भारतीय सर्राफा बाजार इस वक्त इतिहास के सबसे तेज़ बुल रन के दौर से गुजर रहा है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और सप्लाई संकट के बीच सोना और चांदी दोनों ने ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं, जिन्होंने निवेशकों को चौंका दिया है। लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रही है चांदी, जिसकी चाल ने बाजार की सारी पुरानी गणनाएं पलट दी हैं।

जिस चांदी को 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से 2 लाख रुपये तक पहुंचने में करीब 14 महीने लगे थे, उसी चांदी ने 2 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का सफर महज एक महीने में पूरा कर लिया। इतना ही नहीं, बीते एक कारोबारी दिन में ही चांदी के भाव करीब 10 हजार रुपये तक उछल गए।
मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी 9,674 रुपये यानी करीब 3.2 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,19,949 रुपये प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। हाजिर बाजार में भी चांदी के दाम 3.20 से 3.23 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करते दिखे।
सोने की चमक भी कम नहीं चांदी के साथ-साथ सोने ने भी नया इतिहास रच दिया है। एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 2,560 रुपये यानी 1.76 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,48,199 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना पहली बार 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को पार कर गया।
ग्लोबल मार्केट से मिल रहा मजबूत समर्थन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कीमती धातुओं की रैली जारी है। कॉमेक्स पर सोना पहली बार 4,700 डॉलर प्रति औंस के पार निकलकर 4,722.55 डॉलर के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया। वहीं चांदी ने 94.74 डॉलर प्रति औंस का सर्वकालिक उच्च स्तर छू लिया। वैश्विक स्तर पर सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग ने इस तेजी को और हवा दी है।
आंकड़े जो चौंकाते हैं अगर चांदी की हालिया रैली को आंकड़ों में देखें तो तस्वीर और भी हैरान करने वाली है। अक्टूबर 2024 में चांदी का भाव करीब 1 लाख रुपये प्रति किलोग्राम था, जिसे दिसंबर 2025 तक 2 लाख रुपये तक पहुंचने में 14 महीने लगे। लेकिन दिसंबर 2025 से 19 जनवरी 2026 के बीच सिर्फ एक महीने में ही चांदी 2 लाख से सीधे 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार निकल गई। पिछले दो कारोबारी सत्रों में ही कीमतों में 32,000 रुपये से ज्यादा यानी करीब 11 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
तेजी के पीछे क्या हैं बड़े कारण? विशेषज्ञों के मुताबिक इस विस्फोटक तेजी के पीछे कई बड़े वैश्विक और आर्थिक कारक काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, ईरान और अमेरिका के बीच टकराव, वेनेजुएला और NATO से जुड़ी अनिश्चितताओं ने निवेशकों को जोखिम भरे एसेट्स से दूर कर दिया है। ऐसे माहौल में सोना-चांदी एक बार फिर सबसे सुरक्षित विकल्प बनकर उभरे हैं।
इसके अलावा चांदी की औद्योगिक मांग भी लगातार बढ़ रही है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जबकि वैश्विक सप्लाई सीमित बनी हुई है। इसी सप्लाई-डिमांड गैप ने चांदी की कीमतों को रॉकेट स्पीड दे दी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी भी हालांकि जहां एक तरफ तेजी ने निवेशकों को आकर्षित किया है, वहीं कुछ विश्लेषक सतर्क रहने की सलाह भी दे रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इतनी तेज रैली के बाद मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है और चांदी के भाव अस्थायी रूप से 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल सकते हैं। हालांकि लंबी अवधि में ट्रेंड अब भी मजबूत माना जा रहा है।
अब बाजार की नजरें 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं। निवेशक यह देखना चाहते हैं कि सरकार सोने-चांदी के आयात शुल्क को लेकर क्या संकेत देती है, क्योंकि इसका सीधा असर कीमतों की आगे की चाल पर पड़ेगा।
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