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बेटी की गवाही से खुला राज, नौसेना कर्मी की हत्या में पत्नी को उम्रकैद

गोवा में भारतीय नौसेना के एक कर्मी की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पत्नी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मडगांव स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने इस मामले में महिला को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सबूत मृतक की आठ वर्षीय बेटी की गवाही और आरोपी के मोबाइल फोन में मिला वीडियो रहा, जिसने अदालत के सामने पूरी घटना की सच्चाई उजागर कर दी।

यह मामला उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के नवादा गांव से जुड़ा है। यहां के रहने वाले कौशलेंद्र प्रताप सिंह भारतीय नौसेना में तैनात थे। उनकी पोस्टिंग गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट के पास स्थित आईएनएस हंसा में थी। वह अपनी पत्नी संध्या और आठ साल की बेटी के साथ गोवा में ही रहते थे। बाहर से देखने में उनका परिवार सामान्य लगता था, लेकिन पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती थी।

कौशलेंद्र प्रताप सिंह की शादी साल 2009 में फर्रुखाबाद जिले के जहानगंज थाना क्षेत्र के बहोरीकपुर गांव की रहने वाली संध्या से हुई थी। शादी के शुरुआती साल ठीक रहे, लेकिन समय के साथ दोनों के बीच रिश्ते में तनाव बढ़ने लगा। बताया जाता है कि संध्या के मोबाइल फोन पर लगातार बात करने को लेकर पति-पत्नी के बीच कई बार झगड़े होते थे। इसी बात को लेकर घर में अक्सर कहासुनी होती रहती थी।

एक जून 2019 की रात भी इसी तरह का विवाद हुआ। देर रात तक दोनों के बीच कहासुनी चलती रही। विवाद के बाद कौशलेंद्र अपने कमरे में जाकर सो गए। लेकिन उस रात संध्या के मन में कुछ और ही चल रहा था। आरोप है कि जब कौशलेंद्र गहरी नींद में थे, तब संध्या ने डंडे से उनके सिर पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से कौशलेंद्र को संभलने का मौका नहीं मिला और गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई।

हत्या करने के बाद संध्या ने एक और चौंकाने वाला काम किया। उसने पूरी घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। इसके लगभग दो घंटे बाद उसने कौशलेंद्र के साथियों को फोन करके बताया कि उनके साथ कोई घटना हो गई है। जब साथी और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे तो कौशलेंद्र खून से लथपथ हालत में बिस्तर पर पड़े मिले।

इस दौरान घर में मौजूद उनकी आठ साल की बेटी भी इस घटना की प्रत्यक्षदर्शी बन गई। रात में शोर सुनकर उसकी नींद खुल गई थी। उसने देखा कि उसके पिता बिस्तर पर खून से लथपथ पड़े हैं। उस समय वह छोटी थी, लेकिन उसने जो देखा वही बाद में अदालत में महत्वपूर्ण गवाही बन गया।

घटना की जानकारी मिलने के बाद गोवा पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआती पूछताछ में संध्या के बयान में कई विरोधाभास पाए गए। इसके बाद पुलिस ने गहराई से जांच की और उसके मोबाइल फोन की जांच की। मोबाइल से मिला वीडियो पुलिस के लिए अहम सबूत बन गया, जिससे पूरी घटना का सच सामने आ गया।

जांच के दौरान पुलिस ने संध्या को गिरफ्तार कर लिया। सभी साक्ष्य जुटाने के बाद विवेचक ने उसके खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इस मामले की सुनवाई गोवा के मडगांव स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय में की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मोबाइल वीडियो, घटनास्थल के साक्ष्य और बच्ची की गवाही को अदालत के सामने पेश किया।

अदालत ने इन सभी साक्ष्यों का गंभीरता से परीक्षण किया। खासतौर पर बच्ची की गवाही को अदालत ने विश्वसनीय माना। उसने जो कुछ देखा था, उसे साफ शब्दों में अदालत के सामने बताया। यही गवाही इस पूरे मामले में निर्णायक साबित हुई।

करीब छह साल तक चली सुनवाई के बाद 10 मार्च को अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने संध्या को अपने पति की हत्या का दोषी करार देते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

मृतक कौशलेंद्र प्रताप सिंह के भाई रवींद्र प्रताप सिंह, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, ने अदालत के फैसले पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और अब उन्हें न्याय मिला है। उन्होंने बताया कि घटना के समय उनकी भतीजी आठ साल की थी और अब वह 15 साल की हो चुकी है। वह फिलहाल उनके साथ रहती है।

उन्होंने कहा कि उनकी भतीजी ने जो देखा था वही सच अदालत के सामने रखा। उसी की गवाही के आधार पर यह फैसला आया है। परिवार को अपने बेटे और भाई को खोने का गहरा दुख है, लेकिन अदालत के इस फैसले से उन्हें न्याय मिलने का एहसास हुआ है।

यह मामला इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें एक छोटी बच्ची की गवाही और मोबाइल फोन में रिकॉर्ड वीडियो जैसे तकनीकी साक्ष्य ने न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई। अदालत ने अपने फैसले से यह स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी अपराध में सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता।

करीब छह साल पहले हुई इस घटना का अब कानूनी रूप से अंत हो गया है। हालांकि इस हादसे ने एक परिवार को हमेशा के लिए तोड़ दिया, लेकिन अदालत के फैसले ने यह साबित कर दिया कि कानून के सामने अपराधी चाहे कोई भी हो, उसे सजा जरूर मिलती है।

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