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झांसी में कर्ज और गम का दर्दनाक अंत: पिता की तेरहवीं के बाद बेटे ने 80 फीट गहरे कुएं में कूदकर दी जान

उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक बेहद मार्मिक और दुखद घटना सामने आई है, जहां पिता की मौत और इलाज के कर्ज के बोझ से टूटे एक युवक ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पिता की तेरहवीं के ठीक अगले दिन बेटे ने 80 फीट गहरे कुएं में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना पूरे गांव को शोक में डुबो गई।

समथर थाना क्षेत्र के गांव खूजा निवासी उदयभान अहिरवार खेती-किसानी के साथ मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। परिजनों के मुताबिक, उदयभान के पिता वृंदावन पिछले करीब दो साल से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके इलाज के लिए उदयभान ने लगभग छह लाख रुपये का कर्ज लिया था। लगातार इलाज और बढ़ते कर्ज ने उसे आर्थिक रूप से कमजोर कर दिया था।

16 जनवरी को पिता वृंदावन का निधन हो गया। इसके बाद से ही उदयभान गहरे सदमे में रहने लगा। परिजनों का कहना है कि पिता की मौत के बाद वह अक्सर चुप रहने लगा था और मानसिक तनाव में था। 28 जनवरी को उसने पिता की तेरहवीं की रस्म पूरी की। इसके अगले ही दिन सुबह करीब छह बजे वह घर से खेतों की ओर जाने की बात कहकर निकला, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा।

सुबह के समय खेतों के पास स्थित कुएं से किसी के गिरने जैसी आवाज सुनकर आसपास की महिलाओं को शक हुआ। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना गांव और परिजनों को दी। परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कुएं में तलाश शुरू की। कुएं में लगभग 50 फीट तक पानी भरा हुआ था, जिसके चलते तुरंत शव नहीं दिख सका।

इसके बाद वाटर पंप लगाकर कुएं का पानी निकलवाया गया। देर शाम जब पानी का स्तर काफी कम हो गया, तब कुएं के अंदर उदयभान का शव दिखाई दिया। शव देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में मातम पसर गया।

उदयभान अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गया है। बेटा पंकज (25) और बेटी कौशल्या (22) की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बेटी सुंदरी (20) के लिए परिजन रिश्ता तलाश रहे थे। परिवार पर पहले से ही कर्ज का बोझ था और अब इस घटना ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है।

समथर थाना प्रभारी अतुल कुमार राजपूत ने बताया कि कुएं से उदयभान अहिरवार का शव बरामद किया गया है। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज, बीमारी और मानसिक दबाव से जूझ रहे लोगों की पीड़ा को उजागर करती है, जहां आर्थिक और भावनात्मक संकट कई बार जानलेवा साबित हो जाता है।

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