Breaking News

देशभर में साइबर ठगी का महाजाल टूटा: 16 राज्यों में छापेमारी, 104 आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों की लूट का खुलासा

देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में पुलिस को अहम सफलता मिली है। दक्षिण भारत से शुरू हुई जांच ने पूरे देश में फैले एक संगठित ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। इस कार्रवाई का नेतृत्व तेलंगाना पुलिस ने किया, जिसने अलग-अलग राज्यों में समन्वित अभियान चलाकर 104 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार यह गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था।

जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क देश के कई हिस्सों में सक्रिय था। गिरफ्तारी अभियान में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड सहित कुल 16 राज्यों में एक साथ छापेमारी की गई। पुलिस ने बताया कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे — कोई बैंकिंग सिस्टम से जुड़ा था, कोई फर्जी खाते उपलब्ध कराता था, तो कोई लोगों को झांसा देकर पैसे ट्रांसफर करवाने का काम करता था।

बैंकिंग नेटवर्क और म्यूल खातों से चल रहा था खेल

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार लोगों में एक निजी बैंक का रिलेशनशिप मैनेजर भी शामिल है, जिसने ठगों को बैंकिंग प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराई। इसके अलावा 17 अकाउंट एग्रीगेटर और 80 से अधिक म्यूल अकाउंट धारक पकड़े गए हैं। ये म्यूल खाते ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने और ट्रैकिंग से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते थे।

जांच अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह तकनीकी रूप से काफी संगठित था। वे पहले लोगों की जानकारी जुटाते, फिर निवेश योजनाओं, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म या सरकारी जांच एजेंसियों के नाम पर संपर्क करते और डर या लालच के जरिए पैसे ट्रांसफर करवाते थे। कई मामलों में पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उनके खिलाफ जांच चल रही है और उन्हें सहयोग करना होगा।

ऑपरेशन “ऑक्टोपस” से फैला जाल टूटा

पुलिस ने इस कार्रवाई को “ऑक्टोपस” नाम दिया था, क्योंकि गिरोह की शाखाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में फैली हुई थीं। अभियान के दौरान अनुभवी जांचकर्ताओं की 32 विशेष टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने अलग-अलग राज्यों में जाकर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की।

अभियान के दौरान जिन राज्यों में छापेमारी हुई उनमें महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश और ओडिशा भी शामिल रहे। पुलिस का कहना है कि 10 दिनों तक लगातार चले इस अभियान में बड़ी मात्रा में डिजिटल डाटा, बैंक रिकॉर्ड और मोबाइल उपकरण जब्त किए गए।

1,000 से ज्यादा मामलों से जुड़ा नेटवर्क

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी देशभर में दर्ज 1,000 से अधिक साइबर धोखाधड़ी के मामलों से जुड़े पाए गए हैं। शुरुआती जांच में ही लगभग 127 करोड़ रुपये की ठगी का पता चला है। अधिकारियों का मानना है कि वास्तविक रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई पीड़ित अब भी सामने नहीं आए हैं।

हाल के महीनों में निवेश ठगी, ट्रेडिंग फ्रॉड और तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। साइबर अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, जांच एजेंसी या बैंक प्रतिनिधि बताकर लोगों को डराते हैं और ऑनलाइन नियंत्रण में लेकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।

राजधानी में 72 घंटे में दर्ज हुए दर्जनों केस

साइबर ठगी की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भोपाल में मात्र 72 घंटों के भीतर 50 से अधिक साइबर फ्रॉड के मामले दर्ज किए गए। पुलिस के अनुसार इन मामलों में ठग तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम उड़ा चुके हैं। कई शिकायतों की जांच अभी भी जारी है और संभावना है कि रकम और बढ़ सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अब छोटे शहरों को भी निशाना बना रहे हैं, जहां डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता अपेक्षाकृत कम होती है।

“डिजिटल अरेस्ट” का सनसनीखेज मामला

सबसे चौंकाने वाला मामला तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” का सामने आया। इस घटना में अपराधियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर एक परिवार को महीनों तक मानसिक दबाव में रखा। पीड़िता को यह विश्वास दिलाया गया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंस सकती हैं, इसलिए उन्हें ऑनलाइन निगरानी में रहना होगा।

इस दौरान ठगों ने लगातार संपर्क बनाए रखा और डर का माहौल बनाकर बड़ी रकम ऐंठ ली। यह घटना दिसंबर 2025 की बताई जा रही है, जिसकी शिकायत अब दर्ज हुई है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधी मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी तरीकों का मिश्रण इस्तेमाल करते हैं।

पुलिस की चेतावनी और सलाह

जांच अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध अब संगठित अपराध का नया रूप बनता जा रहा है। गिरोह तकनीकी ज्ञान, बैंकिंग सिस्टम और सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर लोगों को फंसा रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, निवेश प्रस्ताव या जांच एजेंसी के नाम पर आने वाले संदेश पर तुरंत भरोसा न करें।

साथ ही, किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को देने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।

आगे क्या होगा?

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है। डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग लेन-देन की जांच से उम्मीद है कि गिरोह की पूरी संरचना सामने आएगी। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ एक बड़ा संदेश है और आने वाले समय में ऐसे अभियानों को और तेज किया जाएगा।

Check Also

‘राहुल गांधी न्याय योद्धा हैं’, अलका लांबा का बयान; NEET पेपर लीक पर शिक्षा मंत्री को घेरा

राहुल गांधी से मिलने पहुंचे देशभर के कार्यकर्ता, अलका लांबा ने बताया “न्याय योद्धा”; NEET …

स्लोवाकिया के राष्ट्रपति को मिला भारत की विरासत का खास उपहार

नई दिल्ली। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय कारीगरों की अद्वितीय कला …

पुणे की घटना पर देशभर में आक्रोश: मासूम के साथ दरिंदगी ने उठाए सुरक्षा और न्याय पर सवाल

महाराष्ट्र के Pune जिले में चार साल की बच्ची के साथ हुई जघन्य घटना ने …