बिहार में आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए जीविका दीदियों ने बड़ी पहल शुरू की है। अब बच्चों को सिला हुआ पोशाक उपलब्ध कराने की योजना का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि मार्च तक लगभग 50 लाख बच्चों तक पोशाक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के अंतर्गत हर बच्चे को साल में दो पोशाक दी जाएंगी। इसके साथ ही अब इस मॉडल को प्रारंभिक विद्यालयों (कक्षा 1 से 5 तक) में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है।
कार्यक्रम दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में आयोजित किया गया। मंत्री ने कहा कि योजना को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग के साथ समन्वय किया जाएगा और सभी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने के लिए उच्चस्तरीय बैठक जल्द बुलाई जाएगी।
रोजगार और महिला सशक्तिकरण की मिसाल
इस योजना से सिर्फ बच्चों को लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार भी सृजित होगा। वर्तमान में लगभग एक लाख महिलाएं 1050 सिलाई केंद्रों के माध्यम से पोशाक निर्माण से जुड़ी हैं।
मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि हाल ही में स्वरोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत 1 करोड़ 54 लाख दीदियों को 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई। सिलाई मशीन लेने वाली दीदियों को समूहों में बांधकर पोशाक निर्माण से जोड़ा गया। आने वाले समय में योजना का दायरा बढ़ाकर पांच लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है।
जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने कहा कि इस पहल से हजारों महिलाओं को स्वावलंबन, कौशल विकास और आर्थिक सुरक्षा मिली है।
बाल पोषण और देखभाल भी होगी बेहतर
समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को सप्ताह में दो दिन अंडा और रोजाना दूध दिया जा रहा है। पोशाक मिलने से बच्चों में एकरूपता और अनुशासन आएगा। उन्होंने आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं से बच्चों की देखभाल और निगरानी पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि पोशाक निर्माण से न केवल गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयसी ने बताया कि राज्य के 490 आंगनवाड़ी केंद्रों को पालना घर में बदला गया है, जहां कामकाजी महिलाओं के बच्चों की देखभाल शाम 5 बजे तक की जाती है।
तकनीकी पहल और मॉनिटरिंग
कार्यक्रम के दौरान स्टिच मॉनिटरिंग सिस्टम मोबाइल ऐप, सॉफ्टवेयर और सिलाई प्रशिक्षण पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। इससे योजना की पारदर्शिता और कुशल मॉनिटरिंग सुनिश्चित होगी।
मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों को पोशाक उपलब्ध कराना ही नहीं है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक सशक्तिकरण का अवसर देना भी है।
भविष्य की दिशा और उम्मीद
यह योजना न केवल बच्चों के पोषण और शिक्षा में सहायक होगी, बल्कि महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण रोजगार और स्वरोजगार प्रोत्साहन की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगी।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि भविष्य में योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि बिहार के हर छोटे और गरीब बच्चे तक लाभ पहुंचे
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