भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकारी विमानन कंपनी Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने संसद की रक्षा संबंधी स्थायी समिति के सामने अपनी मौजूदा परियोजनाओं और ऑर्डर बुक का विस्तृत ब्योरा पेश किया। कंपनी के अनुसार, उसके पास भारतीय सेना और वायुसेना के लिए लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टरों के बड़े ऑर्डर मौजूद हैं, जो आने वाले वर्षों में देश की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई देंगे।

बड़े पैमाने पर ऑर्डर, बढ़ेगी एयर पावर
HAL ने बताया कि उसे कुल 34 HAL Dhruv हेलीकॉप्टर, 180 HAL Tejas Mk-1A लड़ाकू विमान और 156 HAL Prachand अटैक हेलीकॉप्टर सप्लाई करने का ऑर्डर मिला है। ये सभी प्लेटफॉर्म भारतीय सेना और वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाए जा रहे हैं।
इसके अलावा HAL ने 12 Sukhoi Su-30MKI लड़ाकू विमानों के निर्माण को भी फिर से शुरू कर दिया है। यह प्रोडक्शन लाइन 2019 में बंद कर दी गई थी, लेकिन अब इसे दोबारा सक्रिय किया गया है ताकि वायुसेना की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
तेजस Mk-1A: आधुनिक तकनीक से लैस
HAL ने समिति को बताया कि HAL Tejas Mk-1A के पांच विमान तैयार हो चुके हैं। इन विमानों पर कई महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं। इनमें एडवांस रडार सिस्टम, ASRAAM (करीब दूरी की मिसाइल) और Astra missile (लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल) शामिल हैं।
इन सफल परीक्षणों के बाद तेजस Mk-1A को भारतीय वायुसेना के लिए और अधिक भरोसेमंद और प्रभावी प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। यह विमान न सिर्फ दुश्मन के लड़ाकू विमानों से मुकाबला कर सकता है, बल्कि आधुनिक युद्ध के सभी मानकों पर खरा उतरता है।
उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा
तेजस की बढ़ती मांग को देखते हुए HAL ने महाराष्ट्र के Nashik में तीसरी प्रोडक्शन लाइन शुरू कर दी है। इसके साथ ही कंपनी की सालाना उत्पादन क्षमता बढ़कर 24 विमान हो जाएगी। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वायुसेना को तेजी से नए विमानों की जरूरत है और देरी को कम करना जरूरी है।
हालांकि, तेजस कार्यक्रम में कुछ देरी भी सामने आई है। इसका मुख्य कारण अमेरिकी कंपनी GE Aerospace द्वारा इंजन की सप्लाई में हो रही देरी को बताया गया है। HAL का कहना है कि जैसे ही इंजन की आपूर्ति नियमित होगी, उत्पादन और डिलीवरी में तेजी लाई जाएगी।
2034 तक 2.22 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट
HAL के पास इस समय करीब 2.22 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स हैं, जिनकी डिलीवरी 2034 तक पूरी की जानी है। इन परियोजनाओं में तेजस के अलावा HAL HTT-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट और Dornier Do 228 जैसे विमान भी शामिल हैं।
कंपनी ने अब तक 72 ध्रुव हेलीकॉप्टर सेना को सौंप दिए हैं, जबकि प्रचंड हेलीकॉप्टर के 15 यूनिट भी पहले ही डिलीवर किए जा चुके हैं। यह दिखाता है कि HAL धीरे-धीरे अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा रही है और डिलीवरी में सुधार कर रही है।
रक्षा कंपनियों में असमानता पर चिंता
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि रक्षा क्षेत्र की सरकारी कंपनियों के ऑर्डर बुक में काफी असमानता है। HAL के पास जहां बड़े पैमाने पर ऑर्डर हैं, वहीं अन्य कंपनियों के पास अपेक्षाकृत कम काम है।
समिति का मानना है कि यह अंतर अलग-अलग उत्पादों की प्रकृति, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी विशेषज्ञता के कारण है। हालांकि, यह असमानता लंबे समय में संतुलन की मांग करती है, ताकि सभी कंपनियां समान रूप से विकसित हो सकें।
समिति के अहम सुझाव
संसदीय समिति ने HAL और अन्य रक्षा कंपनियों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। सबसे पहले, कंपनियों को अपने उत्पादों को विदेशी बाजारों में भी बेचने की दिशा में कदम बढ़ाने की सलाह दी गई है। इससे न सिर्फ उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में हिस्सेदारी भी मजबूत होगी।
इसके अलावा समिति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया है। आधुनिक युद्ध में AI की भूमिका तेजी से बढ़ रही है, और भारत को इस क्षेत्र में पीछे नहीं रहना चाहिए।
रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में निवेश बढ़ाने, नई तकनीकों को अपनाने और उत्पादन प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान देने की सिफारिश की गई है। समिति का मानना है कि नवाचार और तकनीकी उन्नति के जरिए ही भारत अपनी रक्षा उत्पादन क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
HAL के ये बड़े ऑर्डर और उत्पादन योजनाएं “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को भी मजबूती देते हैं। देश में ही आधुनिक लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर बनाना न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि रोजगार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा देगा।
आने वाले वर्षों में यदि HAL अपने प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में सफल रहती है, तो भारत न सिर्फ अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरेगा।
कुल मिलाकर, HAL की यह प्रगति भारत की सैन्य ताकत को नई दिशा देने वाली है और यह संकेत देती है कि देश अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
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