Breaking News

ठाकरे परिवार का अभेद किला ढहा, मुंबई में फडणवीस की रणनीति को मिली बड़ी जीत

महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत ने ठाकरे परिवार के तीन दशक पुराने वर्चस्व पर पूर्ण विराम लगा दिया है। 28 वर्षों तक जिस नगर निकाय पर ठाकरे परिवार की पकड़ मजबूत मानी जाती थी, उसकी सत्ता अब भाजपा के हाथों में चली गई है। इस जीत को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के राजनीतिक कौशल और ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ के दावे की बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

बीएमसी चुनाव इसलिए भी खास माने जा रहे हैं क्योंकि यह देश की सबसे अमीर नगर निकाय है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बीएमसी का बजट 74,427 करोड़ रुपये का है, जो कई राज्यों के बजट से भी अधिक है। इतने बड़े आर्थिक संसाधनों वाली संस्था की कमान अब भाजपा संभालने जा रही है, जिससे मुंबई की राजनीति में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल गया है।

“मैं समंदर हूं, लौटकर आऊंगा” – फडणवीस ने कर दिखाया

2019 के विधानसभा चुनाव के बाद जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने थे, तब देवेंद्र फडणवीस ने कहा था—

“मेरा पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बसा लेना, मैं समंदर हूं, लौटकर आऊंगा।”

समय ने साबित कर दिया कि यह सिर्फ बयान नहीं था। फडणवीस न केवल सत्ता में लौटे, बल्कि तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। अब बीएमसी में भाजपा की जीत ने उनके कद को और ऊंचा कर दिया है। मुंबई की यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए नए साल का राजनीतिक तोहफा मानी जा रही है।

ठाकरे ब्रांड को सबसे बड़ा झटका

भाजपा के ‘मिशन मुंबई’ की सफलता के साथ ही ठाकरे परिवार का आखिरी राजनीतिक किला भी ढह गया। वर्ष 2017 में अविभाजित शिवसेना को 84 और भाजपा को 82 सीटें मिली थीं, लेकिन तब महापौर शिवसेना का बना था। इस बार भाजपा न केवल स्पष्ट बढ़त में है, बल्कि अपना महापौर बनाने की स्थिति में भी पहुंच गई है। इसे उद्धव ठाकरे से भाजपा का राजनीतिक बदला भी माना जा रहा है।

देवेंद्र फडणवीस की छवि एक साफ-सुथरे और भ्रष्टाचार से दूर नेता की रही है। बीते वर्षों में बीएमसी को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। मुंबईकरों को उम्मीद है कि केंद्र, राज्य और अब नगर निगम—तीनों जगह भाजपा की सरकार होने से विकास कार्यों में तेजी आएगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

गवली परिवार को झटका, राजनीति में असर

बीएमसी चुनाव पूर्व गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली के लिए भी निराशाजनक साबित हुए। उनकी दोनों बेटियां—गीता और योगिता—चुनाव हार गईं। गीता गवली, जो भायखला-अगिपाड़ा वार्ड से लगातार चौथी बार जीत की कोशिश में थीं, समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार से पराजित हुईं। वहीं योगिता गवली को भाजपा प्रत्याशी रोहिदास लोखंडे के हाथों हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा गवली की भाभी वंदना गवली भी शिवसेना के टिकट पर चुनाव हार गईं।

चाचा-भतीजा की जोड़ी भी नहीं दिखा सकी कमाल

पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम चुनाव में शरद पवार और अजित पवार का एक साथ आना भी असर नहीं दिखा सका। भाजपा द्वारा गठबंधन में तरजीह न दिए जाने के बाद दोनों धड़ों की राकांपा ने हाथ मिलाया था। उम्मीद थी कि पवार परिवार का गढ़ माने जाने वाले इलाकों में इसका फायदा मिलेगा, लेकिन नतीजे इसके उलट रहे।

पुणे नगर निगम की 165 सीटों में दोनों राकांपा गुट मिलकर केवल 24 सीटें जीत सके, जबकि भाजपा ने अकेले 123 सीटों पर कब्जा कर लिया। पिंपरी-चिंचवाड़ में भी भाजपा ने 84 सीटें जीतकर बड़ी सफलता दर्ज की। अजित पवार भले ही महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन इन नतीजों ने उनकी राजनीतिक मजबूरी बढ़ा दी है।

भाजपा का दावा: विपक्ष को करारा जवाब

भाजपा ने इन नतीजों को ऐतिहासिक करार दिया है। पार्टी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने नकारात्मक राजनीति को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए को लगातार मिल रहे समर्थन को इन नतीजों की वजह बताया। साथ ही सवाल उठाया कि अब इंडी गठबंधन के भविष्य पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

उद्धव ठाकरे को मुस्लिम वोटों से मिली राहत

हालांकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को सत्ता नहीं मिली, लेकिन वह भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ गठजोड़ के बावजूद सत्ता दूर रही, लेकिन मराठी वोटों के बिखराव को रोकने में कुछ हद तक सफलता मिली। कई सीटों पर मुस्लिम मतों के समर्थन से उद्धव ठाकरे की पार्टी ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को पीछे छोड़ दिया।

निष्कर्ष

बीएमसी चुनाव ने साफ कर दिया है कि महाराष्ट्र की राजनीति में अब नया दौर शुरू हो चुका है। ठाकरे परिवार की पकड़ कमजोर हुई है, जबकि देवेंद्र फडणवीस और भाजपा ने मुंबई से लेकर पूरे राज्य में अपना दबदबा और मजबूत कर लिया है। आने वाले दिनों में इसके असर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में भी साफ नजर आएंगे।

Check Also

धार हत्याकांड में सनसनीखेज खुलासा: बेडरूम वीडियो, अवैध संबंध और साजिश से जुड़ी परतें खुलीं, पत्नी और प्रेमी गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के धार जिले के गोंदीखेड़ा गांव में हुए देवकृष्ण पुरोहित हत्याकांड ने पूरे …

70 फीट गहरे बोरवेल में जिंदगी से जंग: उज्जैन में मासूम को बचाने के लिए जारी है लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे देश का …

मंदसौर में केमिकल से बन रहा था ‘जहरीला दूध’, तीन साल पुराना खेल पुलिस ने किया बेनकाब

मध्य प्रदेश के Mandsaur से सामने आया नकली दूध का मामला लोगों को सोचने पर …