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मौत के गड्ढे’ पर राजनीति गरमाई: जनकपुरी हादसे के बाद घटनास्थल बना सियासी रणक्षेत्र, आमने-सामने आए आप और भाजपा

दिल्ली के जनकपुरी इलाके में खुले गड्ढे में गिरकर एक युवक की दर्दनाक मौत के बाद

शुक्रवार को घटनास्थल सिर्फ हादसे की जांच का केंद्र नहीं रहा, बल्कि पूरे दिन राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया। दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। दोनों दलों के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी, नारेबाजी और आरोप-प्रत्यारोप ने माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया।

स्थिति उस समय और गरमा गई जब दिल्ली सरकार के जल मंत्री प्रवेश वर्मा घटनास्थल पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और हादसे के लिए सीधे तौर पर भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया। जवाब में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा संभालते हुए आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ नारे लगाए। दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक नारेबाजी चलती रही, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बना रहा।

‘हादसा नहीं, हत्या है’ — आम आदमी पार्टी का आरोप

जनकपुरी हादसे को लेकर आम आदमी पार्टी ने सरकार पर कड़ा हमला बोला। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश की राजधानी में सड़क के बीच खुले गड्ढे में गिरकर किसी युवक की मौत होना महज दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही से हुई हत्या है। उन्होंने कहा कि नोएडा में हाल ही में हुए इसी तरह के हादसे के बाद भी सरकार नहीं चेती और उसी लापरवाही का नतीजा आज दिल्ली की जनता भुगत रही है।

केजरीवाल ने मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी लापरवाही ने एक घर का चिराग बुझा दिया। वहीं, दिल्ली आप अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका आरोप था कि पीडब्ल्यूडी की सड़क पर दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे में बाइक सवार युवक गिरा और पूरी रात वहीं पड़ा रहा, जिससे तड़प-तड़प कर उसकी मौत हो गई।

सौरभ भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि सुरक्षा के इंतजाम मौके पर नहीं थे। उनके मुताबिक बैरिकेडिंग और पर्दे पुलिस के पहुंचने के बाद सुबह लगाए गए, जबकि रात के समय गड्ढा पूरी तरह असुरक्षित था। उन्होंने मंत्री आशीष सूद द्वारा सुरक्षा के दावों पर भी सवाल उठाए।

भाजपा का पलटवार, जांच और कार्रवाई का भरोसा

दूसरी ओर, भाजपा ने आप के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए पलटवार किया। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने जनकपुरी हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि दिल्ली भाजपा इस दुख की घड़ी में पूरी तरह पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।

पालम से भाजपा विधायक कुलदीप सोलंकी ने बताया कि वे लगातार पीड़ित परिवार के संपर्क में रहे, इलाज के दौरान हरसंभव सहायता की गई और युवक की अंत्येष्टि में भी वे स्वयं शामिल हुए। उन्होंने कहा कि नोएडा में हुई घटना के बाद दिल्ली सरकार पहले से सतर्क थी और 24 जनवरी को दिल्ली जल बोर्ड ने सभी खुदाई स्थलों पर पूर्ण बैरिकेडिंग को अनिवार्य करते हुए स्पष्ट सर्कुलर जारी किया था।

भाजपा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि सर्कुलर में साफ तौर पर उल्लेख था कि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में प्रोजेक्ट इंचार्ज इंजीनियर और संबंधित ठेकेदार जिम्मेदार होंगे। हादसे की सूचना मिलते ही गृह मंत्री आशीष सूद और जल बोर्ड मंत्री प्रवेश वर्मा स्वयं मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि जांच में मानवीय चूक सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी आई सामने

घटनास्थल के निरीक्षण में सामने आया कि जोगिंदर सिंह मार्ग पर दिल्ली जल बोर्ड का सीवर लाइन से जुड़ा काम पिछले कई महीनों से चल रहा था। यहां करीब छह मीटर लंबा, चार मीटर चौड़ा और लगभग 4.25 मीटर गहरा गड्ढा खोदा गया था। हालांकि सड़क के कुछ हिस्सों पर बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन खुदाई स्थल के आसपास सुरक्षा के अनिवार्य मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।

गंभीर बात यह रही कि गड्ढे के बावजूद दुपहिया वाहनों की आवाजाही जारी थी, जबकि ऐसे हालात में ट्रैफिक डायवर्ट करना जरूरी था। पर्याप्त चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर और रात के समय दृश्यता के इंतजाम नहीं होने से यह स्थल आम नागरिकों के लिए जानलेवा साबित हुआ।

यह हादसा ऐसे समय में हुआ, जब कुछ दिन पहले ही नोएडा में इसी तरह की घटना के बाद दिल्ली जल बोर्ड ने सभी इंजीनियरों और एजेंसियों को सुरक्षा मानकों के सख्त पालन के निर्देश दिए थे। जनकपुरी की घटना ने इन आदेशों के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैबिनेट मंत्री के सख्त निर्देश

हादसे के बाद कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी में चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करने के निर्देश जारी किए। इसके साथ ही संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ भी जांच शुरू कर दी गई है। मंत्री ने साफ किया है कि यदि जांच में एजेंसी की लापरवाही साबित होती है, तो उसे ब्लैकलिस्ट करने सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सियासत से परे जवाबदेही की मांग

जनकपुरी हादसे ने एक बार फिर राजधानी में चल रहे निर्माण कार्यों की सुरक्षा और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम लोगों की मांग यही है कि दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है।

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