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पटना में एनकाउंटर: बिश्नोई गैंग का बिहार नेटवर्क ध्वस्त, कुख्यात अपराधी गिरफ्तार

पटना में पुलिस और कुख्यात अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि बिहार पुलिस संगठित अपराध के खिलाफ पूरी सख्ती के साथ मोर्चा संभाले हुए है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय लॉरेंस बिश्नोई गिरोह को राजधानी पटना में बड़ा झटका लगा है। गिरोह का अहम सदस्य और बिहार में नेटवर्क संभालने वाला परमानंद यादव पुलिस मुठभेड़ में घायल होकर गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई उस वक्त हुई, जब वह किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की तैयारी में था।

बड़ी वारदात से पहले पुलिस की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बीते कुछ समय से खुफिया एजेंसियों को सूचना मिल रही थी कि लॉरेंस बिश्नोई गैंग का एक बड़ा अपराधी बिहार में सक्रिय है। इसी कड़ी में बुधवार देर रात पुख्ता जानकारी मिली कि परमानंद यादव पटना पहुंच चुका है और अपने साथियों से मिलने के बाद किसी गंभीर वारदात की योजना बना रहा है। सूचना मिलते ही पटना पुलिस हरकत में आ गई और कई थानों की टीमों को मिलाकर एक संयुक्त ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की गई।

मसौढ़ी में घेराबंदी, एनएच-22 बना मुठभेड़ का गवाह

गुप्त सूचना के आधार पर मसौढ़ी थाना क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जा रही थी। बताया जा रहा है कि एनएच-22 के पास लाला बीघा गांव के आसपास परमानंद की मौजूदगी की पुष्टि हुई। पुलिस टीमों ने इलाके की घेराबंदी की और संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की। इसी दौरान पल्सर बाइक से जा रहे परमानंद को पुलिस ने रोकने की कोशिश की, लेकिन उसने भागने का प्रयास किया।

खुद को चारों ओर से घिरा देख अपराधी ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई गोलीबारी से इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। कुछ ही देर में चली गोलियों में से एक गोली परमानंद के पैर में जा लगी, जिससे वह बाइक से गिर पड़ा और भाग नहीं सका। इसके बाद पुलिस ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

घायल हालत में अस्पताल, कड़ी सुरक्षा

मुठभेड़ के तुरंत बाद पुलिस ने घायल अपराधी को प्राथमिक इलाज उपलब्ध कराया और फिर उसे पटना के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में कड़ी पुलिस सुरक्षा तैनात की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परमानंद की हालत खतरे से बाहर है और इलाज के बाद उससे विस्तार से पूछताछ की जाएगी।

झारखंड से बिहार तक फैला आपराधिक इतिहास

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, परमानंद यादव झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के चटेर गांव का रहने वाला है। उसके खिलाफ बिहार और झारखंड के कई जिलों में हत्या, रंगदारी, लूट, अवैध हथियार रखने और संगठित अपराध से जुड़े तीन दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं। लंबे समय से वह फरार चल रहा था और लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था।

पुलिस का दावा है कि परमानंद लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए बिहार में कामकाज संभालता था। रंगदारी वसूली, गैंग के लिए नए सदस्यों की भर्ती और हथियारों की सप्लाई जैसे मामलों में उसकी भूमिका बेहद अहम थी।

नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस

इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब परमानंद के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है। उसके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल्स और संपर्क में रहे लोगों की जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों, ठिकानों और आने वाली साजिशों को लेकर अहम जानकारियां मिल सकती हैं।

पुलिस की बड़ी सफलता

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस एनकाउंटर को बड़ी कामयाबी बताया है। उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो पटना या आसपास के इलाकों में कोई बड़ी आपराधिक घटना हो सकती थी। इस ऑपरेशन से न सिर्फ बिश्नोई गैंग को नुकसान पहुंचा है, बल्कि राज्य में सक्रिय अन्य अपराधियों के लिए भी यह कड़ा संदेश है।

अपराध के खिलाफ सख्त रुख

पटना में हुई यह मुठभेड़ एक बार फिर यह दिखाती है कि बिहार पुलिस संगठित अपराध और गैंगवार के खिलाफ किसी तरह की ढिलाई बरतने को तैयार नहीं है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे और अपराधियों के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल परमानंद यादव पुलिस हिरासत में है और उससे जुड़ी जांच आगे बढ़ रही है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद बिहार में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की गतिविधियों पर गहरा असर पड़ेगा

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