मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां आर्थिक तंगी और गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक युवक ने आत्महत्या कर ली। शुक्रवार सुबह 28 वर्षीय जाहिद का शव उसकी ससुराल में कमरे के अंदर पंखे के कुंडे से लटका हुआ मिला। इस घटना से न सिर्फ दोनों परिवारों में कोहराम मच गया, बल्कि पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

जानकारी के अनुसार जाहिद पेशे से दर्जी था और अपने परिवार की जिम्मेदारियां उठाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा था। उस पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था और साथ ही वह लंबे समय से बीमारी से भी परेशान था। इन परिस्थितियों ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया था। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से उसकी हालत लगातार बिगड़ रही थी और वह काफी तनाव में रहने लगा था।
पिलोखड़ी चौकी क्षेत्र के लखीपुरा मोहल्ले का रहने वाला जाहिद पिछले एक महीने से अपनी ससुराल में रह रहा था। उसका विवाह करीब पांच साल पहले लिसाड़ी गेट इलाके की 24 नंबर गली निवासी समरीन से हुआ था। दंपती के दो छोटे बच्चे हैं—एक बेटा और एक बेटी। सबसे मार्मिक बात यह है कि बच्चों को अब तक अपने पिता की मौत की सच्चाई नहीं बताई गई है।
परिजनों के अनुसार जाहिद लंबे समय से आर्थिक संकट में था। इलाज पर खर्च और उधार के कारण उस पर कर्ज बढ़ता चला गया। बीमारी की वजह से वह नियमित रूप से काम भी नहीं कर पा रहा था, जिससे आमदनी लगभग ठप हो गई थी। इसी तनाव का असर उसके पारिवारिक जीवन पर भी पड़ने लगा था। पति-पत्नी के बीच अक्सर इसी बात को लेकर विवाद होता रहता था।
बताया गया है कि यह पहली बार नहीं था जब जाहिद ने ऐसा कदम उठाने की कोशिश की हो। करीब चार महीने पहले भी उसने आत्महत्या करने का प्रयास किया था, लेकिन उस समय परिवार के लोगों ने उसे समय रहते समझा-बुझाकर संभाल लिया था। परिजनों को उम्मीद थी कि हालात धीरे-धीरे बेहतर होंगे, लेकिन मानसिक दबाव इतना गहरा था कि वह फिर से उबर नहीं पाया।
शुक्रवार सुबह जब काफी देर तक जाहिद कमरे से बाहर नहीं निकला, तो पत्नी समरीन ने उसे आवाज लगाई। अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। जब दरवाजा खटखटाने पर भी कोई हलचल नहीं हुई, तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे किसी तरह तोड़ा गया। जैसे ही दरवाजा खुला, अंदर का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए। जाहिद का शव चुन्नी के सहारे छत पर लगे पंखे के कुंडे से लटका हुआ था।
इस दृश्य को देखकर परिजनों की चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए। कुछ ही देर में घटना की सूचना पुलिस को दी गई। लिसाड़ी गेट थाना पुलिस और पिलोखड़ी चौकी की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने शव को नीचे उतरवाया और प्रारंभिक जांच के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया पूरी की।
हालांकि परिजनों ने शुरू में किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि यह पूरी तरह पारिवारिक और निजी मामला है और जाहिद ने अपनी परेशानियों के चलते खुद यह कदम उठाया है। लेकिन पुलिस ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें समझाया और शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवाया गया।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जा सकेगी। फिलहाल परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत या तहरीर नहीं दी गई है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
इस घटना ने एक बार फिर समाज के सामने कर्ज और बीमारी से जुड़ी गंभीर समस्याओं को उजागर कर दिया है। आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां अक्सर व्यक्ति को मानसिक रूप से इतना कमजोर कर देती हैं कि वह खुद को अकेला और असहाय महसूस करने लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समय रहते मानसिक और सामाजिक सहयोग मिल जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
जाहिद की मौत के बाद दोनों परिवार गहरे सदमे में हैं। घर का माहौल मातम में बदल गया है। पत्नी समरीन का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं बुजुर्ग माता-पिता बेटे की मौत से टूट चुके हैं। पड़ोसी और रिश्तेदार लगातार परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह खालीपन शायद कभी नहीं भर पाएगा।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है कि आर्थिक और मानसिक तनाव से जूझ रहे लोगों को नजरअंदाज न किया जाए। समय पर मदद, संवाद और सहानुभूति शायद किसी को इतना बड़ा कदम उठाने से रोक सकती है।
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