उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हिंदुस्तान पेट्रोलियम के कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट में हुए दोहरे हत्याकांड के बाद प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इस सनसनीखेज घटना को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न केवल मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को पद से हटाया गया और अब दातागंज के क्षेत्राधिकारी (सीओ) को भी जिले से हटाकर पुलिस महानिदेशक मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है। इसके साथ ही आरोपी की अवैध संपत्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

सीबीजी प्लांट में हुई दो अधिकारियों की हत्या
यह घटना बदायूं जिले के दातागंज क्षेत्र के सैजनी गांव में स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम के कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट में हुई थी। इस प्लांट में कंपनी के दो वरिष्ठ अधिकारियों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। मृतकों में हिंदुस्तान पेट्रोलियम के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता और सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा शामिल थे।
घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। कंपनी के अधिकारियों की इस तरह हत्या होने से उद्योग जगत में भी चिंता का माहौल बन गया था। यह मामला जल्द ही प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया और सरकार ने भी इसे बेहद गंभीरता से लिया।
ठेका खत्म होने से नाराज था आरोपी
जांच में सामने आया कि इस दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह है, जो पहले प्लांट से जुड़ा हुआ था। वह प्लांट में पराली सप्लाई का ठेका लेता था और कुछ अन्य कार्यों में भी शामिल था। बताया गया कि कुछ समय पहले कंपनी ने उसका ठेका समाप्त कर दिया था और उसके कामकाज को भी बंद कर दिया गया था।
इस फैसले से अजय प्रताप सिंह नाराज चल रहा था। प्लांट के अधिकारियों के साथ उसका कई बार विवाद भी हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार वह पहले भी कई बार प्लांट परिसर में आकर हंगामा कर चुका था।
बताया जाता है कि घटना वाले दिन भी वह प्लांट में पहुंचा था और अधिकारियों से उसकी बहस हुई थी। इसी दौरान उसने गुस्से में आकर हमला कर दिया। हमले में दोनों अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी अजय प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
हालांकि घटना के बाद यह सवाल भी उठने लगे कि जब आरोपी का पहले से प्लांट के अधिकारियों से विवाद चल रहा था तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए। इसी को लेकर प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए।
लापरवाही पर एसएसपी को हटाया गया
घटना के बाद शासन ने इस मामले में सख्त कदम उठाए। सबसे पहले बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. बृजेश सिंह को उनके पद से हटा दिया गया। उन्हें लखनऊ मुख्यालय भेज दिया गया।
सरकार की इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था के प्रति सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस घटना को रोकने के लिए पहले से सुरक्षा के उपाय किए जा सकते थे।
अब सीओ को भी हटाया गया
एसएसपी के बाद अब दातागंज के क्षेत्राधिकारी देवेंद्र कुमार पचौरी को भी उनके पद से हटा दिया गया है। शासन ने उन्हें पुलिस महानिदेशक मुख्यालय, लखनऊ से संबद्ध कर दिया है।
उनकी जगह यूपी-112 में तैनात राहुल पांडेय को दातागंज का नया सीओ नियुक्त किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह बदलाव इसलिए किया गया ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके और किसी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश न रहे।
मुख्यमंत्री ने दिए एसआईटी जांच के आदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह एसआईटी मंडलायुक्त भूपेंद्र एस. चौधरी की अध्यक्षता में गठित की गई है।
यह टीम पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि इस घटना के पीछे केवल व्यक्तिगत रंजिश थी या इसके पीछे किसी बड़े षड्यंत्र की भी संभावना है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी और व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराधियों के साथ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी दी जानकारी
शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल से इस मामले को लेकर जानकारी साझा की गई। इसमें बताया गया कि मुख्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
साथ ही यह भी कहा गया कि अगर जांच के दौरान किसी साजिश के संकेत मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्लांट की सुरक्षा बढ़ाई गई
घटना के बाद प्रशासन ने सीबीजी प्लांट की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाए हैं। प्लांट परिसर में स्थायी पुलिस चौकी स्थापित कर दी गई है। इससे पहले वहां इतनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी।
अब पुलिस की नियमित तैनाती की जाएगी और आने-जाने वालों की निगरानी भी की जाएगी। इसका उद्देश्य भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकना है।
आरोपी की संपत्तियों की जांच शुरू
दूसरी ओर प्रशासन ने आरोपी अजय प्रताप सिंह की संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान पता चला कि उसने सैजनी-हजरतपुर मार्ग पर छह दुकानों का निर्माण कराया था।
यह जमीन उसके पिता के नाम पर दर्ज है, लेकिन निर्माण के दौरान सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने की शिकायत सामने आई थी।
बिना नक्शे के कराया गया निर्माण
दातागंज के उप जिलाधिकारी धर्मेंद्र कुमार सिंह के अनुसार इन दुकानों का निर्माण बिना किसी स्वीकृत मानचित्र के कराया गया था। इसके अलावा निर्माण के दौरान लोक निर्माण विभाग की जमीन का हिस्सा भी कब्जा कर लिया गया था।
इस मामले की पहले से जांच चल रही थी। शनिवार को लेखपालों और लोक निर्माण विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की पैमाइश की।
पैमाइश के बाद दुकानें खाली कराई गईं
जांच के दौरान पाया गया कि निर्माण पूरी तरह अवैध है। इसके बाद प्रशासन ने दुकानों को खाली करा लिया है। अब लोक निर्माण विभाग की ओर से आरोपी को नोटिस जारी किया जाएगा।
नोटिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन अवैध दुकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे अधिकारी
इस घटना के बाद मृतक अधिकारियों के परिवारों में शोक का माहौल है। सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा मूल रूप से पीलीभीत जिले के पूरनपुर के निवासी थे।
शनिवार को जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह और पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव उनके घर पहुंचे और परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी।
पिता ने की सीबीआई जांच की मांग
इस दौरान हर्षित मिश्रा के पिता सुशील मिश्रा ने मामले को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि घटनास्थल से तीन अधिकारी वहां से भाग गए थे और उनकी भूमिका भी संदिग्ध लगती है।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए ताकि सच्चाई पूरी तरह सामने आ सके।
मोबाइल और लैपटॉप अभी तक नहीं मिले
हर्षित मिश्रा के पिता ने यह भी बताया कि उनके बेटे का मोबाइल फोन और लैपटॉप अभी तक बरामद नहीं हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इन दोनों उपकरणों को जल्द से जल्द बरामद कराया जाए।
उनका कहना है कि मोबाइल और लैपटॉप में इस मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है।
पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना मामला
बदायूं का यह दोहरा हत्याकांड पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। उद्योग से जुड़े लोगों में भी इस घटना को लेकर चिंता देखी जा रही है।
प्रदेश सरकार लगातार इस मामले की निगरानी कर रही है और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई जारी है।
सरकार ने दिया सख्त संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। अपराध चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।
सरकार की ओर से की गई कार्रवाई यह संकेत देती है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आगे की जांच पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले की निगाहें एसआईटी जांच पर टिकी हुई हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस दोहरे हत्याकांड के पीछे केवल व्यक्तिगत विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी छिपी हुई है।
फिलहाल आरोपी जेल में है और प्रशासन उसकी अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। वहीं पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में सरकार और जांच एजेंसियों की ओर देख रहा है।
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