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मैथिली के लिए हर हाथ उठना और हर जुवान खुलना जरुरीः मलय

मैथिली के लिए काम करने वाले हर हाथ होगे सम्मानित

झंझारपुर/मधुबनी/अली हसन।
“मैथिल के लिए मैथिली कितना जरूरी“ विषय पर साहित्याड़्गन के दुसरे वार्षिक समारोह के विमर्श सत्र में भारी मनन किया गया। बुधवार को संध्या समय तीसरे सत्र में हो रहे मनन एवं चितंन में साहित्याड़्गन के संस्थापक अध्यक्ष मलय नाथ मण्डन ने कहा कि मैथिली के लिए हर हाथ का उठना और हर जुवान का खुलना जरूरी है। श्री मंडन ने कहा कि इसके लिए प्रत्येक स्तर पर काम कर रहे संगठनो को भी इस मुद्दा पर आवाज बुलन्द करना चाहिए। उन्होने कहा कि प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक संघ के लिए मैथिली भी मुद्दा बनना चाहिए। जिससे हजारों मैथिली भाषा से ज्ञान लेने वाले युवाओं के रोजगार का रास्ता दिखाइ देने लगेगा। इसके अलाबे अधिवक्ता संघ, व्याबसायिक संघ, सामाजिक संगठनों और पंचायत प्रतिनिधियों के संगठनों से भी आगे आने के लिए आग्रह किया। श्री मण्डन ने कहा राजनीतिक दलो के लोगो को भी दलगत भावना से उपर उठकर मैथिल होने की भावना जगानी चाहिए। लोगो से आग्रह किया गया कि वे सरकारी कार्यालयों में शिकायती आवेदन मैथिली में लिखकर भेजें मातृभाषा प्रेम को जगाबें। कोर्ट में मैथिली में ही लोग मामला दायर करें। पंचायत प्रतिनिधियाँ मैथिली में सभी कार्यालयी कार्य करें। संस्था ने लगातार ऐसे सभी कार्य करने वाले लोगों के लिए सम्मान योजना चलाने की घोषणा कि। श्री मण्डन ने कहा कि कई मैथिली साहित्यकार सहित मैथिलों के घरों में अगले जेनरेशन से मैथिली समाप्त कराया जा रहा है। मैथिली के वरीय साहित्यकार जगदीश प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में आयोजित विमर्श सत्र में वक्ता रत्नेश्वर झा ने मैथिली के लिए अधिकांश मुद्दों अपनी बातें रखी। अधिवक्ता अशोक सिंह ,कवि अजित आजाद ,बीहनि कथाकार घनश्याम घनेरो, डाॅ. शिवकुमार प्रसाद, प्रीतम निषाद सहित कई ने विमर्श सभा में अपनी बाते रखी।

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