पंजाब के पंजाब के बरनाला जिले में रविवार तड़के एक भीषण हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। गांव फरवाही में एक मकान अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया, जिसके नीचे दबकर तीन मजदूरों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ, जब मकान की मरम्मत का काम चल रहा था और उसे जैक की मदद से ऊपर उठाया जा रहा था

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 4:15 बजे की है। गांव निवासी विशाल अपने मकान की मरम्मत करवा रहा था। बताया जा रहा है कि मकान की दीवारों में सीवर का पानी घुसने के कारण वह एक तरफ झुक गया था, जिसके चलते उसे जैक के सहारे उठाकर ठीक करने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन इसी प्रक्रिया के दौरान अचानक पूरा ढांचा असंतुलित हो गया और कुछ ही सेकंड में मकान भरभराकर गिर पड़ा।
हादसे के समय तीन मजदूर मकान के अंदर ही सो रहे थे। अचानक हुए इस हादसे में उन्हें संभलने का कोई मौका नहीं मिला और वे सीधे मलबे के नीचे दब गए। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गांव के गुरुद्वारा साहिब से तुरंत अनाउंसमेंट कर लोगों को मदद के लिए बुलाया गया। इस अनाउंसमेंट के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया गया। साथ ही प्रशासन और पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद मलबे में दबे तीनों मजदूरों को बाहर निकाला गया और एंबुलेंस के जरिए सिविल अस्पताल बरनाला पहुंचाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।
मृतकों की पहचान मोगा जिले के रहने वाले बॉबी सिंह, प्रिंस और गुरजीत सिंह के रूप में हुई है। ये तीनों मजदूर इस मकान की मरम्मत के काम में लगे हुए थे और वहीं ठहरे हुए थे। हादसे के समय वे गहरी नींद में थे, जिससे उन्हें बचने का मौका ही नहीं मिल पाया।
गांव के सरपंच ने बताया कि शुरुआती सूचना में यह आशंका जताई जा रही थी कि मलबे के नीचे चार मजदूर दबे हो सकते हैं। लेकिन बाद में पता चला कि चौथा मजदूर रात करीब 10 बजे ही अपने घर चला गया था और वह सुरक्षित है। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर पूरे मलबे को हटाकर जांच की गई, ताकि कोई और व्यक्ति दबा न रह जाए।
इस हादसे को लेकर डीएसपी सतवीर सिंह ने जानकारी दी कि मकान की हालत पहले से ही खराब थी। दीवारों में पानी घुसने के कारण वह झुक गया था और उसे सीधा करने के लिए जैक का इस्तेमाल किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान संभवतः तकनीकी खामी या लापरवाही के चलते मकान गिर गया।
घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। मृतकों के परिवारों में कोहराम मचा हुआ है और गांव के लोग भी इस हादसे से स्तब्ध हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मरम्मत के दौरान उचित सुरक्षा उपाय अपनाए गए होते, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
इस बीच बरनाला के विधायक कुलदीप सिंह ने भी घटना पर दुख जताया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मृतक मजदूरों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और प्रभावित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के समय प्रशासन की ओर से तुरंत मदद नहीं मिल पाई और ग्रामीणों को खुद ही राहत कार्य करना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जर्जर भवन की मरम्मत करते समय तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी बेहद जरूरी होती है। खासकर जब मकान को जैक से उठाने जैसा जोखिम भरा काम किया जा रहा हो, तब सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
यह हादसा एक बड़ी चेतावनी है कि निर्माण और मरम्मत कार्य में लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। मजदूरों की सुरक्षा को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही हुई है। यदि ऐसा पाया जाता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न केवल एक दुखद हादसा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि छोटे-छोटे सुरक्षा उपायों की अनदेखी कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। अब जरूरत है कि ऐसे मामलों से सबक लिया जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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