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मुंबई विकास को रफ्तार देने के लिए 80,952 करोड़ का बजट, इंफ्रास्ट्रक्चर और शहरी सुविधाओं पर बड़ा दांव

देश की सबसे समृद्ध नगर निकायों में गिनी जाने वाली बृहन्मुंबई नगर निगम ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए 80,952.56 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। यह बजट पिछले वर्ष के 74,427.41 करोड़ रुपये की तुलना में करीब 8.77 प्रतिशत अधिक है। इस बार बजट का मुख्य जोर शहर में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, बेहतर शहरी परिवहन व्यवस्था, जल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर रखा गया है, ताकि महानगर के विकास को नई गति मिल सके।

नगर निगम आयुक्त भूषण गागरानी ने बजट पेश करते हुए कहा कि मुंबई के दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत खर्च को काफी बढ़ाया गया है। इस वर्ष पूंजीगत व्यय 48,164.28 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान 39,159.51 करोड़ रुपये से लगभग 11.59 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन शहर की आधारभूत संरचना पर भारी निवेश करने के मूड में है।

बड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता

बजट में कई महत्वपूर्ण सड़क और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिए बड़ी रकम तय की गई है। कोस्टल रोड परियोजना और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के लिए कुल 13,990 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में ट्रैफिक दबाव कम करना और पूर्व-पश्चिम संपर्क को मजबूत बनाना है।

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और अन्य बुनियादी परियोजनाओं के लिए 4,104.39 करोड़ रुपये रखे गए हैं, ताकि प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था बेहतर हो सके। जल सुरक्षा को भी बजट में प्राथमिकता मिली है। पानी से जुड़ी परियोजनाओं के लिए 6,475 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें मनोरी में प्रस्तावित डीसैलिनेशन प्लांट के लिए 500 करोड़ रुपये और गार्गई जल परियोजना के लिए 437.51 करोड़ रुपये शामिल हैं। इन योजनाओं से भविष्य में पानी की कमी से निपटने में मदद मिलने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बड़ा निवेश

शहर के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने के लिए इस बार 7,456.80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें नए मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों के निर्माण, मौजूदा अस्पतालों के आधुनिकीकरण और परिधीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

नगर निगम का मानना है कि बढ़ती आबादी और शहरी दबाव को देखते हुए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार आवश्यक है। इसी कारण बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र का हिस्सा पहले से ज्यादा किया गया है।

रिजर्व फंड से विकास परियोजनाओं को सहारा

नगर निगम ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट से 36,623.09 करोड़ रुपये की राशि प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए अलग रखने का फैसला किया है। निगम के पास कुल 81,449.32 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट मौजूद हैं। हालांकि इनमें से 44,826.23 करोड़ रुपये पेंशन और ठेकेदारों की सुरक्षा जमा जैसी दीर्घकालिक जिम्मेदारियों के लिए सुरक्षित रखे गए हैं।

इस कदम से साफ है कि प्रशासन विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए अपनी वित्तीय ताकत का इस्तेमाल करना चाहता है।

आय और खर्च का संतुलन

बजट के अनुसार वर्ष 2026–27 में नगर निगम की कुल आय 51,510.94 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19.35 प्रतिशत अधिक है। संपत्ति कर से करीब 7,000 करोड़ रुपये प्राप्त होने की उम्मीद जताई गई है।

राजस्व व्यय 32,698.44 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 15.71 प्रतिशत अधिक है। अनुमानित बजट अधिशेष 89.84 करोड़ रुपये रखा गया है। इसका मतलब है कि निगम खर्च बढ़ाने के बावजूद वित्तीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

डिजिटल और तकनीकी पहल

इस बार बजट में तकनीक आधारित पहलों को भी शामिल किया गया है। स्ट्रीट वेंडर्स के लिए QR कोड आधारित प्रमाणन प्रणाली शुरू करने की घोषणा की गई है। इससे वैध फेरीवालों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और अवैध होकिंग पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

इसके अलावा एआई आधारित नागरिक सहायता सेवाओं को मजबूत करने और 1,150 से अधिक सीसीटीवी कैमरों को उन्नत वीडियो एनालिटिक्स से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इससे शहर की निगरानी व्यवस्था अधिक स्मार्ट और प्रभावी होने की उम्मीद है।

विपक्ष ने उठाए सवाल

बजट पेश होने के बाद विपक्षी दलों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस और शिव सेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि बजट आम नागरिकों के बजाय ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने वाला है।

कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड ने दावा किया कि निगम पर 2.45 लाख करोड़ रुपये की जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिसका असर अंततः नागरिकों पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि रिजर्व फंड का इतना बड़ा हिस्सा विकास परियोजनाओं में क्यों लगाया जा रहा है।

वहीं शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि उनके शासनकाल में निगम का बजट घाटे से निकलकर मजबूत हुआ था, जबकि मौजूदा प्रशासन के समय फिक्स्ड डिपॉजिट में कमी आई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में वित्तीय अनुशासन कमजोर हुआ है।

शहर के भविष्य की दिशा तय करेगा बजट

कुल मिलाकर यह बजट मुंबई के बुनियादी ढांचे, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में शहर को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाया जाए।

हालांकि विपक्ष की आलोचनाएं भी बजट को राजनीतिक बहस का मुद्दा बना रही हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि घोषित परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं या नहीं और उनका लाभ वास्तव में नागरिकों तक पहुंच पाता है या नहीं।

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