भागलपुर शहर में एक बार फिर धार्मिक आस्था से जुड़ा पुराना भूमि विवाद सुर्खियों में है। उर्दू बाजार स्थित काली मंदिर की दान की गई जमीन को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अब दोबारा तूल पकड़ता नजर आ रहा है। इस विवाद ने न सिर्फ स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि इलाके में भय और तनाव का माहौल भी पैदा कर दिया है। मंदिर की जमीन पर कथित कब्जे की कोशिशों और मिल रही धमकियों ने बीते दिनों की हिंसक घटनाओं की यादें फिर से ताजा कर दी हैं।

यह पूरा मामला भागलपुर जिले के तातारपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत उर्दू बाजार स्थित काली मंदिर से जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, काली मंदिर को यह जमीन करीब चार दशक पहले कंठी देवी द्वारा दान स्वरूप दी गई थी। उस समय से यह जमीन मंदिर की संपत्ति के रूप में दर्ज है और पूजा-पाठ व धार्मिक गतिविधियों से जुड़ी रही है। लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे इलाके में जमीन की कीमत बढ़ी, वैसे-वैसे इस बेशकीमती भूमि पर कुछ असामाजिक तत्वों और भूमाफियाओं की नजर पड़ने लगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी इस जमीन को लेकर गंभीर विवाद हुआ था, जो हिंसक घटनाक्रम तक पहुंच गया था। उस समय पूजा समिति के अध्यक्ष रहे धूरी यादव ने मंदिर की जमीन की रक्षा के लिए खुलकर विरोध किया था। आरोप है कि इसी विरोध के कारण उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी। उनकी हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था और लंबे समय तक यह मामला चर्चा में रहा था।
अब एक बार फिर हालात उसी दिशा में जाते दिखाई दे रहे हैं। मुहल्लेवासियों का आरोप है कि कुछ लोग दोबारा मंदिर की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। जमीन पर अवैध निर्माण या घेराबंदी की आशंका को लेकर लोगों में गुस्सा और डर दोनों है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो भी मंदिर की जमीन बचाने की बात करता है, उसे तरह-तरह की धमकियां दी जा रही हैं। कुछ लोगों को तो पूर्व अध्यक्ष धूरी यादव जैसा हश्र होने की चेतावनी तक दी गई है।
सोमवार को इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब मुहल्ले के सैकड़ों लोग एकजुट होकर तातारपुर थाना पहुंचे। हाथों में आवेदन लिए लोगों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और मंदिर की जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मांग की। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है और किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
थाने में मौजूद अधिकारियों ने लोगों की बात सुनी और मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि अंचल अधिकारी की मौजूदगी में अमीन के माध्यम से मंदिर की जमीन की मापी कराई जाएगी, ताकि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके। बताया गया कि विवादित जमीन लगभग डेढ़ कट्ठा है, जो दान के रूप में मंदिर को मिली थी। मापी के बाद जमीन की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन से उनकी चिंता दूर नहीं हो रही है। उनका मानना है कि जब तक जमीन को स्पष्ट रूप से अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जाता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक विवाद खत्म नहीं होगा। लोग यह भी कह रहे हैं कि पहले भी ऐसे आश्वासन दिए गए थे, लेकिन जमीन माफियाओं के हौसले कम नहीं हुए।
इलाके के बुजुर्गों और पूर्व पूजा समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि काली मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इलाके की आस्था और पहचान का केंद्र है। इस मंदिर से कई पीढ़ियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में मंदिर की जमीन पर किसी भी तरह का कब्जा या विवाद स्थानीय लोगों को स्वीकार नहीं है। यही वजह है कि इस बार लोग पहले से ज्यादा संगठित होकर सामने आए हैं।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। लोग आशंकित हैं कि यदि विवाद ने और तूल पकड़ा तो यह फिर से हिंसक रूप ले सकता है। खासकर पुराने मामले में हुई हत्या की पृष्ठभूमि को देखते हुए भय और भी गहरा गया है। स्थानीय दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि वे शांति चाहते हैं, लेकिन मंदिर की जमीन से कोई समझौता नहीं करेंगे।
प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखें तो यह मामला बेहद संवेदनशील बन चुका है। धार्मिक स्थल से जुड़ा भूमि विवाद अक्सर कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए। जमीन की मापी, दस्तावेजों की जांच और जरूरत पड़ने पर पुलिस बल की तैनाती जैसे कदम उठाकर स्थिति को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
यदि समय रहते इस विवाद का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो यह मामला भविष्य में भागलपुर प्रशासन के लिए गंभीर सिरदर्द बन सकता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि मंदिर की जमीन को कानूनी रूप से सुरक्षित किया जाए और जो भी लोग अवैध कब्जे की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल, पूरे इलाके की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है, ताकि आस्था से जुड़ा यह विवाद किसी बड़े टकराव में न बदले।
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