प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस रोहतक में जल्द ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी तरह बदलने जा रही है। यहां बिना चीर-फाड़ के पोस्टमार्टम यानी वर्चुअल ऑटोप्सी शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। आधुनिक तकनीक से लैस इस प्रणाली के लागू होने के बाद मौत के कारणों का पता अब घंटों या दिनों में नहीं, बल्कि चंद मिनटों में लगाया जा सकेगा।

वर्चुअल ऑटोप्सी में डिजिटल एक्स-रे, सीटी स्कैन और अन्य अत्याधुनिक मशीनों की मदद से शव के अंदरूनी अंगों की जांच की जाएगी। इससे गोली लगने की सटीक जगह, अंदरूनी चोटों की स्थिति और मौत की असली वजह को बिना किसी सर्जिकल चीरे के स्पष्ट रूप से जाना जा सकेगा। यह तकनीक न सिर्फ प्रक्रिया को तेज बनाएगी, बल्कि पारंपरिक पोस्टमार्टम से जुड़ी कई व्यावहारिक और संवेदनशील समस्याओं का समाधान भी करेगी।
करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से लागू होने वाली इस तकनीक के लिए आवश्यक भवन निर्माण का काम पूरा हो चुका है। मौजूदा वित्त वर्ष में वर्चुअल ऑटोप्सी सुविधा शुरू होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। अभी तक पीजीआई में पोस्टमार्टम के लिए शव को चीरा लगाकर जांच की जाती है, जिसके बाद फोटोग्राफी और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होती है। नई तकनीक से यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल और अधिक सटीक हो जाएगी।
20 करोड़ से तैयार हुआ अत्याधुनिक शवगृह
पीजीआई रोहतक में 20 करोड़ रुपये की लागत से एक नया और आधुनिक शवगृह (मॉर्चरी) भी तैयार किया गया है। इसे पूरी तरह डिजिटलाइजेशन से जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना को दो चरणों में पूरा किया जा रहा है। पहले चरण में भवन निर्माण कार्य पूरा किया गया है, जबकि दूसरे चरण में मॉर्चरी के भीतर वर्चुअल ऑटोप्सी तकनीक को स्थापित किया जाएगा।
मॉर्चरी में पहले से ही अलग स्थान निर्धारित कर दिया गया है, जहां सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे और अन्य आवश्यक मशीनें लगाई जाएंगी। इससे तकनीक को लागू करने में किसी तरह की संरचनात्मक बाधा नहीं आएगी।
पीजीआई के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. वरुण के अनुसार, यह तकनीक प्रदेश में पहली बार शुरू की जा रही है। फिलहाल हरियाणा में कहीं भी वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। देश में केवल एम्स में आईसीएमआर के सहयोग से एक प्रोजेक्ट के तहत इस पर काम चल रहा है। वर्चुअल ऑटोप्सी को लेकर देशभर में चर्चा तेज है और इस दिशा में शोध कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
रिसर्च और न्यायिक प्रक्रिया को मिलेगा बढ़ावा
मॉडर्न मॉर्चरी कॉम्प्लेक्स को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस किए जाने से न केवल पोस्टमार्टम प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और पारदर्शी होगी, बल्कि मेडिकल रिसर्च को भी नई दिशा मिलेगी। इसके साथ ही कानूनी मामलों में सटीक और त्वरित रिपोर्ट उपलब्ध होने से न्यायिक प्रक्रिया को भी मजबूती मिलेगी।
दूसरे चरण में जल्द ही आवश्यक उपकरणों की खरीद पूरी कर ली जाएगी और 15 करोड़ रुपये की लागत से वर्चुअल ऑटोप्सी तकनीक को धरातल पर उतारा जाएगा। पीजीआई रोहतक की यह पहल राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में एक नई और आधुनिक शुरुआत मानी जा रही है।
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