मेरठ के सरधना क्षेत्र में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में सामाजिक एकता और संगठन की शक्ति पर खास जोर दिया गया। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में समरसता बढ़ाना और जातिगत भेदभाव को समाप्त कर एक संगठित राष्ट्र की दिशा में आगे बढ़ना रहा।

सम्मेलन की मुख्य अतिथि साध्वी प्राची दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज का बिखराव उसकी ताकत को कमजोर करता है, जबकि एकता से ही राष्ट्र सशक्त बनता है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज लंबे समय तक जातिगत मतभेदों में उलझा रहा, जिसका नुकसान पूरे समाज को उठाना पड़ा। अब समय आ गया है कि इन विभाजनों से ऊपर उठकर एकजुट होने का संकल्प लिया जाए।
सामाजिक आत्ममंथन का आह्वान
साध्वी प्राची ने कहा कि अन्य समुदायों ने संगठन और अनुशासन के बल पर प्रगति की, जबकि हिंदू समाज आंतरिक मतभेदों के कारण पीछे रह गया। उन्होंने समाज से आत्ममंथन करने और एक-दूसरे के साथ खड़े होने की अपील की। उनका कहना था कि जब समाज संगठित होता है, तभी वह अपनी संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रहित की रक्षा कर सकता है।
यूजीसी और राष्ट्रीय नेतृत्व पर टिप्पणी
यूजीसी से जुड़े नए नियमों को लेकर पूछे गए सवाल पर साध्वी प्राची ने कहा कि किसी भी विषय पर विरोध होना चाहिए, लेकिन इस तरह नहीं कि उससे देश के राष्ट्रीय नेतृत्व को कमजोर करने का संदेश जाए। उन्होंने कहा कि देश सुरक्षित हाथों में है और समाज को सजग रहते हुए राष्ट्रहित में सोच-समझकर निर्णय लेने चाहिए।
संगठन और संस्कार को बताया समाज की ताकत
अपने संबोधन में उन्होंने संघ के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन, संस्कार और सामाजिक समरसता ही किसी भी समाज की असली पूंजी होती है। उन्होंने युवाओं और महिलाओं से आगे आकर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
सम्मेलन में अन्य वक्ताओं ने भी सामाजिक मूल्यों, नागरिक कर्तव्यों और आपसी भाईचारे पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि एकजुट और संस्कारवान समाज ही मजबूत राष्ट्र की नींव रख सकता है।
कुल मिलाकर, विराट हिंदू सम्मेलन में सामाजिक एकता, संगठन और राष्ट्रहित को केंद्र में रखकर विचार रखे गए और समाज को विभाजन से ऊपर उठकर एक साथ चलने का संदेश दिया गया
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