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उ०प्र०:: ये चायवाला बन सकता है यूपी का न्यू सीएम

लखनऊ : लगभग साल भर पहले जब फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्य को यूपी बीजेपी के नए अध्यक्ष की कमान दी गई थी तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि उनका कद इतना बढ़ जाएगा. मोदी और केशव प्रसाद मौर्य में एक समानता है कि दोनों नेता बचपन में चाय बेचते थे. मौर्य इस समय सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं.

कौशाम्बी जिले के एक किसान परिवार में पैदा हुए केशव प्रसाद मौर्य के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने संघर्ष के दौर में पढ़ाई के लिए अखबार भी बेचे और चाय की दुकान भी चलाई. चाय पर जोर देने का कारण साफ है कि कहीं न कहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी इससे जुड़ाव रहा है, ऐसे में सहानुभूति मिलना तय है.
मौर्य आरएसएस से जुड़ने के बाद विश्‍व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल में भी सक्रिय रहे. इस दौरान उन्‍हें अशोक सिंघल की नजदीकी का फायदा मिला.वीएचपी और बजरंग दल में वह 12 साल रहे.

वर्ष 2012 में इलाहाबाद की सिराथू सीट से वह विधायक बने. 2014 में सांस और 2016 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष. तेजी से उनका सियासी कद बढ़ा. उनके निजी सचिव ने इस बात की पुष्‍टि की है मौर्य ने बचपन में चाय भी बेची है. लेकिन अब वह बड़े नेता हैं और आक्रामक भाषण देने के लिए जाने जाते हैं. राम जन्म भूमि आंदोलन और गोरक्षा आंदोलनों में वह जेल यात्रा कर चुके हैं.

अब करोड़ों की है संपत्‍ति, दर्ज हैं कई मामले

उनके और उनकी पत्नी के पास करोड़ों की संपत्ति है. इलाहाबाद में वह पेट्रोल पंप, अस्‍पताल, एग्रो ट्रेडिंग कंपनी, कामधेनु लाजिस्टिक आदि के मालिक हैं. सामाजिक कार्यो के लिए कामधेनु चेरिटेबल सोसायटी बनाई हुई है. बताया जाता है कि मौर्य पर 11 मुकदमे दर्ज हैं.

जातिगत समीकरण का मिला फायदा

मौर्य कोइरी समाज के हैं और यूपी में कुर्मी, कोइरी और कुशवाहा ओबीसी में आते हैं. कल्‍याण सिंह के बाद वह पहले नेता हैं जिन्‍होंने इस पिछड़े वोटबैंक को बीजेपी की ओर खींचा. बीएसपी के साथ रहे मौर्य नेताओं को तोड़ा.

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