राजस्थान के अलवर जिले से सामने आई यह घटना न सिर्फ दिल दहला देने वाली है, बल्कि लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी की एक खौफनाक मिसाल भी पेश करती है। तीन साल की एक मासूम बच्ची, जो रोज़ की तरह टॉफी खाने की चाह में दुकान पर गई थी, उसे क्या पता था कि यह छोटी-सी खुशी उसकी जिंदगी पर भारी पड़ जाएगी। टॉफी की जगह दुकानदार ने उसे बारूद से भरी विस्फोटक पुड़िया थमा दी, जिसे मुंह में रखते ही जोरदार धमाका हो गया और बच्ची का जबड़ा बुरी तरह फट गया।

यह सनसनीखेज मामला अलवर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र के चौकीबास गांव का है। मंगलवार, 3 फरवरी की सुबह गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक किराना दुकान से जोरदार धमाके की आवाज आई और कुछ ही पलों में खून से लथपथ एक मासूम बच्ची जमीन पर गिर पड़ी। बच्ची की हालत देखकर वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर टॉफी खाने से ऐसा कैसे हो सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीन वर्षीय अक्शु अपनी छह साल की बड़ी बहन अहाना के साथ गांव की एक किराना दुकान पर टॉफी लेने गई थी। दुकान पर मौजूद दुकानदार सुदील उर्फ काला, जो नत्थो का पुत्र बताया जा रहा है, ने टॉफी की जगह बच्ची को एक ऐसी वस्तु दे दी, जो देखने में टॉफी जैसी थी, लेकिन उसके भीतर बारूद भरा हुआ था। जैसे ही अक्शु ने उसे मुंह में डालकर चबाया, उसमें जोरदार विस्फोट हो गया।
धमाका इतना तेज था कि बच्ची का जबड़ा, गाल और मुंह का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मासूम दर्द से चीखती हुई वहीं गिर पड़ी और खून से लथपथ हो गई। बच्ची की बड़ी बहन घबरा गई और शोर मचाने लगी। शोर सुनकर आसपास के लोग दुकान की ओर दौड़े और बच्ची को गंभीर हालत में देखकर सभी के होश उड़ गए।
परिजन तत्काल बच्ची को लेकर अलवर के एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत इलाज शुरू किया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची के चेहरे और जबड़े में गहरी चोटें आई थीं, जो साफ तौर पर विस्फोट का संकेत दे रही थीं। स्थिति बेहद नाजुक थी, लेकिन समय रहते सही इलाज मिलने से बच्ची की जान बचा ली गई।
अस्पताल में चिकित्सकीय टीम ने बिना समय गंवाए बच्ची को आईसीयू में भर्ती किया। प्राथमिक उपचार के बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने आपातकालीन सर्जरी का निर्णय लिया। सानिया अस्पताल के निदेशक डॉ. तैयब खान के अनुसार, यह एक जटिल मैक्सिलोफेशियल सर्जरी थी, जिसे ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. जयंत थरेजा के नेतृत्व में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। उनकी टीम में डॉ. एंजल और डॉ. सनत शामिल थे, जबकि एनेस्थीसिया का प्रबंधन डॉ. राजेश ने किया। ऑपरेशन थिएटर में ओटी सिस्टर कविता का सहयोग भी अहम रहा।
करीब कई घंटे चली सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने राहत की सांस ली। डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन सफल रहा है और फिलहाल बच्ची की हालत स्थिर है। वह खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि उसे अभी भी चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।
इधर, इस गंभीर घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया। बच्ची की चाची निकिता ने रामगढ़ थाने में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने आरोपी दुकानदार के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। थाना अधिकारी डॉ. विजेन्द्र सिंह ने बताया कि आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, घटना की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम से भी जांच कराई जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बच्ची को दी गई वस्तु किस प्रकार का विस्फोटक थी और वह दुकानदार के पास कैसे पहुंची। विशेषज्ञों की राय भी ली जा रही है।
हैरानी की बात यह है कि आरोपी दुकानदार लगातार पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। उसका दावा है कि बच्ची को यह चोट सड़क पर गिरने और कोल्डड्रिंक की कांच की बोतल लगने से आई है। हालांकि, पुलिस और डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची के जबड़े और मुंह की चोटें साफ तौर पर विस्फोट की ओर इशारा करती हैं। मेडिकल रिपोर्ट भी दुकानदार के बयान को झूठा साबित कर रही है।
डीएसपी पिंटू कुमार ने बताया कि पुलिस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। यदि जांच में दुकानदार दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की लापरवाही न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ भी है।
इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। गांव में डर और गुस्से का माहौल है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक किराना दुकान पर विस्फोटक सामग्री कैसे रखी गई और बच्चों को इस तरह की जानलेवा चीजें कैसे दी जा सकती हैं।
अस्पताल प्रशासन ने भी इस मौके पर अभिभावकों से अपील की है। डॉ. तैयब खान ने कहा कि छोटे बच्चों को किसी भी संदिग्ध या खाने योग्य न होने वाली वस्तु से दूर रखना बेहद जरूरी है। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति में बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के लिए दर्दनाक है, बल्कि समाज और प्रशासन के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि लापरवाही की एक छोटी-सी चूक किस तरह किसी मासूम की जिंदगी को खतरे में डाल सकती है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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