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पूर्णिया में युवक की संदिग्ध मौत, परिजन हत्या का आरोप लगाते हुए सदमे में

पूर्णिया, बिहार: रविवार की सुबह पूरे पूर्णिया जिले में एक चौकाने वाली घटना ने स्थानीय लोगों और परिवार को स्तब्ध कर दिया। अमौर थाना क्षेत्र के सेहलो गांव निवासी 31 वर्षीय मो. रब्बान की संदिग्ध मौत ने परिवार में कोहराम मचा दिया है। युवक ने अपनी पत्नी को मायके घुमाने का वादा करके घर से निकला था, लेकिन कुछ ही घंटों में उनकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया।

रब्बान की पत्नी साबुत्ता परवीन ने बताया कि उनका पति रंग-पेंट का काम करते थे और पांच दिन पहले ही घर आए थे। रविवार सुबह 7 बजे रब्बान बहुत खुश दिखाई दिए और पत्नी से कहा कि “तुम खाना बनाकर रखो, हम जल्दी लौटकर तुम्हें मायके ले चलेंगे।” पत्नी ने खाना तैयार किया और इंतजार करने लगी। लेकिन दो घंटे बाद जब रब्बान घर नहीं पहुंचे, तो उन्होंने उनके मोबाइल पर कॉल किया।

साबुत्ता के अनुसार, फोन उठाने वाले अजनबी ने उन्हें बताया कि उनके पति सड़क हादसे में घायल हो गए हैं और उनका शव पूर्णिया जीएमसीएच में है। यह सुनते ही परिजन दौड़ते हुए अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में पहुँचते ही उन्होंने रब्बान का शव देखा। परिजनों के अनुसार, मृतक के सिर पर गहरे जख्म के निशान स्पष्ट दिखाई दे रहे थे, जिससे उन्हें संदेह हुआ कि यह सड़क दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या हो सकती है।

परिवार का आरोप है कि यह हत्या किसी योजना के तहत की गई और उसे सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की जा रही है। रब्बान की पत्नी साबुत्ता परवीन अस्पताल परिसर में अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर सदमे में बैठी रहीं। मृतक के तीन छोटे बच्चे हैं, जिनके सामने पिता की इस तरह अचानक मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है।

घटना स्थल और पुलिस जांच

इस घटना के बारे में पुलिस ने बताया कि रविवार को सूचना मिलते ही टीम घटनास्थल पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया जीएमसीएच भेज दिया गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिलहाल मृतक की मौत की सटीक वजह का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही चलेगा। हालांकि परिजनों का कहना है कि सिर पर गहरे जख्म और संदिग्ध परिस्थितियां हत्या की ओर संकेत करती हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि रब्बान एक मेहनती और शांत स्वभाव के युवक थे। परिवार के अनुसार, वह शहर में काम करते थे और सप्ताहांत पर घर आते थे। उनकी अचानक और संदिग्ध मृत्यु ने पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक और चिंता फैला दी है।

परिवार की प्रतिक्रिया और सदमा

साबुत्ता परवीन ने मीडिया को बताया कि उनके पति हमेशा अपने बच्चों और परिवार की चिंता करते थे। “वह हमेशा कहते थे कि परिवार मेरी पहली प्राथमिकता है। लेकिन अब हमारे सामने यह सदमा है कि हमारे पति कभी लौटकर नहीं आएंगे। यह हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी क्षति है। मेरे तीन छोटे बच्चे हैं, और मैं नहीं जानती कि अब उन्हें किस तरह समझाऊँ कि उनके पिता अब हमारे बीच नहीं हैं।”

परिजनों का आरोप है कि रब्बान की हत्या किसी कारणवश की गई और उसकी दुर्घटना का ढोंग रचा गया। परिवार ने स्थानीय पुलिस और प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।

पुलिस की कार्रवाई

अधिकारियों ने बताया कि पोस्टमार्टम के परिणाम आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच पूरी तरह से गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ की जा रही है। उन्होंने परिवार से सहयोग का अनुरोध किया और आश्वासन दिया कि यदि हत्या साबित होती है तो अपराधियों को कानून के अनुसार सजा दी जाएगी।

पुलिस ने यह भी कहा कि फिलहाल सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। आसपास के CCTV फुटेज, गवाहों के बयान और मृतक के पिछले गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि मामले में किसी तरह की चूक न हो।

सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण

इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि बिहार में पुरुषों और परिवार की सुरक्षा की क्या स्थिति है। अचानक किसी के जीवन का छिन जाना परिवार और बच्चों के लिए मानसिक और सामाजिक संकट पैदा करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में समाज और प्रशासन को पहले से ज्यादा सजग रहना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव, बच्चों की सुरक्षा और युवाओं की देखभाल हर स्तर पर होनी चाहिए। इस घटना ने यह दिखा दिया कि केवल कानून व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

युवक की अचानक मौत और परिवार की मांग

इस पूरी घटना ने न केवल परिवार बल्कि गांव और जिले में भी गहरा असर डाला है। परिजनों का कहना है कि उनकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और हत्या साबित होने पर दोषियों को कठोर सजा मिले। रब्बान की मौत ने उनके छोटे बच्चों के जीवन को भी स्थायी रूप से प्रभावित कर दिया है।

कुल मिलाकर, यह मामला यह दर्शाता है कि समाज में अचानक और संदिग्ध मौतें कितनी गंभीर चुनौती बन सकती हैं। पुलिस की सतर्कता, पोस्टमार्टम और न्यायिक प्रक्रिया ही परिवार को न्याय दिलाने का माध्यम हैं। साथ ही यह घटना समाज को याद दिलाती है कि हर परिवार की सुरक्षा और बच्चों के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास और जागरूकता आवश्यक है।

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