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किराये के बैंक खाते से अरबों का खेल: कानपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के Kanpur से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने साइबर अपराध के नए और खतरनाक तरीकों को उजागर कर दिया है। एक साधारण डिलीवरी बॉय के बैंक खाते का इस्तेमाल कर नौ महीने के भीतर करीब 1.30 अरब रुपये का लेनदेन किया गया। इस मामले में पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर उस युवक का बैंक खाता किराये पर लेकर बड़े स्तर पर साइबर ठगी को अंजाम दिया।

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित युवक, जो पहले फल का व्यापार करता था और बाद में डिलीवरी बॉय की नौकरी करने लगा, को अपने बैंक खाते में हो रहे असामान्य लेनदेन पर शक हुआ। दरअसल, उसने कुछ समय पहले अपना चालू बैंक खाता अपने दो परिचितों को किराये पर दे दिया था। उन युवकों ने उसे हर महीने 9,000 रुपये देने की बात कही थी, लेकिन कुछ समय बाद उसे तय रकम से ज्यादा पैसे मिलने लगे, जिससे उसे संदेह हुआ।

पीड़ित ने जब बैंक जाकर अपने खाते की जानकारी ली, तो उसके होश उड़ गए। उसे पता चला कि उसके खाते से करोड़ों नहीं, बल्कि अरबों रुपये का ट्रांजेक्शन हो चुका है। यह रकम करीब 1.30 अरब रुपये थी, जो पिछले नौ महीनों में विभिन्न माध्यमों से ट्रांसफर की गई थी। इतनी बड़ी रकम के लेनदेन ने उसे झकझोर कर रख दिया और उसने तुरंत पुलिस का सहारा लिया।

मामले की शिकायत Swaroop Nagar Police Station में दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि जिन दो युवकों ने बैंक खाता किराये पर लिया था, वे इस पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क के अहम कड़ी थे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान मो. अमान और मो. वसीउद्दीन उर्फ सरताज के रूप में हुई है। ये दोनों युवक कानपुर के बेकनगंज और चमनगंज इलाके के निवासी हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि उन्होंने पीड़ित युवक को स्क्रैप कारोबार के नाम पर बहलाकर उसका बैंक खाता किराये पर लिया था। इसके बाद उन्होंने खाते से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज, जैसे डेबिट कार्ड, चेकबुक आदि अपने कब्जे में ले लिए।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी इस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी और अवैध लेनदेन के लिए कर रहे थे। वे विभिन्न कंपनियों और लोगों से ठगी के जरिए पैसे इकट्ठा करते और फिर इस खाते के माध्यम से उन्हें इधर-उधर ट्रांसफर करते थे। इस तरह उन्होंने एक “म्यूल बैंक अकाउंट” के रूप में इस खाते का उपयोग किया, जिससे उनकी पहचान छिपी रहे।

इस पूरे मामले में Atul Kumar Srivastava ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपियों के पास से कई अहम सबूत बरामद किए गए हैं। इनमें नोट गिनने की मशीन, दो फर्जी फर्मों के बैनर, 39 खाली चेक, किरायेदारी से जुड़े दस्तावेज, एग्रीमेंट और कई आधार कार्ड शामिल हैं। इन सामानों से यह साफ होता है कि आरोपी संगठित तरीके से इस तरह की ठगी को अंजाम दे रहे थे।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी केवल एक ही खाते तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने ऐसे कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उनके पास कितने “म्यूल अकाउंट” थे और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि इस ठगी के शिकार कितने लोग या कंपनियां हुई हैं।

यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है। आजकल अपराधी सीधे लोगों को निशाना बनाने के बजाय ऐसे साधारण लोगों के खातों का इस्तेमाल करते हैं, जो अनजाने में या लालच में आकर अपना खाता किराये पर दे देते हैं। इससे अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाना आसान हो जाता है और जांच एजेंसियों के लिए उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्थिति में अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए देना बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे व्यक्ति न केवल आर्थिक जोखिम में पड़ता है, बल्कि कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में अक्सर खाता धारक को भी संदेह के दायरे में लिया जाता है।

इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खातों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति या परिचित को भी अपना खाता उपयोग करने के लिए न दें। इसके अलावा यदि खाते में किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करें।

कानपुर का यह मामला यह भी दर्शाता है कि साइबर अपराधी अब कितने संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं। वे नए-नए तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और बड़ी रकम की ठगी को अंजाम देते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आम लोग भी जागरूक रहें और किसी भी लालच में आकर अपनी निजी जानकारी या बैंकिंग सुविधाएं साझा न करें।

कुल मिलाकर, यह घटना एक बड़ी चेतावनी है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। थोड़ी सी लापरवाही या लालच किसी को भी बड़े अपराध का हिस्सा बना सकती है। इसलिए जरूरी है कि लोग अपने वित्तीय मामलों को लेकर पूरी तरह सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें।

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