हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह की सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। फेसबुक पोस्ट के जरिए उन्होंने मंडी में दिए गए उपमुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कुछ बाहरी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों पर सवाल खड़े किए हैं।

अपने पोस्ट में विक्रमादित्य सिंह ने आरोप लगाया कि यूपी और बिहार जैसे राज्यों से आए कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारी हिमाचल की संस्कृति और “हिमाचलियत” की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि ऐसे अधिकारियों का प्रदेश से भावनात्मक जुड़ाव नहीं है और यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो हिमाचल के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार बाहर से आए अधिकारियों का सम्मान करती है, लेकिन उन्हें स्थानीय अधिकारियों से सीख लेने की जरूरत है। मंत्री ने दो टूक कहा कि हिमाचल में रहते हुए अधिकारियों को यहां के लोगों की सेवा करनी चाहिए, न कि शासक बनने का रवैया अपनाना चाहिए। हिमाचल के हितों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मंत्री की यह टिप्पणी सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोग इसे प्रदेश की अस्मिता और हितों की आवाज बता रहे हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान प्रशासन में क्षेत्रीय खाई पैदा कर सकते हैं। पोस्ट पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
अपनी फेसबुक पोस्ट के अंत में विक्रमादित्य सिंह ने “जय श्रीराम” और “जय हिंद” लिखकर अपनी बात को विराम दिया।
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