हरियाणा के कैथल जिले से सामने आया यह मामला अंधविश्वास के खतरनाक रूप को उजागर करता है, जहां एक परिवार ने बीमारी और घरेलू परेशानियों से छुटकारा पाने के चक्कर में अपनी पूरी जमा पूंजी गंवा दी। बुढ़ा खेड़ा गांव का यह मामला न केवल आर्थिक ठगी का है, बल्कि मानसिक शोषण और डर के जरिए लोगों को काबू में करने का भी उदाहरण है।

पीड़ित परिवार के सदस्य अमनदीप के अनुसार, उनके पिता सुखबीर सिंह पिछले कुछ वर्षों से लगातार सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याओं से जूझ रहे थे। परिवार ने कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन कोई खास राहत नहीं मिली। इसके साथ ही घर में तनाव और झगड़े भी बढ़ते जा रहे थे, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान हो चुका था।
इसी बीच किसी जानकार ने उन्हें गांव की एक महिला सुमन के बारे में बताया, जो खुद को तांत्रिक बताती थी और झाड़-फूंक के जरिए समस्याओं का समाधान करने का दावा करती थी। शुरुआत में परिवार ने इसे आखिरी उम्मीद के रूप में देखा और सुमन से संपर्क किया। यहीं से उनकी जिंदगी में मुसीबतों का एक नया दौर शुरू हो गया।
सुमन ने परिवार को बताया कि उनके घर पर किसी ने काला जादू करवा रखा है, जिसकी वजह से बीमारी और पारिवारिक कलह हो रही है। उसने दावा किया कि अगर विशेष पूजा-पाठ और तांत्रिक क्रियाएं नहीं करवाई गईं, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। पहले से ही परेशान परिवार उसकी बातों में आ गया और धीरे-धीरे पूरी तरह उस पर निर्भर हो गया।
आरोप है कि सुमन ने अपने पति बलराज, बेटे वंश और एक अन्य साथी संजीव के साथ मिलकर इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया। चारों ने मिलकर परिवार को अलग-अलग तांत्रिक उपायों में उलझाए रखा और हर बार मोटी रकम की मांग की। वे परिवार को कभी हरिद्वार, कभी कुरुक्षेत्र, तो कभी पटियाला और बागड़ जैसे स्थानों पर ले जाते, जहां कथित रूप से पूजा और तांत्रिक क्रियाएं करवाई जाती थीं।
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें चामुंडा देवी धाम ले जाया गया, जहां ‘बलि’ के नाम पर उनके शरीर से इंजेक्शन के जरिए खून निकाला गया और उसे मंदिर में चढ़ाया गया। यह घटना न केवल अंधविश्वास का चरम रूप है, बल्कि मानवता के खिलाफ भी एक गंभीर अपराध है।
समय के साथ आरोपियों की मांग बढ़ती गई। सुमन ने परिवार को यह भी कहा कि काली माता को प्रसन्न करने के लिए एक मंदिर का निर्माण जरूरी है और उसमें सोने का छत्र चढ़ाना होगा। इस बात पर विश्वास करते हुए परिवार ने अपनी जमीन बेच दी और बैंक में जमा एफडी भी तुड़वा दी।
पीड़ितों के अनुसार, उन्होंने करीब 76 लाख रुपये नकद दिए और लगभग 7 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। इसके अलावा 32 तोले चांदी और 6 तोले सोने के गहने भी आरोपियों को दे दिए गए। इस तरह कुल मिलाकर 1.07 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई।
जब इतनी बड़ी रकम देने के बावजूद परिवार की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, तब उन्हें शक होने लगा। लेकिन तब तक वे आर्थिक और मानसिक रूप से काफी कमजोर हो चुके थे। आरोप है कि जब उन्होंने और पैसे देने से मना किया, तो आरोपियों ने उन्हें डराने और दबाव बनाने की कोशिश की।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें मानसिक रूप से इस कदर प्रभावित किया गया था कि वे सही और गलत का फैसला नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने सम्मोहन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर उन्हें अपने प्रभाव में रखा।
जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई अन्य लोगों को भी इसी तरह अपना शिकार बना चुका है। अनुमान है कि 100 से 150 लोगों से करीब 3 से 4 करोड़ रुपये तक की ठगी की जा चुकी है। ये आरोपी धार्मिक आस्था और डर का सहारा लेकर लोगों को फंसाते और फिर उनसे पैसे और जेवर ऐंठ लेते थे।
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है। आज के आधुनिक युग में भी लोग अंधविश्वास के कारण ऐसे जाल में फंस जाते हैं, जिससे निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। बीमारी या किसी भी समस्या का समाधान केवल वैज्ञानिक और चिकित्सकीय तरीकों से ही संभव है, न कि जादू-टोने या तांत्रिक क्रियाओं से।
जरूरी है कि लोग जागरूक बनें और किसी भी तरह के अंधविश्वास से दूर रहें। साथ ही प्रशासन को भी ऐसे मामलों में सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस तरह की ठगी का शिकार न बने। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अंधविश्वास न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इंसान की सोच और जीवन दोनों को गहराई से प्रभावित करता है।
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