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जमीन दिलाने के नाम पर ठगी का जाल: गोरखपुर में 44 लाख रुपये हड़पे, चार आरोपियों पर केस दर्ज

गोरखपुर में जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को सावधान रहने की जरूरत का एहसास करा दिया है। एक कारोबारी को सुनियोजित तरीके से झांसा देकर करीब 44 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। आरोप है कि चार लोगों ने मिलकर पहले जमीन दिखाकर भरोसा जीता और फिर पैसे लेने के बाद बैनामा करने से साफ मुकर गए। अब इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह पूरा मामला गुलरिहा थाना क्षेत्र से जुड़ा है। पीड़ित दिग्विजय सिंह, जो जगदीशपुर के निवासी हैं, एक प्राइवेट कंपनी ‘धर्मक बिल्डर्स एंड कालोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक हैं। वे अपने कारोबार का विस्तार करना चाहते थे और इसी सिलसिले में मेडिकल कॉलेज के आसपास जमीन की तलाश कर रहे थे।

इसी दौरान उनकी मुलाकात सलेमपुर उर्फ मुगलपुर के रहने वाले राजेंद्र नाथ और उनके बेटों अरुण कुमार, संदीप कुमार और सुनील कुमार से हुई। इन लोगों ने खुद को जमीन का मालिक बताते हुए दिग्विजय सिंह को भरोसा दिलाया कि वे उन्हें अच्छी लोकेशन पर जमीन उपलब्ध करवा सकते हैं।

बातचीत के बाद आरोपियों ने दिग्विजय सिंह को हमीदपुर क्षेत्र में एक जमीन दिखाई। जमीन पसंद आने पर दोनों पक्षों के बीच लगभग 44 लाख रुपये में सौदा तय हो गया। भरोसा मजबूत करने के लिए आरोपियों ने खुद को पिछड़ी जाति का बताया, जिससे जमीन के लेन-देन में कोई कानूनी अड़चन न लगे।

दिग्विजय सिंह ने उनकी बातों पर भरोसा करते हुए करीब 38 लाख 80 हजार रुपये बतौर एडवांस दे दिए। इसके बाद आरोपियों ने एक और जमीन का प्रस्ताव रखा, जो सलेमपुर उर्फ मुगलपुर इलाके में थी। इस जमीन के लिए भी करीब 40 लाख रुपये में सौदा तय हुआ, जिसके एवज में पीड़ित ने करीब 5 लाख 20 हजार रुपये नकद और बैंक के माध्यम से भुगतान किया।

इस तरह अलग-अलग सौदों के नाम पर आरोपियों ने कुल मिलाकर लगभग 44 लाख रुपये अपने कब्जे में ले लिए। शुरुआत में सब कुछ ठीक लग रहा था और पीड़ित को उम्मीद थी कि जल्द ही जमीन का बैनामा उनके नाम हो जाएगा।

लेकिन जैसे ही बैनामा करने की बारी आई, आरोपियों का रवैया बदल गया। उन्होंने अचानक खुद को अनुसूचित जाति का बताते हुए जमीन का बैनामा करने से इनकार कर दिया। इस आधार पर उन्होंने कहा कि वे यह सौदा आगे नहीं बढ़ा सकते।

इसके बाद आरोपियों ने लगातार टालमटोल शुरू कर दी। जब दिग्विजय सिंह ने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्होंने साफ मना कर दिया। इतना ही नहीं, आरोप है कि उन्होंने पीड़ित को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी।

लंबे समय तक परेशान रहने के बाद आखिरकार दिग्विजय सिंह ने पुलिस से मदद लेने का फैसला किया। उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर पूरी घटना की जानकारी दी और न्याय की मांग की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद गुलरिहा थाना पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। सीओ गोरखनाथ ने बताया कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

यह मामला इस बात का उदाहरण है कि किस तरह जालसाज लोगों को विश्वास में लेकर उन्हें आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाते हैं। जमीन के कारोबार में अक्सर लोग बिना पूरी जांच-पड़ताल के बड़ी रकम निवेश कर देते हैं, जिसका फायदा उठाकर ठग उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जमीन के सौदे से पहले उसकी पूरी कानूनी जांच करना बेहद जरूरी है। जमीन के दस्तावेज, मालिकाना हक और विक्रेता की पृष्ठभूमि की अच्छी तरह से पड़ताल करनी चाहिए। साथ ही, किसी भी बड़ी रकम का भुगतान करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

गोरखपुर की यह घटना आम लोगों के लिए एक चेतावनी है कि वे जमीन खरीदने से पहले पूरी सतर्कता बरतें। थोड़ी सी लापरवाही उन्हें बड़े नुकसान में डाल सकती है।

फिलहाल पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उन्हें कानून के तहत कड़ी सजा मिल सकती है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी नहीं है, बल्कि यह समाज में बढ़ते आर्थिक अपराधों का संकेत भी है। ऐसे मामलों में जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई ही इस तरह की घटनाओं को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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