पंजाब के सिधवां बेट क्षेत्र के गांव शेरेवाल में नशे की त्रासदी ने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया। पांच वर्षों में इस परिवार के पांच भाइयों की मौत नशे की ओवरडोज से हो चुकी है, जबकि उनके पिता भी वर्षों पहले सड़क हादसे में अपनी जान गंवा चुके थे
हाल ही में 25 वर्षीय जसवीर सिंह की मौत ने गांव में एक बार फिर से नशे की भयावहता को उजागर किया। जसवीर की मौत सिर्फ एक युवक की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार की तबाही और दर्दनाक इतिहास का प्रतीक बन गई है।
परिवार में अब सिर्फ उनकी मां छिंदर कौर, दो विधवा भाभियां और तीन मासूम बच्चे ही बचे हैं। सभी पुरुष सदस्य या तो नशे की भेंट चढ़ चुके हैं या हादसों में जान गंवा चुके हैं।
एक-एक कर मौतें, नशे का काला साया
ग्रामीणों ने बताया कि इस परिवार के छह पुरुष सदस्य नशे और हादसों के चलते मारे गए:
2021 में गुरदीप सिंह और जसवंत सिंह नशे की ओवरडोज से चले गए।
2022 में राजू सिंह,
2023 में बलजीत सिंह,
और अब 2026 में जसवीर सिंह ने भी ओवरडोज से दम तोड़ दिया।
पिता मुख्तयार सिंह, जो पेशे से ट्रक चालक थे, की मौत भी सड़क हादसे में हुई थी। ग्रामीणों के मुताबिक यह हादसा अत्यधिक शराब पीने के कारण हुआ था।
गांव में मातम, परिवार की बर्बादी
जसवीर की मौत के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पड़ोसी और ग्रामीण बताते हैं कि परिवार पहले से ही नशे की मार झेल रहा था। अब परिवार पूरी तरह से उजड़ चुका है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और दौरा
इस दुखद घटना की जानकारी मिलने के बाद पंजाब भाजपा के कार्यकारिणी प्रधान एवं पठानकोट विधायक अश्वनी शर्मा गांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और ढांढस बंधाया।
अश्वनी शर्मा ने कहा, “भाजपा इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। पंजाब सरकार के विफल नशा नियंत्रण और बढ़ते हालात ने आम लोगों की उम्मीदों को टूटते देखा है।”
नशे की महामारी का सच
शेरेवाल की यह घटना पंजाब में नशे की गंभीरता को सामने लाती है। एक ही परिवार के पांच भाइयों की मौत यह स्पष्ट करती है कि नशा सिर्फ व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि पूरे परिवारों को तबाह कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नशे के खिलाफ जागरूकता, समय पर इलाज और कड़े कानून बेहद जरूरी हैं। यदि सही कदम उठाए जाएं तो ऐसे परिवारों को बचाया जा सकता है
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