चकरनगर / इटावा (डॉ एस बी एस चौहान) : स्वच्छता मिशन के तहत शत प्रतिशत दावा ठोकने वाले जनपद इटावा के विकासखंड चकरनगर की जब ग्रामीणांचलों में स्थिति की पड़ताल की जाती है तो पता चलता है कि यहां पर यह दावा कहीं खोखला साबित तो नहीं हो रहा है, या ग्राम प्रधान और सचिव की दूषित मानसिकता तो सिद्ध नहीं हो रही है? इसके लिए हम ग्राम सभा बिठौली का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
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यह विकलांग खुले में शौच करने को हुआ मजबूर। जी हां हम बात करते हैं इटावा जिले के तहसील चकरनगर के अंतर्गत ग्राम पंचायत बिठौली में विकलांग अमित दुबे सुबह के समय जब शौचक्रिया के लिए खुले मैदान में जा रहे हैं। तभी मैंने दौराने प्रश्न विक्लांग से बात की यह तो वाह! क्या बात है सौ प्रतिशत शौचालय वाले गांव में अक्सर देखा जाता है कि वाकई में जिसको जरूरत है शौचालय की उसको शौचालय मुहैया प्रधान/सचिव द्वारा नहीं कराया जाता है।

बड़ी बात है कि 1 विकलांग किस तरीके से खुले में गंदगी फैलाने तो जाएगा ही और साथ ही साथ शासन की मंशा को धकियाता हुआ, जिला प्रशासन और ब्लॉक प्रशासन को प्रश्नगत कटघरे में लाकर खड़ा करेगा? कैसे जाएगा यह बैसाखी पर टिका विकलांग सोचने को मजबूर, जब उस विकलांग से बात की तो उसने बताया कि मैंने कई बार ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव से कहा कि हमारा भी शौचालय का निर्माण करा दिया जाए,लेकिन ग्राम पंचायत सचिव व प्रधान ने अनसुनी कर दी और उसका शौचालय आज तक नहीं बनाया। वह खुले में शौच के लिए हुआ मजबूर, क्यों नहीं देते वरिष्ठ आला अधिकारी क्या इस मुहताज पर ध्यान।
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