कानपुर के बिठूर थाना क्षेत्र से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। जिस मां ने नौ महीने कोख में रखकर बेटे को जन्म दिया, उंगली पकड़कर चलना सिखाया, उसी बेटे ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर बुजुर्ग मां पर इस कदर जुल्म ढाया कि उसके चार दांत और तीन पसलियां टूट गईं। पीड़िता को गंभीर हालत में हैलट अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा, जहां इलाज के बाद उनकी जान बच सकी।

बहलोलपुर मंधना गांव निवासी 67 वर्षीय मीरा त्रिवेदी पत्नी शिवप्रकाश ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनका बेटा नवनीत और बहू लंबे समय से उनके साथ मारपीट करते आ रहे हैं। घर में रहने नहीं देते और छोटी-छोटी बातों पर बेरहमी से पीटते हैं। हालिया घटना में दोनों ने मिलकर इतनी बुरी तरह हमला किया कि वह बेहोश हो गईं।
पीड़िता का आरोप है कि इस अत्याचार के बाद वह कई बार बिठूर थाने गईं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। पुलिस ने न तो समय पर रिपोर्ट दर्ज की और न ही कोई ठोस कार्रवाई की। उल्टा, पुलिस की मौजूदगी में बेटे-बहू ने उनके कमरे पर ताला लगवा दिया, जिससे बुजुर्ग दंपती बेघर जैसे हालात में आ गए।
मीरा त्रिवेदी का कहना है कि उनके और उनके पति के पास न तो ढंग के कपड़े बचे हैं और न ही सोने के लिए बिस्तर। मजबूरी में दोनों लोग मकान के ऊपर बने कमरे में रहने को मजबूर हैं। सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में उन्हें भारी दिक्कत होती है, जिससे उनकी तबीयत और बिगड़ रही है।
थक-हारकर पीड़िता ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से गुहार लगाई। इसके बाद कमिश्नर के आदेश पर बिठूर पुलिस हरकत में आई और बेटे नवनीत व उसकी पत्नी के खिलाफ जानबूझकर चोट पहुंचाने और मारपीट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
इसके साथ ही पीड़िता ने वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 के तहत उपजिलाधिकारी सदर की अदालत में भी वाद दाखिल किया। अदालत ने 17 जनवरी को आदेश दिया कि बेटा हर महीने की सात तारीख तक तीन हजार रुपये भरण-पोषण के रूप में मां को देगा।
यह मामला न सिर्फ पारिवारिक संवेदनाओं को झकझोरता है, बल्कि पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
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