मेरठ। ब्रह्मपुरी के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत की कार्यवाही के दौरान एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ आया है। जिला जज अनुपम कुमार की अदालत ने मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए ब्रह्मपुरी थाने के तत्कालीन एसएसआई कर्मवीर सिंह और एयरटेल मोबाइल कंपनी के नोडल अधिकारी मयंक मिश्रा को तलब किया है। दोनों को 19 फरवरी को अदालत में उपस्थित होकर गवाही देने के निर्देश दिए गए हैं।

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने केस डायरी में दर्ज एक दस्तावेज पर आपत्ति जताई। यह दस्तावेज उस समय के एसएसआई कर्मवीर सिंह द्वारा तैयार किया गया था, जिन्होंने इस मामले में शुरुआती जांच की थी और आरोपियों की गिरफ्तारी में अहम भूमिका निभाई थी। बचाव पक्ष का कहना था कि केस डायरी के एक पन्ने में दर्ज तथ्यों की पुष्टि आवश्यक है। अदालत ने आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए एसएसआई को दोबारा गवाही के लिए बुलाने का आदेश दिया।
इसी के साथ मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) को लेकर भी बहस हुई। पुलिस ने आरोपित मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के मोबाइल फोन की सीडीआर प्राप्त कर उसे केस डायरी में साक्ष्य के रूप में संलग्न किया है। बचाव पक्ष ने इन डिजिटल साक्ष्यों की वैधता और प्रक्रिया की पुष्टि के लिए संबंधित कंपनी अधिकारी को अदालत में बुलाने की मांग की। अदालत ने यह मांग स्वीकार करते हुए एयरटेल के नोडल अधिकारी मयंक मिश्रा को समन जारी किया।
यह मामला मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र में सामने आया था, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। अभियोजन के अनुसार, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से अपने घर मेरठ लौटे थे। वे पहले नेवी मर्चेंट में कार्य कर चुके थे और उस समय लंदन के एक मॉल में नौकरी कर रहे थे। घर लौटने के बाद उन्होंने 25 फरवरी को अपनी बेटी पीहू का जन्मदिन और 27 फरवरी को पत्नी मुस्कान रस्तोगी का जन्मदिन मनाया।
आरोप है कि तीन मार्च की रात मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर सौरभ की हत्या कर दी। बताया जाता है कि पहले सौरभ के सीने में चाकू से वार किया गया और फिर गर्दन पर हमला कर उनकी जान ले ली गई। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें प्लास्टिक के नीले ड्रम में डालकर ऊपर से सीमेंट का घोल भर दिया गया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
घटना को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी पांच मार्च को हिमाचल प्रदेश के कसोल चले गए थे। वहां कुछ दिन रुकने के बाद वे 17 मार्च को मेरठ लौटे। 18 मार्च को मामले का खुलासा हुआ और 19 मार्च को सौरभ के भाई बबलू की तहरीर पर ब्रह्मपुरी थाना पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर लिया। तब से दोनों आरोपी जेल में बंद हैं। नवंबर माह में मुस्कान ने जेल में एक बच्ची को जन्म भी दिया।
मुकदमे की सुनवाई जिला जज अनुपम कुमार की अदालत में चल रही है। अब तक 18 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें मृतक के परिजन, जांच अधिकारी, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक, पंचनामा भरने वाले अधिकारी, ड्रम और चाकू बेचने वाले दुकानदार, दवा विक्रेता, कैब चालक और मोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों में भौतिक प्रमाणों के साथ डिजिटल साक्ष्य भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पुलिस का दावा है कि सीडीआर और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से आरोपियों की गतिविधियों की पुष्टि होती है। वहीं बचाव पक्ष इन साक्ष्यों की प्रमाणिकता और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
19 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में एसएसआई कर्मवीर सिंह और एयरटेल के नोडल अधिकारी की गवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि वह हर साक्ष्य और प्रक्रिया को परखकर ही आगे बढ़ना चाहती है।
इस बहुचर्चित मामले पर पूरे शहर की नजरें टिकी हैं। अदालत में जारी सुनवाई और गवाहों की गवाही के आधार पर ही तय होगा कि इस सनसनीखेज हत्याकांड में न्याय की दिशा किस ओर जाती है।
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