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पानीपत में गर्मी का कहर: आगजनी की बढ़ती घटनाओं ने बढ़ाई चिंता, शाहपुर में किसान की एक एकड़ फसल राख

पानीपत जिले में लगातार बढ़ते तापमान ने अब गंभीर रूप ले लिया है। भीषण गर्मी के चलते आग लगने की घटनाओं में अचानक वृद्धि देखी जा रही है, जिससे किसानों और उद्योगों दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बुधवार को जिले के विभिन्न इलाकों में आगजनी की कई घटनाएं सामने आईं, जिसने प्रशासन और आम जनता की चिंता को और बढ़ा दिया।

एक ही दिन में तीन फैक्ट्रियों सहित पांच से अधिक स्थानों पर आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें खेतों में खड़ी गेहूं की फसल भी आग की चपेट में आ गई। आग की इन घटनाओं के चलते दमकल विभाग को दिनभर अलर्ट मोड पर रहना पड़ा और अलग-अलग स्थानों पर जाकर आग बुझाने का काम करना पड़ा। हालांकि, समय रहते कई जगहों पर आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन कुछ स्थानों पर नुकसान काफी बड़ा रहा।

इसराना क्षेत्र के गांव शाहपुर में एक किसान की मेहनत पर आग ने पानी फेर दिया। यहां मनोज कुंडू नामक किसान की करीब एक एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल पूरी तरह जलकर राख हो गई। किसान का आरोप है कि यह हादसा बिजली विभाग की लापरवाही के कारण हुआ है।

मनोज कुंडू ने बताया कि उन्होंने खेत को ठेके पर लेकर उसमें गेहूं की फसल तैयार की थी। फसल पूरी तरह पक चुकी थी और कटाई का समय नजदीक था। इसी बीच अचानक खेत में आग लग गई, जिसने कुछ ही देर में पूरी फसल को अपनी चपेट में ले लिया। किसान के अनुसार, खेत के ऊपर से गुजर रही बिजली लाइन से निकली चिंगारी इस आग का कारण हो सकती है।

घटना के तुरंत बाद डायल 112 पर सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों ने भी आग बुझाने में सहयोग किया, लेकिन तेज हवा और सूखी फसल के कारण आग तेजी से फैल गई। काफी प्रयासों के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक किसान को भारी नुकसान हो चुका था।

पीड़ित किसान ने प्रशासन को दी गई शिकायत में कहा है कि फसल के समय बिजली विभाग को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए थी। नियमों के अनुसार इस दौरान बिजली लाइनों की नियमित जांच और रखरखाव जरूरी होता है, लेकिन विभाग की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है।

जिले के अन्य हिस्सों में भी आग लगने की घटनाएं सामने आईं, जिनमें तीन फैक्ट्रियां भी शामिल हैं। इन घटनाओं से कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, दमकल विभाग की तत्परता के चलते बड़े हादसे टल गए और आग को फैलने से रोका गया।

लेकिन इन घटनाओं के बीच दमकल विभाग खुद भी समस्याओं से जूझ रहा है। जिले में पिछले आठ दिनों से 105 अस्थायी दमकल कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उनकी हड़ताल के कारण आग बुझाने के कार्य में बाधाएं आ रही हैं और विभाग को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ रहे हैं।

फिलहाल, होमगार्ड के जवानों को आग बुझाने के कार्य में लगाया गया है, लेकिन उन्हें इस काम का पर्याप्त अनुभव नहीं है। इससे कई बार आग पर काबू पाने में अधिक समय लग जाता है और नुकसान बढ़ने की आशंका रहती है।

हरियाणा अग्निशमन विभाग यूनियन के जिलाध्यक्ष रणवीर नादल ने बताया कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर हड़ताल जारी है और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों की कमी के कारण विभाग पर दबाव बढ़ गया है, जिसका असर आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, खासकर जब खेतों में सूखी फसल खड़ी हो और तापमान अधिक हो। ऐसे में छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है। इसलिए इस समय विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे इस मौसम में सावधानी बरतें। खेतों के पास आग जलाने से बचें और बिजली लाइनों के आसपास किसी भी तरह की लापरवाही न करें। साथ ही, किसी भी आगजनी की घटना की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।

पानीपत में बढ़ती आगजनी की घटनाएं एक गंभीर चेतावनी हैं कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं। प्रशासन, बिजली विभाग और दमकल सेवाओं को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा, ताकि किसानों और उद्योगों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

कुल मिलाकर, बढ़ती गर्मी ने पानीपत में आगजनी की घटनाओं को बढ़ावा दिया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ काम करें और ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

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