दिल्ली बम धमाके के मामले में गिरफ्तार डॉ. परवेज अंसारी और केजीएमयू लखनऊ के जूनियर रेजिडेंट डॉ. रमीज पर एसएन मेडिकल कॉलेज में एक कथित मतांतरण नेटवर्क संचालित करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों ने मेडिकल छात्राओं को प्रभाव में लेने के लिए ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था।

डॉ. रमीज, जिन्हें यौन शोषण और मतांतरण के आरोप में जेल भेजा जा चुका है, ने वर्ष 2012 में एसएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस में प्रवेश लिया था। इसी वर्ष डॉ. परवेज अंसारी ने एसएन से एमडी (मेडिसिन) की पढ़ाई शुरू की थी। दोनों एसएन परिसर के सीनियर बॉयज हॉस्टल में साथ रहते थे, जहां पास स्थित मस्जिद में नियमित रूप से नमाज अदा करते थे।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए संपर्क बढ़ाने का आरोप
सूत्रों के मुताबिक, ‘इस्लामिक मेडिकोज’ ग्रुप में मुस्लिम मेडिकल छात्रों के साथ कुछ मौलानाओं को भी जोड़ा गया था। इस ग्रुप से जुड़े छात्र हॉस्टल के कमरों में बैठकें करते और धार्मिक चर्चा (तकरीर) आयोजित की जाती थी। इसी दौरान कुछ छात्राओं से दोस्ती बढ़ाकर उन्हें मतांतरण के लिए प्रेरित करने की कोशिश की गई।
2012 से 2017 तक गतिविधियां सक्रिय रहने का दावा
बताया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए कई वर्षों तक मेडिकल छात्राओं को निशाना बनाया गया। हर साल एसएन में प्रवेश लेने वाले मुस्लिम मेडिकल छात्रों और जूनियर रेजिडेंट्स को इस ग्रुप से जोड़ा जाता था। आरोप है कि एक टॉपर छात्रा को भी कथित तौर पर इस जाल में फंसाया गया।
हॉस्टल मस्जिद में बाहरी लोगों की एंट्री पर विवाद
हॉस्टल परिसर की मस्जिद में बाहरी लोगों के आने को लेकर पहले भी विरोध और हंगामे की स्थिति बन चुकी है। डॉ. परवेज अंसारी का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने एसएन प्रशासन से कश्मीर और अन्य राज्यों से आए मेडिकल छात्रों व जूनियर डॉक्टरों का विवरण भी मांगा है।
कमरे सौंपने को लेकर भी आरोप
सूत्रों का कहना है कि जब इस ग्रुप से जुड़े छात्र पढ़ाई पूरी कर हॉस्टल छोड़ते थे, तो अपने कमरे केवल ग्रुप से जुड़े मुस्लिम छात्रों को ही सौंपते थे। यह प्रक्रिया अब भी जारी होने का दावा किया जा रहा है।
ब्लैकमेलिंग के आरोप
कुछ सूत्रों ने आरोप लगाया है कि पहले दोस्ती बढ़ाई जाती थी, फिर छात्राओं की गतिविधियों पर नजर रखकर आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाते थे। इसके बाद मतांतरण के लिए दबाव बनाया जाता था। हालांकि, कई छात्राएं समय रहते इस कथित जाल से बाहर निकलने में सफल रहीं।
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