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राजपुरा में मौत की धुंध: सड़क पर खड़े कैंटर ने ली कई जिंदगियों की परीक्षा

पंजाब के पटियाला जिले के राजपुरा में रविवार सुबह जो मंजर देखने को मिला, उसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। घनी धुंध, सड़क के बीचों-बीच खड़ा एक खराब कैंटर और कुछ सेकेंड की लापरवाही—इन्हीं वजहों ने मिलकर ऐसा भीषण हादसा रच दिया, जिसमें पीआरटीसी बस समेत 5 से 6 वाहन आपस में भिड़ गए। हादसे के बाद सड़क पर चीख-पुकार, टूटी गाड़ियां, घायल लोग और सहमे हुए चेहरे ही नजर आ रहे थे।

धुंध बनी सबसे बड़ी दुश्मन

रविवार की सुबह थी। ठंड अपने चरम पर थी और राजपुरा क्षेत्र में घनी धुंध छाई हुई थी। विजिबिलिटी इतनी कम थी कि कुछ मीटर आगे देख पाना भी मुश्किल हो रहा था। इसी बीच राजपुरा के गांव चमारू के पास नेशनल हाईवे पर एक कैंटर रात से ही खराब हालत में सड़क के बीच खड़ा था। न तो उसके पीछे कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया था और न ही कोई चेतावनी संकेत। अंधेरे और धुंध के इस खतरनाक मेल ने आगे आने वाले वाहनों के लिए मौत का जाल बिछा दिया।

एक टक्कर, फिर तांडव

सुबह सबसे पहले पीछे से आ रही एक कार उस खड़े कैंटर से टकरा गई। तेज रफ्तार और कम दृश्यता के कारण चालक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इसके बाद मानो हादसों की कड़ी शुरू हो गई। कुछ ही पलों में दूसरी गाड़ी, फिर तीसरी और उसके बाद पीआरटीसी की बस उस कैंटर से जा भिड़ी। बस की टक्कर इतनी जोरदार थी कि उसके आगे का हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। पीछे से आ रहे अन्य वाहन भी अचानक ब्रेक लगाने के कारण आपस में टकरा गए। देखते ही देखते हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई।

उड़े परखच्चे, गूंजती रही चीखें

हादसे के बाद का दृश्य दिल दहला देने वाला था। बस और कारों के परखच्चे उड़ चुके थे। कुछ लोग खून से लथपथ सड़क पर पड़े थे तो कुछ दर्द से कराह रहे थे। बस के अंदर बैठी सवारियां सहमी हुई थीं। चारों ओर चीख-पुकार मची थी। स्थानीय लोग दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे और घायलों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। कई लोगों ने अपने मोबाइल से पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी।

ड्राइवर समेत 12 से ज्यादा घायल

इस भीषण टक्कर में पीआरटीसी बस के ड्राइवर समेत लगभग 12 यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। कुछ को सिर और हाथ-पैर में गहरी चोटें आईं। एक घायल की हालत इतनी नाजुक थी कि उसे तुरंत पटियाला के राजिंदरा अस्पताल रेफर करना पड़ा। बाकी घायलों को राजपुरा के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार दिया।

जब सपनों पर चला पहिया

इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू बस में सवार वे छात्राएं रहीं, जो क्लर्क की परीक्षा देने जा रही थीं। महीनों की मेहनत, दिन-रात की पढ़ाई और भविष्य के सपने—सब कुछ एक झटके में बिखर गया। हादसे में कुछ छात्राओं को चोटें आईं, तो कुछ मानसिक रूप से बुरी तरह टूट गईं। अस्पताल में रोती हुई छात्राओं ने बताया कि वे समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सकीं और उनकी परीक्षा छूट गई। किसी के लिए यह सिर्फ एक हादसा था, लेकिन इन छात्राओं के लिए यह उनके करियर पर लगा गहरा जख्म बन गया।

कैंटर बना ‘काल का दूत’

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कैंटर चालक ने रात में ही सड़क से वाहन हटवा दिया होता या कम से कम चेतावनी संकेत लगाए होते, तो इतना बड़ा हादसा टल सकता था। सड़क के बीच खड़ा यह कैंटर मानो काल का दूत बन गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतनी देर तक हाईवे पर खराब वाहन खड़ा रहा और किसी ने कार्रवाई क्यों नहीं की।

पुलिस और प्रशासन हरकत में

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया, ताकि यातायात बहाल किया जा सके। कई घंटों की मशक्कत के बाद हाईवे पर आवाजाही सामान्य हो पाई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कैंटर चालक की लापरवाही और घनी धुंध हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

डॉक्टरों की जुबानी

राजपुरा के सरकारी अस्पताल में तैनात डॉ. तरन कौर ने बताया कि ज्यादातर घायलों की हालत अब स्थिर है। प्राथमिक उपचार के बाद कई मरीजों को छुट्टी दे दी गई है। हालांकि एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए पटियाला रेफर किया गया है।

सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था

यह हादसा एक बार फिर हाईवे सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े करता है। घनी धुंध के मौसम में सड़क पर खराब वाहनों को यूं ही छोड़ देना कितना खतरनाक हो सकता है, यह राजपुरा हादसे ने साफ दिखा दिया। जरूरत है कि ऐसे मामलों में सख्त नियमों का पालन हो, ताकि भविष्य में किसी और के सपने और जिंदगियां इस तरह सड़क पर न बिखरें।

राजपुरा की यह सुबह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है—कि थोड़ी सी लापरवाही कैसे कई जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल सकती है।

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