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सेवाशर्त से नाराज शिक्षकों ने फेसबुक पर एनडीए सरकार के खिलाफ चलाया डिजिटल कैंपेन

डेस्क : सेवाशर्त से नाराज शिक्षकों ने विरोध सप्ताह मनाते हुए तीसरे दिन फेसबुक कैंपेन के माध्यम से सेल्फी विथ डिमांड हैशटैग बॉयकॉट एनडीए बिहार एसेम्बली इलेक्शन दो हजार बीस कार्यक्रम का आयोजन करके अपना विरोध प्रकट किया।

टीईटी एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट के राज्यव्यापी आह्वान पर दरभंगा जिला के हजारों शिक्षको ने लॉकडाउन का पालन करते हुए फेसबुक ट्विटर के माध्यम से अपनी मांगों को समाज के समक्ष रखने का कार्य किए।इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी देते हुए संघ के जिलाध्यक्ष प्रमोद मण्डल, प्रवक्ता धनन्जय झा, कोषाध्यक्ष शिबली अंसारी,कार्यकारी महासचिव रंजीत यादव ने बताया कि सरकार के द्वारा दिये गए धोखा और चुनावी झुनझुना से शिक्षक झुकने वाले नही है। जबतक शिक्षको को राज्यकर्मी का दर्जा सहित नियमित शिक्षको के भांति सेवाशर्त और वेतनमान नही मिल जाता है तबतक संघर्ष जारी रहेगा । अभी भी वक्त है सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे अन्यथा हमलोग आगामी चुनाव में सरकार को सबक सिखलाया जाएगा।

वहीं संघ के जिला उपाध्यक्ष राशिद अनवर, डा रणधीर राय, अरुण कुमार जिला सचिव मो ताजुद्दीन, राजीव पासवान ने सेवाशर्त को शिक्षको के साथ घोर अन्याय बताते हुए इसे सरकार की शिक्षको के प्रति असंवेदनशील बताया और कहा कि सरकार नही चाहती कि बिहार के शिक्षक सम्मानजनक जीवन जिये। वह शिक्षको को अपमानित करने का षड्यंत्र रचकर शिक्षको के प्रति संवेदनशील होने का स्वांग रच रही है जिसे बिहार के शिक्षक भली भांति समझ रहे है। संघ के जिला कार्यकारिणी सदस्य सोनू मिश्रा, प्रवीण नायक, रंजन पासवान, सोनू साह, वलिउर रहमान खा ने बताया कि न केवल बिहार के नियोजित शिक्षक बल्कि बीएड डीएलएड उत्तीर्ण लाखो छात्र नौजवान के भविष्य को सरकार दाव पर लगा रही है। लाखो रुपए खर्च करके कोई छात्र बीएड करता है और जब वह टीईटी जैसे कठिन परीक्षा को पास करके विभाग में आता है तो उसे उसका भविष्य असुरक्षित महसूस होता है जिससे कोई भी युवा शौक से शिक्षक नही बनना चाहता है बल्कि मजबूरी में कोई रोजगार नही मिलने पर शिक्षक बनता है। सरकार को कोठारी आयोग, हंटर आयोग, दुबे कमेटी समेत सभी कमेटियों की रिपोर्ट को जनता के सामने रखते हुए तथा बिहार और देश के नौनिहालों को उज्ज्वल भविष्य प्रदान करने एवं गरीब मजदूर किसान के बच्चों के बेहतर कल की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए शिक्षको को उनका अधिकार देना होगा। सेवाशर्त के प्रावधान में कुछ विशेष नही है बस पुराने सामान पर नई पैकेजिंग करके उसे प्रस्तुत किया गया है। हम अपनी लड़ाई को और तेज करेंगे।

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