उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने कथित तौर पर फर्जी तरीके से बैंक में क्लर्क की नौकरी हासिल कर ली और करीब दो साल तक आराम से नौकरी करता रहा। लेकिन आखिरकार तकनीक के सामने उसका खेल खत्म हो गया और बायोमेट्रिक जांच ने पूरे घोटाले की पोल खोल दी।

यह मामला यूको बैंक की गाजीपुर शाखा से जुड़ा हुआ है। आरोपी युवक, जिसकी पहचान राजेश कुमार के रूप में हुई है, बैंक में क्लर्क के पद पर तैनात था। वह नियमित रूप से अपनी ड्यूटी कर रहा था और उसे वेतन सहित सभी सुविधाएं मिल रही थीं। बैंक के अन्य कर्मचारियों को भी उस पर कोई संदेह नहीं था।
जानकारी के मुताबिक, इस भर्ती प्रक्रिया को आईबीपीएस के माध्यम से पूरा किया गया था। आईबीपीएस द्वारा आयोजित इस प्रक्रिया में उम्मीदवारों को आवेदन, परीक्षा और दस्तावेज सत्यापन के दौरान बायोमेट्रिक जानकारी देना अनिवार्य होता है। इसी के आधार पर उम्मीदवार की पहचान सुनिश्चित की जाती है।
बताया जा रहा है कि राजेश कुमार ने भी इसी प्रक्रिया के तहत आवेदन किया था। वह बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज का निवासी है। चयन के बाद उसने वर्ष 2023 में यूको बैंक की पीलीभीत शाखा में अपनी नौकरी शुरू की थी। वहां कुछ समय तक काम करने के बाद अक्टूबर 2025 में उसका ट्रांसफर गाजीपुर शाखा में कर दिया गया।
सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था, लेकिन इसी बीच बैंक को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी मिली। बताया गया कि कोविड काल के दौरान हुई कुछ भर्तियों में गड़बड़ी हो सकती है। कुछ उम्मीदवारों ने फर्जी दस्तावेजों और दूसरे लोगों से परीक्षा दिलवाकर नौकरी हासिल की हो सकती है।
इस सूचना के बाद आईबीपीएस और बैंक प्रबंधन ने मिलकर संदिग्ध कर्मचारियों की दोबारा जांच करने का फैसला किया। इसके तहत कई कर्मचारियों को बुलाकर उनके बायोमेट्रिक डेटा का मिलान किया गया।
जब राजेश कुमार की जांच की गई तो बड़ा खुलासा हुआ। भर्ती के समय जो बायोमेट्रिक डेटा दर्ज किया गया था, वह वर्तमान में लिए गए डेटा से मेल नहीं खा रहा था। यह अंतर इतना स्पष्ट था कि अधिकारियों को तुरंत समझ आ गया कि मामला गंभीर है।
जांच में यह आशंका जताई गई कि परीक्षा के दौरान किसी अन्य व्यक्ति ने उसकी जगह परीक्षा दी थी और उसी के बायोमेट्रिक का इस्तेमाल कर चयन प्रक्रिया पूरी की गई। यानी नौकरी पाने के लिए पहले से ही पूरी योजना बनाकर फर्जीवाड़ा किया गया था।
इस खुलासे के बाद बैंक प्रबंधन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए राजेश कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया। उससे पूछा गया कि उसके बायोमेट्रिक डेटा में अंतर क्यों है और वह इसका क्या जवाब देना चाहता है।
लेकिन आरोपी ने इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया। उसकी चुप्पी ने बैंक के शक को और मजबूत कर दिया। इसके बाद बैंक ने सख्त कदम उठाते हुए 7 फरवरी को उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
मामले को गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए बैंक ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। यूको बैंक के शाखा प्रबंधक की ओर से गाजीपुर के सदर कोतवाली में तहरीर दी गई, जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि क्या इस फर्जीवाड़े में कोई और लोग या गिरोह शामिल है। यह भी देखा जा रहा है कि क्या अन्य भर्तियों में भी इसी तरह की गड़बड़ी हुई है।
इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि भले ही कोई व्यक्ति कुछ समय तक सिस्टम को धोखा दे सकता है, लेकिन तकनीकी जांच से बच पाना मुश्किल है। बायोमेट्रिक जैसी आधुनिक तकनीक ऐसे मामलों को पकड़ने में बेहद कारगर साबित हो रही है।
स्थानीय स्तर पर भी इस घटना की काफी चर्चा हो रही है। लोग हैरान हैं कि कोई व्यक्ति इस तरह की चालाकी करके इतने लंबे समय तक नौकरी कर सकता है।
यह मामला न केवल बैंकिंग व्यवस्था के लिए, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र के लिए एक सबक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आने वाले समय में इस मामले से जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।
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