कानपुर की एक अदालत में उस वक्त हर किसी की आंखें नम हो गईं, जब सात साल की मासूम बच्ची ने अपनी ही मां और उसके प्रेमी के खिलाफ खड़े होकर पिता की हत्या की पूरी कहानी बयां की। बच्ची की गवाही और ठोस सबूतों के आधार पर अपर जिला जज 20 नीलांजना ने हत्यारी मां नेहा और उसके प्रेमी आयुष शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई। दोनों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

यह मामला किदवई नगर वाई ब्लॉक निवासी प्रतीक शर्मा की निर्मम हत्या से जुड़ा है। प्रतीक का विवाह वर्ष 2017 में अयोध्या निवासी नेहा से हुआ था। दंपती के दो बच्चे थे—मान्या और अभिराज। बाहर से यह परिवार सामान्य दिखता था, लेकिन भीतर ही भीतर हत्या की खौफनाक साजिश रची जा रही थी।
लखनऊ के होटल में रची गई मौत की कहानी
6 मार्च 2024 को नेहा अपने पति प्रतीक और दोनों बच्चों के साथ घर से निकली। 12 मार्च को वह सिर्फ बच्चों के साथ वापस लौटी। ससुर पुनीत कुमार शर्मा ने जब बेटे के बारे में पूछा तो नेहा ने गाड़ी खराब होने और बाद में लौटने की बात कही। इसके बाद 16 मार्च को नेहा बच्चों को दवा दिलाने का बहाना बनाकर घर से निकली और फिर कभी वापस नहीं लौटी।
चिंतित पिता पुनीत शर्मा ने बहू और बच्चों समेत बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
जहर देकर हत्या, फिर चुपचाप अंतिम संस्कार
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि नेहा ने अपने प्रेमी और प्रतीक के दोस्त आयुष शर्मा के साथ मिलकर लखनऊ के एक होटल में शराब में जहर मिलाकर प्रतीक की हत्या कर दी। इसके बाद बिना किसी को सूचना दिए वहीं उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मासूम की गवाही बनी सबसे मजबूत सबूत
कोर्ट में सात साल की बेटी ने जो बयान दिया, वही इस केस का सबसे अहम मोड़ साबित हुआ। बच्ची ने बताया कि होटल में उसकी मम्मी नेहा और आयुष अंकल ने पापा को सफेद-सफेद चीज गिलास में घोलकर पिलाई। उसके बाद पापा के खर्राटे बंद हो गए।
बच्ची ने कोर्ट को बताया,
“मैं कंबल के नीचे छिपी हुई थी। वहीं से मैंने सब देखा था।”
उसने यह भी कहा कि पापा को अस्पताल भेजा गया, लेकिन उसके बाद मम्मी और आयुष अंकल एक दिन होटल में उसके साथ रुके और फिर वह, उसका भाई और मां घर लौट आए।
मां की धमकी से कांप गई थी मासूम
बेटी ने कोर्ट में यह भी खुलासा किया कि हत्या के बाद मां ने उसे धमकाया था। कहा था—
“अगर पापा के बारे में किसी से पूछा तो काटकर बाहर फेंक देंगे।”
मां की इस धमकी के चलते बच्ची लंबे समय तक चुप रही, लेकिन आखिरकार अदालत में उसने हिम्मत दिखाई।

होटल मैनेजर की गवाही से पुख्ता हुआ केस
होटल मैनेजर ने भी कोर्ट में पुष्टि की कि नेहा, प्रतीक और आयुष होटल के कमरा नंबर 205 में एक साथ ठहरे थे। प्रतीक ने खुद रजिस्टर में इंट्री की थी। बच्ची के रोने पर स्टाफ कमरे में पहुंचा, जहां प्रतीक की हालत खराब थी। इसके बाद एंबुलेंस बुलाई गई।
सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने नेहा और आयुष को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
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