिकों को निशाना बनाकर खाड़ी देशों में जासूसी नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रही है।

इसी खतरे को देखते हुए Indian Army ने अपने सेवानिवृत्त सैनिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। उन्हें संदिग्ध प्लेसमेंट एजेंसियों से सावधान रहने और विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले पूरी जांच करने की सलाह दी गई है।

नौकरी का लालच, फिर दबाव का खेल

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र के कई देशों—जैसे Saudi Arabia, Oman, Kuwait, Qatar और United Arab Emirates—में सुरक्षा गार्ड या निजी सुरक्षा सेवाओं की ऊंची तनख्वाह वाली नौकरियों का प्रस्ताव देकर पूर्व सैनिकों को बुलाया जाता है।

विदेश पहुंचने के बाद उन्हें संवेदनशील सैन्य जानकारी जुटाने के लिए दबाव डाला जाता है। शुरुआत में आकर्षक वेतन, मेडिकल सुविधाएं और बेहतर जीवनशैली का वादा किया जाता है, लेकिन बाद में कथित तौर पर उन्हें जासूसी गतिविधियों में शामिल होने को मजबूर किया जाता है।

किसे बनाया जा रहा है निशाना

रिपोर्टों के अनुसार एजेंट विशेष रूप से उन पूर्व सैनिकों को निशाना बनाते हैं:

जिनकी उम्र लगभग 45–55 वर्ष के बीच हो

जिन्होंने 12–20 वर्ष तक सेवा की हो

जिनका अभी भी अपने पुराने सैन्य संपर्कों से जुड़ाव हो

ऐसे लोगों को “सॉफ्ट टारगेट” माना जाता है क्योंकि वे अनुशासित होते हैं, सुरक्षा कार्यों में अनुभव रखते हैं और अक्सर आर्थिक स्थिरता की तलाश में रहते हैं।

प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए जाल

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में एक दक्षिण भारतीय प्लेसमेंट नेटवर्क के माध्यम से सैकड़ों पूर्व सैनिकों को खाड़ी देशों में भेजे जाने की बात सामने आई है। आशंका है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय हो सकता है और विदेशी एजेंसियों से जुड़ा हो सकता है।

ऐसे मामलों में भर्ती प्रक्रिया वैध दिखती है, लेकिन बाद में अनुबंध, वेतन और काम की शर्तें बदल दी जाती हैं। कई बार पासपोर्ट तक जब्त कर लिए जाते हैं, जिससे पीड़ितों के पास विकल्प सीमित रह जाते हैं।

जासूसी से इनकार करने पर क्या होता है

खुफिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जो लोग देश के प्रति वफादारी दिखाते हुए जासूसी करने से मना करते हैं, उन्हें कथित तौर पर कई तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।

इनमें शामिल हो सकते हैं:

वेतन रोक देना

चिकित्सा सुविधा से वंचित करना

फर्जी आरोपों में फंसाना

हिरासत या अलग-थलग रखने की धमकी

शारीरिक या मानसिक दबाव

विदेशी धरती पर होने के कारण कई लोग डर और मजबूरी में टूट जाते हैं, जिसका फायदा ऐसे नेटवर्क उठाने की कोशिश करते हैं।

सेना की एडवाइजरी: सतर्क रहें, जांच करें

भारतीय सेना ने अपने पूर्व सैनिकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वे विदेश में नौकरी स्वीकार करने से पहले:

एजेंसी की वैधता की जांच करें

आधिकारिक चैनलों से सत्यापन कराएं

अनुबंध की शर्तों को समझें

परिवार और स्थानीय प्रशासन को जानकारी दें

सेना का कहना है कि संदिग्ध प्रस्तावों की सूचना तुरंत संबंधित प्राधिकरणों को दी जानी चाहिए।

क्यों गंभीर है यह मामला

विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्व सैनिकों को निशाना बनाना किसी भी देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। वे सैन्य ढांचे, प्रक्रियाओं और संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी रखते हैं, इसलिए उन्हें फंसाने की कोशिश राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बन सकता है।

यह मामला केवल रोजगार धोखाधड़ी नहीं, बल्कि संभावित जासूसी और मानवाधिकार उल्लंघन से भी जुड़ा हो सकता है।

क्या करें पूर्व सैनिक और नौकरी तलाश रहे लोग

सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है:

विदेशी नौकरी के ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें

केवल सरकारी या मान्यता प्राप्त एजेंसियों के जरिए आवेदन करें

अनुबंध की प्रति भारत में परिवार को दें

पासपोर्ट किसी के पास न छोड़ें

दूतावास की हेल्पलाइन नंबर अपने पास रखें

निष्कर्ष

खाड़ी देशों में नौकरी के नाम पर संभावित जाल की खबरों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

पूर्व सैनिकों के अनुभव और कौशल देश की संपत्ति हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

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