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कोडीन कफ सिरप रैकेट पर शिकंजा, सात पर चार्जशीट; फर्जी फर्मों से 12 करोड़ की एंट्री

कोडीनयुक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई और हवाला नेटवर्क से जुड़े बहुचर्चित मामले में रोहनिया पुलिस ने विवेचना पूरी कर सात आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने कागजी और फर्जी फर्मों का जाल बिछाकर अवैध कमाई को बैंकिंग चैनल में दाखिल करने की सुनियोजित व्यवस्था बना रखी थी। पुलिस ने ई-वे बिल, बैंक स्टेटमेंट, सीसीटीवी फुटेज, आईटीआर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टोल डेटा और विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट सहित कई तकनीकी साक्ष्यों को आरोप पत्र का हिस्सा बनाया है।

ये हैं नामजद आरोपी

चार्जशीट में आजाद जायसवाल (सिगरा), महेश कुमार सिंह (रोहनिया), शिवाकांत उर्फ शिव (कानपुर नगर), स्वपनिल केसरी (चंदौली), दिनेश कुमार यादव (मैदागिन), आशीष यादव (जैतपुरा) और भोला प्रसाद (आदमपुर) को आरोपी बनाया गया है। भोला प्रसाद शैली ट्रेडर्स का प्रोपराइटर बताया गया है। मामले का कथित सरगना शुभम जायसवाल का साझेदार सौरभ त्यागी इस समय त्रिपुरा जेल में बंद है। रोहनिया पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर लाकर कोर्ट में पेश करने की तैयारी में है।

फर्जी फर्मों का जाल, हवाला की एंट्री

विवेचना में सामने आया कि गिरोह ने अवैध नकदी को वैध दिखाने के लिए कई कागजी फर्में खड़ी की थीं। नकद रकम पहले अलग-अलग फर्जी फर्मों के खातों में जमा की जाती थी, फिर वहां से चरणबद्ध तरीके से ट्रांसफर कर शैली ट्रेडर्स तक पहुंचाई जाती थी। इस तरह हवाला से मिले धन को बैंकिंग चैनल में दाखिल कर उसका स्रोत छिपाया जाता था।

जांच में तीन प्रमुख फर्म—सिंह मेडिकोस, अलउकाबा और एसपी फार्मा—के खातों में करीब 12 करोड़ रुपये जमा होने के साक्ष्य मिले। पुलिस की छापेमारी में इन फर्मों के पते पर सिर्फ कुर्सी-टेबल और गद्दा मिला, जिससे स्पष्ट हुआ कि ये संस्थाएं कागजों पर ही संचालित थीं।

कागजों में कारोबार, असल में तस्करी

पुलिस के मुताबिक, खरीद-बिक्री के बिल और ई-वे बिल कागजी औपचारिकताओं के लिए तैयार किए जाते थे, जबकि असली माल की आवाजाही अलग चैनलों से होती थी। सिरप को शुभम और भोला जायसवाल के निर्देशन में अज्ञात ठिकानों पर छिपाकर रखा जाता, फिर सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाया जाता था। जांच में यह भी संकेत मिला है कि बांग्लादेश सीमा के पार इसे ऊंची कीमतों पर बेचा जाता था—स्थानीय कीमत से कई गुना अधिक।

यह पूरा नेटवर्क बहुस्तरीय था—एक टीम नकद इकट्ठा करती, दूसरी बैंकिंग लेयरिंग संभालती, जबकि तीसरी सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट का प्रबंधन करती थी। टोल डेटा और कॉल रिकॉर्ड से आरोपियों की आवाजाही और आपसी संपर्क की कड़ियां जोड़ी गईं।

तकनीकी साक्ष्यों का सहारा

मामले को मजबूत बनाने के लिए पुलिस ने बैंक मैनेजर और कैशियर के बयान दर्ज किए। स्वतंत्र गवाहों के बयान भी जोड़े गए हैं। औषधि निरीक्षक की रिपोर्ट में संबंधित कफ सिरप के दुरुपयोग और नियंत्रण श्रेणी का उल्लेख है। रामनगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट और संबंधित दवा कंपनियों की जानकारी भी चार्जशीट का हिस्सा है।

सीसीटीवी फुटेज से नकद जमा करने और संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि हुई। आईटीआर और बैंक स्टेटमेंट के विश्लेषण से आय और लेनदेन में असामान्य अंतर सामने आया, जिसने फर्जीवाड़े के आरोपों को बल दिया।

सौरभ त्यागी की पेशी जल्द

सरगना के साझेदार सौरभ त्यागी के बारे में पुलिस का कहना है कि वह त्रिपुरा जेल में बंद है। उसे प्रोडक्शन वारंट पर लाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि उसकी पेशी से नेटवर्क की अंतरराज्यीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय कड़ियों के बारे में और जानकारी मिलेगी।

आपराधिक इतिहास और पुरानी कड़ियां

जांच में यह भी सामने आया कि शैली ट्रेडर्स के संचालक और अन्य आरोपियों पर वाराणसी, सोनभद्र, जौनपुर, चंदौली, गाजियाबाद, मिर्जापुर और रांची सहित कई जिलों में एनडीपीएस एक्ट और बीएनएस की गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह गिरोह लंबे समय से नशीली दवाओं की अवैध सप्लाई में सक्रिय रहा है।

पुलिस का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक खेप या एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यापक नेटवर्क का हिस्सा था। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में सुनवाई के दौरान और तथ्य सामने आ सकते हैं।

आगे की राह

अधिकारियों के अनुसार, चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होगी। यदि अदालत आरोप तय करती है, तो आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा चलेगा। पुलिस वित्तीय ट्रेल की और गहराई से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध कमाई का इस्तेमाल किन-किन माध्यमों में हुआ।

कोडीनयुक्त दवाओं का दुरुपयोग लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। यह मामला दिखाता है कि किस तरह वैध दवा के नाम पर अवैध नेटवर्क खड़ा कर करोड़ों की हेराफेरी की जा सकती है। फिलहाल, पुलिस का दावा है कि तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर मामला मजबूत है। अदालत में सुनवाई के साथ ही इस रैकेट की परतें और खुलने की संभावना है।

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