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सीपीए सम्मेलन में लालजी टंडन ने कहा,संसदीय भाषा का हो रहा क्षरण

राज प्रताप सिंह, लखनऊ ब्यूरो। सीपीए सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए लालजी टंडन ने कहा कि इस विधानसभा में कितनी सार्थक बहस हो चुकी है। मेरा सौभाग्य रहा कि यहां के दोनों सदन का सदस्य रहा हूं। स्पीकर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है जनता के मन को समझता है। जिस तरह से लोकसभा अध्यक्ष ओम माथुर के दिशा निर्देशन में विधेयक पारित हुए है इसमें ओम माथुर की भूमिका सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि सत्ता का काम सरकार चलाना होता है। उसी तरह विपक्ष को अपनी बात कहने का हक होता है। पर दोनों पक्षों को बोलने के लिए लक्ष्मण रेखा नहीं पार करनी चाहिए लेकिन संसदीय भाषा का क्षरण हो रहा है। ये चिंता की बात है। सदन में मर्यादा बनाये रखनी चाहिए किसी के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए । यही सच्चे लोकतंत्र की पहचान होती है। सदन को ठीक से चलाया जाना चाहिए। जिससे नए भारत को एक नई दिशा मिलनी चाहिए। ये हम सबकी जिम्मेदारी है। आलोचना होनी चाहिए पर शब्दों की सीमा में रहकर ही भाषा का प्रयोग हो। साथ ही आचरण का भी ख्याल रखा जाए।

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