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कानपुर किडनी रैकेट का बड़ा खुलासा: फर्जी ‘डॉक्टर’ और दलालों का नेटवर्क, 50 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट की जांच

कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट घोटाले ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को हिला कर रख दिया है। इस मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले दो वर्षों में शहर के नौ नर्सिंग होम में 50 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए गए। इस पूरे रैकेट का संचालन एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जा रहा था, जो खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को गुमराह करता था, जबकि वह वास्तव में एक अस्पताल कर्मचारी था।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्रवाई में इस बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ। जांच के दौरान आहूजा हॉस्पिटल को केंद्र में रखते हुए पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ, जहां कई अवैध ट्रांसप्लांट किए गए। पुलिस के अनुसार आरोपी शिवम अग्रवाल, जो कि इस गिरोह का अहम सदस्य है, ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अकेले इस अस्पताल में सात ट्रांसप्लांट कराए।

जांच में यह भी सामने आया कि शिवम अग्रवाल का शहर के कई नर्सिंग होम, मेडिकल स्टोर और सर्जिकल उपकरण आपूर्ति करने वाले केंद्रों से गहरा संपर्क था। इसी नेटवर्क का फायदा उठाकर उसने दिल्ली, नोएडा और मेरठ जैसे शहरों में सक्रिय दलालों और डॉक्टरों से संबंध बनाए। इसके जरिए मरीजों और डोनरों की व्यवस्था की जाती थी।

इस अवैध गतिविधि को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया जाता था, जिससे किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती थी। मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया जाता और रात के समय ऑपरेशन किए जाते थे। हाल ही में रविवार देर रात भी एक किडनी ट्रांसप्लांट किया गया, जिसके बाद पुलिस को इस मामले की सूचना मिली और कार्रवाई शुरू हुई।

पुलिस जांच के दायरे में अब शहर के कई प्रमुख इलाके आ चुके हैं। रावतपुर, किदवईनगर, बर्रा, नौबस्ता, काकादेव और सिविल लाइंस क्षेत्र के बड़े नर्सिंग होम रडार पर हैं। इसके अलावा एक नामी निजी अस्पताल लखनऊ में भी इस तरह के अवैध ट्रांसप्लांट होने की बात सामने आई है। पुलिस और सीएमओ कार्यालय की टीमें इन सभी संस्थानों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाने में लगी हैं।

इस मामले में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें आईएमए कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, तीन अस्पताल संचालक और दलाल शिवम अग्रवाल शामिल हैं। पुलिस ने कुल 15 आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अन्य गिरफ्तार आरोपियों में मेडलाइफ हॉस्पिटल, प्रिया हॉस्पिटल और आरोही हॉस्पिटल के संचालक भी शामिल हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं। किडनी देने वाले व्यक्ति बिहार के रहने वाले आयुष बताए जा रहे हैं, जबकि किडनी लेने वाली मरीज मेरठ की निवासी पारुल तोमर हैं। यह ट्रांसप्लांट आहूजा हॉस्पिटल में किया गया था।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए आपस में संपर्क बनाए रखता था। जरूरतमंद गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनकी किडनी 5 से 10 लाख रुपये में खरीदी जाती थी, जबकि अमीर मरीजों को वही किडनी 60 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक में बेची जाती थी। इस तरह यह पूरा रैकेट करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार कर रहा था।

एक मामले में सामने आया कि बिहार के एक छात्र आयुष को 10 लाख रुपये का लालच देकर किडनी देने के लिए तैयार किया गया। हालांकि बाद में उसे केवल 9.5 लाख रुपये ही दिए गए। बाकी रकम मांगने पर उसे टाल दिया गया, जिसके बाद उसने पुलिस से संपर्क किया। इसी शिकायत के आधार पर पूरे मामले का खुलासा हुआ।

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अवैध तरीके से किए गए ट्रांसप्लांट के कारण मरीज की जान भी खतरे में पड़ गई। मेरठ की पारुल तोमर, जिनका ट्रांसप्लांट किया गया था, की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्हें हैलेट अस्पताल के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी विभाग में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है।

डॉक्टरों के अनुसार, प्रत्यारोपित किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है और शरीर में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। ब्लड प्रेशर भी अस्थिर बना हुआ है। ऐसे में उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के एसजीपीजीआई रेफर करने की तैयारी की जा रही है। वहीं किडनी देने वाले आयुष की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

यह मामला न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे लालच और गैरकानूनी गतिविधियां लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। अब देखना होगा कि पुलिस इस पूरे नेटवर्क को कितनी गहराई तक पकड़ पाती है और दोषियों के खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई होती है।

कुल मिलाकर, कानपुर का यह किडनी कांड एक गंभीर चेतावनी है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में निगरानी और पारदर्शिता को और मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

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