राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे एनसीआर क्षेत्र में ठंड और कोहरे का प्रकोप लगातार बना हुआ है। तड़के सुबह से ही राजधानी के ज्यादातर इलाकों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता बेहद कम हो गई। इसका सीधा असर सड़क यातायात पर देखने को मिला और वाहन रेंगते नजर आए। कई प्रमुख सड़कों पर लोग बेहद सावधानी से वाहन चलाते दिखे।

कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए लोग सड़कों के किनारे, बस स्टॉप और रिहायशी इलाकों में अलाव जलाकर ठंड से राहत पाने की कोशिश करते नजर आए। दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में ठंड का असर इतना ज्यादा है कि सुबह और देर रात घर से निकलना लोगों के लिए चुनौती बन गया है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, इस समय दिल्ली-एनसीआर में एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन की स्थिति बनी हुई है। इसके कारण सतह की हवाएं चारों दिशाओं में फैल रही हैं। इस मौसमी स्थिति में उत्तर दिशा से आने वाली सर्द हवाएं नीचे की ओर उतर रही हैं, जिससे तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। उन्होंने बताया कि लगभग चार दिन बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञ वरुण गुलाटी का कहना है कि इन दिनों उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने वाली बर्फीली हवाएं हिमालय क्षेत्र से सीधे मैदानी इलाकों तक पहुंच रही हैं। दिल्ली के ऊपर आसमान साफ रहने के कारण रात के समय जमीन की गर्मी तेजी से बाहर निकल जाती है, जिससे न्यूनतम तापमान में तेज गिरावट दर्ज हो रही है।
इसके विपरीत देहरादून और शिमला जैसे पहाड़ी इलाकों में बादलों की मौजूदगी के कारण धरती की गर्मी वातावरण में फंसी रहती है, जिससे वहां का तापमान अपेक्षाकृत अधिक बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल दिसंबर और जनवरी के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। इसका असर यह हुआ कि पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी कम हुई और ठंडी हवाएं बिना किसी रुकावट के मैदानी क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं।
कब माना जाता है ‘कोल्ड डे’?
मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी इलाकों में जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाए और अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री सेल्सियस तक कम दर्ज किया जाए, तो उस दिन को ‘कोल्ड डे’ यानी शीत दिवस घोषित किया जाता है।
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