दिल्ली के साइबर सिटी, सेक्टर-29 में स्थित एक निजी कंपनी के साथ हुई दो करोड़ पांच लाख रुपये की धोखाधड़ी और उसके बाद की धमकी व अवैध वसूली ने पूरे कारोबारी जगत को हिला दिया है। आरोपियों ने खुद को राजस्थान की एक प्रतिष्ठित इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के मालिक बताया और राज्य सरकार के फर्जी प्रशंसा पत्र दिखाकर पीड़ित का विश्वास जीतकर उसे भारी आर्थिक नुकसान में फंसा दिया। मामला इतना गंभीर है कि अब सेक्टर-29 थाना पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, मामला इकोस डेली वे एलएलपी के पार्टनर ईशान जैन से संबंधित है। ईशान ने पुलिस को शिकायत में बताया कि अक्टूबर 2023 में वे नियमित तौर पर दिल्ली के राजघाट स्थित हनुमान मंदिर जाते थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात दीपक शर्मा नामक व्यक्ति से हुई। दीपक ने खुद को जोधपुर स्थित वराह इंफ्रा लिमिटेड का प्रतिनिधि बताया और अपने साथी पारस अशोक मेहता के साथ ईशान के ऑफिस पहुंचे। यहाँ उन्होंने कंपनी के निदेशकों प्रेम सिंह राव, खुशवंत सिंह राव और जगदेव सिंह राव से भी मिलवाया।
आरोपियों ने प्रारंभिक मुलाकात में ही ईशान का विश्वास जीतने के लिए कई चालें अपनाईं। उन्होंने राजस्थान सरकार के टेंडर और फर्जी प्रशंसा पत्र दिखाए, जिससे ईशान पूरी तरह प्रभावित हो गए। इन दस्तावेजों की आड़ में आरोपियों ने दावा किया कि उनकी कंपनी बड़ी सरकारी परियोजनाओं में काम कर रही है और उन्हें उच्च आर्थिक सौदों का अनुभव है।
विश्वास में आकर ईशान ने 29 अक्टूबर 2023 से गुजरात के सुरेंद्रनगर स्थित आरोपियों की साइटों पर तारकोल की सप्लाई शुरू कर दी। शुरूआत में आरोपियों ने समय पर भुगतान किया, जिससे ईशान का विश्वास और भी मजबूत हुआ। लेकिन जल्द ही उनकी चालबाजी सामने आने लगी। आरोपियों ने धीरे-धीरे भुगतान में कटौती करनी शुरू कर दी और समय पर पूरे पैसे देने से इंकार कर दिया।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, ईशान ने महसूस किया कि आरोपियों ने केवल उन्हें अपने जाल में फंसाने के लिए संपर्क किया था। कुल मिलाकर आरोपियों पर करीब दो करोड़ चार लाख 94 हजार 87 रुपये की देनदारी बकाया हो गई। जब ईशान ने बकाया राशि की मांग शुरू की, तो आरोपियों ने असली रंग दिखाया।
पीड़ित ने पुलिस को बताया कि आरोपी पारस और दीपक ने उन्हें गंभीर धमकियां देना शुरू कर दीं। उन्होंने चेताया कि यदि ईशान ने बकाया राशि की मांग जारी रखी तो उन्हें और उनके परिवार को जान से मार दिया जाएगा। धमकियों में आरोपियों ने पीड़ित की पारिवारिक स्थिति का हवाला देकर उसे मानसिक रूप से दवाब में रखा। डर और भय के माहौल में, ईशान को अलग-अलग बैंक खातों में करीब दस लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। इस तरह आरोपियों ने अवैध वसूली को अंजाम दिया।
पीड़ित ने बताया कि मानसिक दबाव और डर के कारण वह कुछ समय तक इस बात को किसी से साझा नहीं कर पाया। आरोपी इतने चालाक और संगठित थे कि उन्होंने पीड़ित को यह महसूस ही नहीं होने दिया कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो गया है।
आर्थिक अपराध शाखा की लंबी और गहन जांच के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में आया। सेक्टर-29 थाना पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपियों ने बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने के लिए कई क़ानूनी और वित्तीय दस्तावेजों का फर्जीकरण किया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने राजस्थान के विभिन्न सरकारी कार्यालयों के नाम का दुरुपयोग करके अपनी कंपनी की वैधता का भ्रम पैदा किया।
अब तक पुलिस ने छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों में दीपक शर्मा, पारस अशोक मेहता और अन्य चार अज्ञात लोग शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी और उन्हें न्याय के सामने लाया जाएगा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पीड़ित को मानसिक आघात और परिवारिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरे में डाल देती है। पुलिस ने व्यापारियों और नागरिकों से अपील की है कि किसी भी नए सौदे में फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान का स्वयं ध्यान रखें।
विशेष जांच अधिकारी ने बताया कि यह मामला यह दिखाता है कि किस तरह से आधुनिक समय के धोखेबाज फर्जी प्रतिष्ठा और सरकारी दस्तावेजों के माध्यम से लोगों को छलते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि व्यापारिक लेन-देन में सतर्कता और कानूनी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया बेहद जरूरी है।
इस घटना ने साइबर सिटी के कारोबारी और आम जनता को भी चौंका दिया है। बड़े पैमाने की धोखाधड़ी और इसके बाद की धमकियों के मामले अक्सर मीडिया में सुनने को मिलते हैं, लेकिन यह मामला खास इसलिए ध्यान खींच रहा है क्योंकि इसमें पीड़ित की गंभीर वित्तीय और मानसिक स्थिति दोनों को खतरा हुआ।
सेक्टर-29 थाना पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़ित को पूरी सुरक्षा दी जाएगी और भविष्य में किसी भी तरह के दबाव या धमकी से बचाने के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।
इस तरह यह मामला केवल एक सामान्य धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि इसे संगठित अपराध का हिस्सा माना जा रहा है। धोखाधड़ी के जाल में फंसे व्यक्ति की कहानी यह दिखाती है कि कैसे आधुनिक समय में आर्थिक अपराधी अपने शिकार को डर और धमकी से नियंत्रित करके अवैध लाभ उठाते हैं।
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