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जानलेवा हमले के दोषियों को सजा, चार भाइयों को तीन साल की कैद

मेरठ जनपद की अपर सत्र न्यायालय-12 ने एक गंभीर आपराधिक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए जानलेवा हमले के आरोप में चार सगे भाइयों को दोषी करार दिया है। अदालत ने सभी दोषियों को तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 4500 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। यह फैसला लगभग पांच साल पुराने उस मामले में आया है, जिसने ग्रामीण इलाके में भय और तनाव का माहौल पैदा कर दिया था।

यह मामला मेरठ जिले के फलावदा थाना क्षेत्र के ग्राम बातनौर का है, जहां 1 जून 2020 को चार सगे भाइयों—मोहित, अनिल, मनीश और भूरी उर्फ सुशील—ने मिलकर एक परिवार पर जानलेवा हमला किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने आपसी रंजिश के चलते पीड़ित जहारिया के घर में जबरन घुसकर पहले गाली-गलौच की और फिर जान से मारने की नीयत से धारदार हथियारों से हमला कर दिया।

हमले के दौरान न केवल जहारिया बल्कि उनके परिजन भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई थी। घायल अवस्था में पीड़ितों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका उपचार चला। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए थे।

घटना की सूचना मिलते ही फलावदा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू की। पुलिस ने घायलों के बयान दर्ज किए, घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए और चिकित्सकीय रिपोर्ट को केस डायरी में शामिल किया। विवेचना के दौरान पुलिस को आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर चारों भाइयों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।

मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश-12 की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को झूठा बताते हुए खुद को निर्दोष साबित करने का प्रयास किया। हालांकि, अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद अभियोजन पक्ष के तर्कों को मजबूत पाया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह स्पष्ट है कि आरोपियों ने संगठित रूप से पीड़ित के घर में घुसकर जानलेवा हमला किया। यह न केवल गंभीर अपराध है, बल्कि सामाजिक शांति और कानून व्यवस्था के लिए भी खतरा है। इसी आधार पर अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल के कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई।

फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में मौजूद पीड़ित पक्ष ने संतोष जताया और कहा कि उन्हें न्याय मिला है। वहीं दोषियों के परिजन फैसले से मायूस नजर आए। इस निर्णय को ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त सजा से समाज में एक स्पष्ट संदेश जाता है कि कानून अपने हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह फैसला भविष्य में अपराधियों के लिए चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।

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