डेस्क : देशभर में जारी कोरोना कहर के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशव्यापी लॉकडाउन के 21वें दिन यानी आज मंगलवार को राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि देश पूरी मजबूती के साथ कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहा है। जिस तरह से देशवासियों ने त्याग और तपस्या का परिचय दिया है, वह कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अहम है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की थी, जिसकी अवधि मंगलवार यानी आज खत्म हो रही है।
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पीएम मोदी ने कहा कि सारे सुझावों को ध्यान में रखते हुए ये तय किया गया है कि भारत में लॉकडाउन को अब 3 मई तक और बढ़ाना पड़ेगा, यानी 3 मई तक हम सभी को, हर देशवासी को लॉकडाउन में ही रहना होगा। इस दौरान हमें अनुशासन का उसी तरह पालन करना है जैसे हम करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरी सभी देशवासियों से ये प्रार्थना है कि अब कोरोना को हमें किसी भी कीमत पर नए क्षेत्रों में फैलने नहीं देना है। स्थानीय स्तर पर अब एक भी मरीज बढ़ता है तो ये हमारे लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
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पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना जिस तेजी से फैल रहा है उसने दुनियाभर में सरकारों और हेल्थ एक्सपर्टों को और ज्यादा सतर्क कर दिया है। भारत में कोरोना के खिलाफ लड़ाई अब आगे कैसे बढ़े, हम विजयी कैसे हों, हमारा नुकसान कैसे हो, लोगों की दिक्कतें कैसे कम हो, इन बातों को लेकर राज्यों के सात मैंने निरंतर चर्चाएं की हैं। सबका यही सुझाव यही आता है कि लॉकडाउन को बढ़ाया जाए। कई राज्यों ने पहले ही लॉकडाउन को बढ़ाने का फैसला कर चुके हैं।

देश के नाम संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि नमस्ते मेरे प्यारे देशवासियों, कोरोना वैश्विक महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई काफी मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। आप सभी देशवासियों की तपस्या, आपके त्याग की वजह से भारत अब तक कोरोना से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टालने में सफल रहा है। आप लोगों ने कष्ट सहकर भी अपने देश को बचाया है। हमारे इस भारतवर्ष को बचाया है। मैं जानता हूं आपको कितनी दिक्कतें आई हैं। किसी को खाने की परेशानी, किसी को आने-जाने की परेशानी, तो कोई घर-परिवार से दूर है, लेकिन आप देश की खातिर एक अनुशासित सिपाही की तरह अपने कर्तव्य निभा रहे हैं। मैं आप सबको आदरपूर्वक नमन करता हूं।
पीएम मोदी ने कहा कि साथियों, आज पूरे विश्व में कोरोना की जो स्थिति है, हम सब उससे परिचित हैं। अन्य देशों के मुकाबले भारत ने कैसे अपने यहां संक्रमण को रोकने के प्रयास किए, आप इसके सहभागी भी रहे हैं और साक्षी भी। जब हमारे यहां कोरोना का एक भी केस नहीं था, उससे पहले ही भारत ने कोरोना प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। कोरोना के मरीज 100 तक पहुंचे, उससे पहले विदेश से आए हर यात्रियों के लिए भारत ने 14 दिनों का आइसोलेशन शुरू कर दिया था। मॉल, जिम आदि को बंद कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि जब हमारे यहां कोरोना के 550 केस थे, तभी भारत ने 21 दिन के संपूर्ण भारत के लॉकडाउन का एक अहम और बड़ा कदम उठा लिया। हमने समस्या बढ़ने का इंतजार नहीं किया, बल्कि जैसे ही दिखी उसी समय उसे रोकने का प्रयास किया।
पीएम मोदी ने हा कि वैसे यह ऐसा संकट है, जिसमें किसी भी देश के साथ उचित नहीं है। मगर फिर भी कुछ सच्चाइयों को नकार नहीं सकते। ये भी एक सच्चाई है कि दुनिया के सामर्थ्यवान देशों की तुलना करें तो भारत आज बहुत ही संभली हुई स्थिति में है। महीना-डेढ़ महीना पहले कई देश कोरोना संक्रमण के मामले में एक तरह से भारत के बराबर खड़े थे। आज उन देशों में भारत की तुलना में कोरोना के केस 25 से 30 गुना बढ़ गए हैं। उन देशों में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। भारत ने सही अप्रोच नहीं दिखाया होता और सही फैसले नहीं लिए होते तो आज भारत की स्थिति क्या होती, इसकी कल्पना करते ही रोएं खड़े हो जाते हैं। मगर बीते दिनों के अनुभवों से यह साफ है कि हमने जो रास्ता चुना है, आज की स्थिति में वही हमारे लिए सही है।
उन्होंने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन का लाभ देश को मिला है। सिर्फ आर्थिक दृष्टि से देखें तो यह महंगा जरूर लगता है, मगर भारतवासी की जिंदगी के आगे इसकी कोई तुलना नहीं हो सकती। सीमित संसाधनों के बीच भारत जिस मार्ग पर चला है, उस मार्ग की चर्चा आज दुनियाभर में हो रही है।
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